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क्या यूपी में RSS बनेगी BJP के लिए संकटमोचन? इन मुद्दों को सुलझाना सबसे बड़ी चुनौती!

UP Politics: RSS और बीजेपी के बीच बढ़ती सक्रियता 2027 चुनाव की तैयारी का संकेत है। मेरठ दौरे और संवाद कार्यक्रमों के बीच संघ नेतृत्व लगातार संपर्क में है।

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लखनऊ

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Anuj Singh

Feb 20, 2026

क्या 2027 में RSS बनेगी बीजेपी की ‘संकटमोचन’?

क्या 2027 में RSS बनेगी बीजेपी की ‘संकटमोचन’?

UP Politics: 18 फरवरी 2026 की शाम को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। यह बैठक लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई। शाम करीब 8 बजे शुरू हुई यह बातचीत लगभग 35-40 मिनट तक चली। यह मुलाकात इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। बीजेपी और RSS के बीच यह संवाद पार्टी की चुनावी रणनीति को मजबूत करने का संकेत दे रहा है।

डिप्टी सीएम की भी हुई मुलाकात

योगी आदित्यनाथ के बाद 19 फरवरी को यूपी के दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी मोहन भागवत से अलग-अलग मुलाकात की। केशव प्रसाद मौर्य सुबह 9:30 बजे के आसपास पहुंचे और ब्रजेश पाठक ने भी अलग से समय लिया। ये बैठकें छोटी थीं, लेकिन इनसे साफ है कि RSS प्रमुख यूपी की पूरी बीजेपी टीम से जुड़ाव बढ़ा रहे हैं। यह दिखाता है कि संघ 2027 के चुनाव में बीजेपी को हर स्तर पर सपोर्ट देना चाहता है।

मोहन भागवत का मेरठ दौरा और कार्यक्रम

मोहन भागवत अभी मेरठ दौरे पर हैं। 20 और 21 फरवरी को वे दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। RSSके शताब्दी वर्ष के दौरान उनके यूपी दौरे काफी अहम हैं। वे हिंदू समाज में एकता, सतर्कता और सामाजिक सामंजस्य पर जोर दे रहे हैं। लखनऊ में सद्भाव सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि हिंदुओं को एकजुट रहना होगा, हालांकि कोई तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। वहीं मोहन भागवत के मेरठ दौरे के तुरंत बाग, पीएम मोदी भी मेरठ में 22 फरवरी को कार्यक्रम शामिल होंगे।

क्या RSS बनेगी बीजेपी की संकटमोचन?

आरएसएस हमेशा से बीजेपी की वैचारिक ताकत रही है। चुनावों में संघ के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर काम करते हैं, वोटरों तक पहुंचते हैं और संगठन को मजबूत बनाते हैं। 2017 और 2022 में यूपी चुनावों में RSS की भूमिका बहुत बड़ी थी। अब 2027 में भी संघ बीजेपी के लिए संकटमोचन बन सकती है। योगी सरकार के काम, हिंदुत्व एजेंडा और विकास योजनाओं को संघ के माध्यम से और मजबूती मिल सकती है। मुलाकातों से लगता है कि दोनों संगठन मिलकर चुनावी तैयारी तेज कर रहे हैं।

RSS के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

फिर भी कई मुद्दे ऐसे हैं जो बीजेपी के लिए चुनौती बने हुए हैं। इनको सुलझाना सबसे जरूरी है:

जातिगत समीकरण: यूपी में जाति बहुत बड़ा फैक्टर है। पिछड़े वर्ग, दलित और मुस्लिम वोटरों का समर्थन बरकरार रखना मुश्किल हो रहा है। RSS हिंदू एकता पर जोर दे रही है, लेकिन जाति से ऊपर उठाना आसान नहीं।

विपक्ष की मजबूती: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन में मजबूत हो रहे हैं। अखिलेश यादव युवा और पिछड़े वोटरों को लुभा रहे हैं। बीजेपी को इनसे मुकाबला करने के लिए नई रणनीति चाहिए।

आंतरिक कलह: पार्टी में कभी-कभी गुटबाजी देखी जाती है। मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव की चर्चाएं चल रही हैं। RSS इन सबको संतुलित करने में मदद कर सकती है।

महंगाई और बेरोजगारी: आम जनता के मुद्दे जैसे महंगाई, रोजगार और किसानों की समस्याएं। इन्हें हल करना जरूरी है, वरना वोटर नाराज हो सकते हैं।

हिंदुत्व का संतुलन: हिंदुत्व कार्ड मजबूत है, लेकिन सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चुनौती है। आरएसएस इसमें मददगार साबित हो सकती है।

विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संदेश

योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत की मुलाकात 2027 के लिए बड़ा संदेश है। आरएसएस बीजेपी के लिए संकटमोचन बन सकती है, लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब जाति, आर्थिक मुद्दे और आंतरिक एकता जैसे चुनौतियों को सुलझाया जाए। संघ और सरकार मिलकर काम करेंगे तो बीजेपी फिर मजबूत स्थिति में होगी। अभी समय है तैयारी का, और ये मुलाकातें इसी दिशा में कदम हैं।