
ब्राह्मण वोटरों को साधने की सियासी होड़ तेज, पूर्वांचल में ताकत दिखाएंगे ओम प्रकाश राजभर (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Brahmin Outreach Politics Heats Up in UP: उत्तर प्रदेश की सियासत में जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मियां बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे सामाजिक समीकरणों को साधने की कवायद भी तेज हो गई है। खासकर ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आ रही है। इसी कड़ी में 22 फरवरी को आजमगढ़ जनपद के अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी रैली का आयोजन प्रस्तावित है, जिसे पूर्वांचल की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अतरौलिया क्षेत्र स्थित जनता इंटर कॉलेज, अहिरौला परिसर में आयोजित होने जा रही “सामाजिक समरसता महारैली” को लेकर आयोजकों ने व्यापक तैयारियां की हैं। कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है, जबकि दस हजार से अधिक प्रबुद्ध ब्राह्मणों की भागीदारी की संभावना जताई जा रही है।
रैली का नेतृत्व प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर करेंगे। पार्टी का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि “सर्व समाज को साथ लेकर चलने” का संदेश देने का मंच होगा।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता लंबे समय से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। पूर्वांचल के कई जिलों जैसे आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया और जौनपुर में ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव कई सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न दलों ने सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। ऐसे में सुभासपा द्वारा ब्राह्मण समुदाय के प्रबुद्ध वर्ग को मंच पर लाने का प्रयास व्यापक सामाजिक समीकरण गढ़ने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यह रैली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को मजबूती देने के संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है। सुभासपा एनडीए का हिस्सा है और पूर्वांचल में उसकी सक्रियता गठबंधन की चुनावी रणनीति के अनुरूप मानी जा रही है। रैली के माध्यम से यह संकेत देने की कोशिश होगी कि पूर्वांचल में गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और सामाजिक आधार को व्यापक बनाने के लिए प्रयासरत है। मंच से विकास, कानून-व्यवस्था, सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय भागीदारी जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिलने की संभावना है।
आजमगढ़ को लंबे समय से समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित यह महारैली सीधे तौर पर सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पूर्वांचल में यदि किसी भी दल को मजबूती हासिल करनी है तो उसे स्थानीय जातीय समीकरणों के साथ-साथ ब्राह्मण, पिछड़ा और दलित मतदाताओं के बीच संतुलन बनाना होगा। सुभासपा की यह पहल उसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
रैली में राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना के कमांडर्स की विशेष मौजूदगी भी चर्चा में है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में अनुशासन और संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और बूथ स्तर तक संपर्क अभियान चलाया गया है। इससे यह संदेश देने की कोशिश होगी कि पार्टी केवल चुनावी मंच तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठित और सक्रिय है।
पूर्वांचल की राजनीति परंपरागत रूप से जातीय समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन हाल के वर्षों में सामाजिक समरसता, विकास और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों ने भी जगह बनाई है।
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम तय करेंगे, लेकिन इतना तय है कि यह रैली चुनावी तापमान को और बढ़ाने वाली है।
स्थानीय स्तर पर मंच, पंडाल, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी कार्यक्रम को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पार्टी पदाधिकारियों का दावा है कि पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्क अभियानों के जरिए भी रैली का व्यापक प्रचार किया गया है। पार्टी के अनुसार, यह केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि “सामाजिक संवाद” का अवसर होगा।
आजमगढ़ से पूरे प्रदेश को राजनीतिक संकेत देने की रणनीति भी इस आयोजन के केंद्र में है। पूर्वांचल में यदि कोई बड़ा राजनीतिक संदेश जाता है तो उसका असर प्रदेशव्यापी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रैली में अपेक्षित भीड़ जुटती है तो यह सुभासपा और उसके सहयोगियों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। वहीं, विपक्षी दल भी इस आयोजन पर नजर बनाए हुए हैं।
Published on:
20 Feb 2026 08:57 am
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