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यूपी के अफसरों को अब 10 मिनट के अंदर जनप्रतिनिधियों की कॉल का देना होगा जवाब, आदेश पारित

UP Officers Call Response Order : जनप्रतिनिधियों की कॉल न उठाए जाने का मुद्दा सदन में उठा था। इस पर सरकार ने नियम बना दिया है कि अधिकारी को जनप्रतिनिधि के फोन का 10 मिनट के अंदर जवाब देना होगा।
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लखनऊ

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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 24 Feb 2026, 6:02 PM IST

योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए मंत्री असीम अरूण ने अधिकारियों को दिए निर्देश, PC-Patrika

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में जनप्रतिनिधियों की कॉल न उठाए जाने की शिकायतों के बाद अब सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जनप्रतिनिधियों की कॉल का अधिकतम 10 मिनट के भीतर जवाब दें या कॉल बैक करें। इस संबंध में नई व्यवस्था 25 फरवरी से लागू की जाएगी।

यह मामला 17 फरवरी को विधानसभा में जोर-शोर से उठा था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया था कि कई अधिकारी विधायकों के फोन तक नहीं उठाते। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

‘संवाद सेतु’ व्यवस्था की शुरुआत

जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए ‘संवाद सेतु’ (जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर) प्रणाली शुरू की जा रही है। यह पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गाजियाबाद, हरदोई और कन्नौज में लागू होगा।

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरूण ने तीनों जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तय समय सीमा में तैयारियां पूरी करें।

कैसे काम करेगी व्यवस्था?

हर जिले में जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा। यदि कोई अधिकारी जनप्रतिनिधि की कॉल 10 मिनट के भीतर न उठाए या कॉल बैक न करे, तो जनप्रतिनिधि कमांड सेंटर को सूचित कर सकेंगे। इसके बाद कमांड सेंटर संबंधित अधिकारी को तुरंत संपर्क करने के निर्देश देगा और बातचीत सुनिश्चित करेगा।

यह व्यवस्था केवल कार्यदिवस और कार्यालय समय में सरकारी (CUG) नंबरों पर लागू होगी। जो अधिकारी बेहतर संवाद और त्वरित प्रतिक्रिया देंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं लापरवाही बरतने वालों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

संवैधानिक जिम्मेदारी का हवाला

विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 164(2) के तहत मंत्रिपरिषद राज्य विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है। ऐसे में यदि कोई विधायक जनहित के मुद्दे पर अधिकारियों से संपर्क करता है, तो उसे सम्मान और समय दिया जाना चाहिए। सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।