
DGP Sulkhan Singh
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के डीजीपी सुलखान सिंह का कार्यकाल रविवार खत्म हो रहा है। 31 दिसंबर को उनका तीन महीने का सेवा विस्तार भी इसी के साथ खत्म हो जाएगा। ऐसे में अब बड़ा सवाल ये है कि उन्हें तीन महीने का और सर्विस एक्सटेंशन मिलेगा या नहीं। अगर नहीं होता है तो यूपी का अगला डीजीपी कौन होगा? ये बड़ी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश में मौजूद किसी अधिकारी को मिलेगी या प्रतिनियुक्ति पर किसी अधिकारी को बाहर से बुलाया जाएगा। इन तमाम बातों को लेकर अटकलों का बाजार काफी गर्म है।
लोकसभा चुनाव तक संभाले जिम्मेदारी
सूत्रों की अगर मानें तो उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसी ऐसे डीजी की तलाश में है, जो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक यह जिम्मेदारी संभाल सके। यानी सूबे की सरकार ऐसे डीजी को यूपी पुलिस का मुखिया बनाना चाहती है, जिसका कम से कम डेढ़ साल का कार्यकाल अभी बाकी बचा हो। ऐसे में अगर देखा जाए तो इस मसय यूपी में विजिलेंस के डीजी हितेश चंद्र अवस्थी, इंटेलीजेंस में डीजी भवेश कुमार और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर डीजी एसएसबी रजनीकांत मिश्रा का नाम चर्चा में सबसे आगे है।
इन अधिकारियों पर भी चर्चा
वहीं दूसरी तरफ अगर देखा जाए तो वरिष्ठता क्रम में प्रवीण सिंह का नाम सबसे आगे है। लेकिन प्रवीण सिंह का कार्यकाल केवल जून 2018 तक ही बचा है। अगर वह डीजीपी बनते हैं तो उन्हें छह माह का कार्यकाल मिलेगा। प्रवीण सिंह के बाद उनके ही बैचमेट डीजी होमगार्ड डॉ सूर्य कुमार का नंबर आता है। पिछले दो साल से उनका नाम डीजीपी की रेस में लगातार चर्चा में बना हुआ है। जानकारी के मुताबिक यूपी सरकार इस बात पर भी चर्चा कर रही है कि प्रवीण सिंह को डीजी बना दिया जाए और उनके रिटायर होने के बाद हितेश अवस्थी को डीजी बनाया जाए। आपको बता दें कि हितेश अवस्थी का कार्यकाल जून 2021 तक है। जबकि भवेश सिंह का कार्यकाल जनवरी 2020 तक है। वहीं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए रजनीकांत मिश्रा का कार्यकाल अगस्त 2019 तक है।
सरकार के सामने मुश्किल
दरअसल सरकार के सामने मुश्किल ये है कि अगर भवेश सिंह को डीजी बनाया जाता है तो यूपी में मौजूद कम से कम एक दर्जन आईपीएस अधिकारियों को सुपरसीड करना होगा। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में डीजी की कुल संख्या 20 है। इसमें मौजूदा डीजीपी सुलखान सिंह और पूर्व डीजीपी जावीद अहमद भी शामिल हैं। इनके अलावा 6 डीजी रैंक के अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिसमें पूर्व डीजीपी जावीद अहमद भी शामिल हैं। ऐसे में सुलखान सिंह के रिटायर होने के बाद प्रदेश में उपलब्ध डीजी रैंक के अधिकारियों की संख्या 13 बचेगी। जिसमें भवेश कुमार सिंह का नंबर 12वां है। उनसे जूनियर केवल एडीजी वाराणसी जोन विश्वजीत महापात्रा ही हैं।
इनको भी मिल सकती है जिम्मेदारी
ऐसे में सरकार वरिष्ठता के आधार पर प्रवीण सिंह को डीजी बना सकती है। लेकिन जातिवाद को लेकर पैदा होने वाले किसी विवाद से बचने के लिए हितेश अवस्थी और रजनीकांत मिश्रा में से किसी एक को भी उत्तर प्रदेश के डीजीपी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ चर्चाएं ये भी हैं कि सरकार डीजीपी सुलखान सिंह को ही एक और सेवा विस्तार दे सकती है। तो कुछ ये दावा कर रहे हैं कि सुलखान सिंह को यूपी सरकार अब दूसरी बड़ी जिम्मेदारी देकर डीजीपी की कुर्सी किसी और को दे सकती है।
Updated on:
30 Dec 2017 06:00 pm
Published on:
30 Dec 2017 05:56 pm
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