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खाली रह जाती है सीटें, अब सरकार लगाएगी निजी इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने पर रोक

यूपी में 500 से ज्यादा निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं लेकिन इन आधे से ज्यादा कॉलेजों में पिछले कई साल पूरी सीटें नहीं भर पाई हैं।

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लखनऊ. यूपी में 500 से ज्यादा निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं लेकिन इन आधे से ज्यादा कॉलेजों में पिछले कई साल पूरी सीटें नहीं भर पाई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार इंजीनियरिंग कॉलेज व पॉलीटेक्निक खोलने के लिए नई नीति लाने जा रही है। इसमें शर्तों के साथ पालीटेक्निक खोलने की अनुमति देने पर विचार किया जाएगा, लेकिन निजी इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सरकार द्वार इसके लिए ‘ड्राफ्ट परस्पेक्टिव प्लान’ पर 20 नवंबर तक सुझाव व आपत्तियां दी जा सकेंगी।प्राविधिक शिक्षा सचिव भुवनेश कुमार ने बताया कि इसके लिए ‘ड्राफ्ट परस्पक्टिव प्लान’ तैयार किया जा रहा है। मौजूदा समय इंजीनियरिंग कालेजों की करीब 62 फीसदी सीटें खाली रह जाती हैं। केंद्र सरकार के निर्देशों व मुख्यमंत्री की घोषणा पर डिग्री, डिप्लोमा स्तरीय नए प्राविधिक संस्थानों व पाठ्यक्रमों शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।उन्होंने बताया कि यूपी में तकनीकी शिक्षा को बेहतर व प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए अखिलेश भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के सुझाव पर प्रदेश में पॉलीटेक्निक व इंजीनियरिंग कॉलेज व नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए ‘ड्राफ्ट परस्पेक्टिव प्लान’ तैयार किया जा रहा है। इस पर लोगों से उनका पक्ष मांगा गया है।

इसके मुताबिक 25 फीसदी से कम प्लेसमेंट वाले जिले में नए राजकीय पालीटेक्निक खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 25 फीसदी से अधिक प्लेसमेंट वाले जिलों में राजकीय पालीटेक्निक में अतिरिक्त पाठ्यक्रम की अनुमति दी जाएगी।इसी तरह 10 फीसदी से अधिक सीटें खाली रहने वाले जिलों में नए निजी पॉलीटेक्निक खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

10 फीसदी से कम सीटें खाली रहने और किसी जिले में निजी क्षेत्र में पालीटेक्निक न होने पर वहां दो नए निजी पॉलीटेक्निक खोलने की अनुमति दी जाएगी। प्रदेश में नए राजकीय पॉलीटेक्निक खोलने के स्थान पर पूर्व से चल रही संस्थाओं में सीटें बढ़ाने, उनमें साज-सज्जा, उपकरण, छात्र सुविधाएं तथा शिक्षकों की उपलब्धता एआईसीटीई मानक के अनुसार होने पर जोर दिया जाएगा।