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ED Action: 110 करोड़ ठगी केस: एनी ग्रुप की 7.30 करोड़ संपत्ति अटैच, ईडी की बड़ी कार्रवाई

ED action 110 crore fraud: लखनऊ से जुड़े एनी ग्रुप मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7.30 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। करीब 110 करोड़ की कथित ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत लखनऊ, दिल्ली और उत्तरकाशी स्थित संपत्तियों व फिक्स्ड डिपॉजिट पर शिकंजा कसा गया है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 20, 2026

110 करोड़ की कथित ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

110 करोड़ की कथित ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

ED Attaches ₹7.30 Crore Assets in Anni Group Fraud Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े बहुचर्चित एनी ग्रुप प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7.30 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, एनी ग्रुप पर करीब 110 करोड़ रुपये की कथित ठगी के कई मामले दर्ज हैं, जिनके आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच आगे बढ़ाई है।

क्या है मामला

मामला निवेश और वित्तीय योजनाओं के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों से धन जुटाने से जुड़ा बताया जा रहा है। विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, कंपनी और उससे जुड़े लोगों पर निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये की रकम इकट्ठा करने और बाद में भुगतान न करने के आरोप हैं। इन शिकायतों के आधार पर ईडी ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। एजेंसी का कहना है कि अपराध से अर्जित धन को संपत्तियों और बैंक निवेश के रूप में परिवर्तित किए जाने के साक्ष्य मिले हैं।

किन-किन जगहों पर कार्रवाई

ईडी की ताजा कार्रवाई के तहत लखनऊ, दिल्ली और उत्तरकाशी स्थित अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। इनमें आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं। इसके अलावा, कुछ बैंक खातों में रखी गई फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) राशि भी जब्त की गई है।

जांच एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थी या उनमें निवेश किया गया था। अटैचमेंट की यह कार्रवाई PMLA की धारा 5(1) के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत संदिग्ध संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाती है।

कंपनी प्रबंधन पर आरोप

एनी ग्रुप के मालिक अजीत कुमार गुप्ता के खिलाफ विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज हैं। इसके अलावा, निहारिका सिंह और कंपनी से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम भी प्राथमिकी में शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंपनी के निदेशकों और पदाधिकारियों ने निवेशकों को भ्रमित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रचार-प्रसार किया और धन जुटाया। बाद में निवेशकों को वादे के मुताबिक रिटर्न नहीं दिया गया। हालांकि, आरोपित पक्ष की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अटैचमेंट के खिलाफ आरोपितों को अपीलीय प्राधिकरण में चुनौती देने का अधिकार होता है।

पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में ईडी ने कार्रवाई की हो। वर्ष 2023 में भी एजेंसी ने 9.1 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अटैच की थीं। ताजा कार्रवाई के बाद अब तक कुल 16.4 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच अभी जारी है और यदि आगे और संपत्तियों या निवेश का पता चलता है तो अतिरिक्त अटैचमेंट की कार्रवाई भी हो सकती है।

निवेशकों में चिंता

मामले के सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता का माहौल है। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत कंपनी की योजनाओं में निवेश की थी। पीड़ित निवेशकों का कहना है कि उन्हें ऊंचे ब्याज और सुरक्षित रिटर्न का भरोसा दिलाया गया था।
कुछ निवेशकों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने शुरुआत में समय पर भुगतान कर विश्वास कायम किया, लेकिन बाद में भुगतान रुक गया। इसके बाद बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गईं।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कैसे आगे बढ़ती है

मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में ईडी पहले यह जांचती है कि कथित अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) से अर्जित धन कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया। यदि यह पाया जाता है कि अवैध कमाई को संपत्तियों, कंपनियों, बैंक खातों या अन्य निवेश माध्यमों में बदला गया है, तो उन्हें ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ मानते हुए अटैच किया जाता है। अस्थायी अटैचमेंट के बाद मामला विशेष PMLA अदालत में भेजा जाता है, जहां न्यायिक प्रक्रिया के तहत अंतिम निर्णय होता है कि संपत्तियां जब्त रहेंगी या मुक्त की जाएंगी।

कानूनी प्रक्रिया आगे

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आरोपितों को अपने बचाव का पूरा अवसर मिलेगा। वे अटैचमेंट आदेश को अपीलीय प्राधिकरण में चुनौती दे सकते हैं। यदि एजेंसी पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करती है और अदालत संतुष्ट होती है कि संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से जुड़ी हैं, तो उन्हें स्थायी रूप से जब्त किया जा सकता है।

आर्थिक अपराधों पर सख्ती

हाल के वर्षों में आर्थिक अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है। सरकार का रुख ऐसे मामलों में सख्ती बरतने का रहा है, ताकि निवेशकों का भरोसा कायम रखा जा सके और वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। एनी ग्रुप प्रकरण भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जहां कथित तौर पर बड़ी रकम का लेन-देन और निवेशकों के हितों से खिलवाड़ सामने आया है।

जांच एजेंसी अब दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और संपत्ति खरीद के स्रोतों की गहन पड़ताल कर रही है। सूत्रों का कहना है कि कुछ और लोगों से पूछताछ हो सकती है और नए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई संभव है। फिलहाल, 7.30 करोड़ रुपये की ताजा अटैचमेंट और कुल 16.4 करोड़ रुपये की जब्ती के साथ एनी ग्रुप पर कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या उन्हें अपनी राशि वापस मिलने की कोई उम्मीद बनती है।

(नोट: आरोपितों के खिलाफ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।)