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यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अलर्ट, पंजाब की पराली प्रदूषित करेगी उत्तर प्रदेश और दिल्ली की हवा

- पराली जलाने में रामपुर यूपी में दूसरे स्थान पर- कई अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी
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लखनऊ

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Neeraj Patel

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Updated: 13 Nov 2020, 1:20 PM IST

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण को लेकर यूपी के प्रमुख शहरों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। दीपावली के पटाखों के साथ पराली का धुआं वायु प्रदूषण को और खतरनाक बना सकता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसी 'सफर' (सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) ने उत्तर प्रदेश समेत दिल्ली व एनसीआर की वायु गुणवत्ता और बिगड़ने सम्भावना जाहिर की है क्योंकि नासा की सेटेलाइट इमेज में गुरुवार को पंजाब में पराली जलाने की हजारों घटनाएं पकड़ में आई हैं। इसका असर दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में दो-तीन दिनों में दिखाई देगा।

सफर की रिपोर्ट के अनुसार इस समय दिल्ली में पांच से आठ किलोमीटर की रफ्तार से उत्तर-पूर्वी हवा बह रही है। आने वाले दिनों में इसके बढ़ने की संभावना जताई गई है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार यदि हवा की रफ्तार छह किलोमीटर से अधिक होती है तो दिल्ली तक पराली का प्रदूषण पहुंचता है। इस समय जो हवा चल रही है उससे अगले दो-तीन दिनों में दिल्ली के साथ ही उत्तर प्रदेश के एनसीआर में शामिल गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, मुजफ्फरनगर व बुलंदशहर के अलावा आगरा, बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ व कानपुर आदि शहरों की हवा और जहरीली होने की आशंका है। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश के प्रमुख शहरों को प्रदूषण से बचाने के लिए अलर्ट जारी किया है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने संबंधित शहरों को अलर्ट जारी कर दिया है। सभी को अपने यहां विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। वायु प्रदूषण को कम करने के उपाय तत्काल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाने का असर कानपुर में भी पड़ता है। आइआइटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि हिमालय से सर्द हवा पंजाब, हरियाणा व दिल्ली होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। पराली जलने पर उससे उत्सर्जित कण धीरे धीरे हवा में तैरते हुए कानपुर व उसके आसपास पहुंचे हैं, जिसके कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। अब पराली जलाने पर शिकंजा कसने के बाद प्रदूषण पहले से कम आंका जा रहा है।

कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी

प्रदेश के कई जिलों में धान की बुवाई का रकबा रामपुर के मुकाबले अधिक है, लेकिन पराली जलाने के मामलों में रामपुर प्रदेश में दूसरे नंबर पर रहा है। रामपुर जिले में एक अक्तूबर से नौ नवंबर तक पराली जलाने के 131 मामले सामने आए हैं। मथुरा का प्रदेश में पहला स्थान है, वहां इस अवधि में 137 केस हैं। सेटेलाइट रिपोर्ट के यह आंकड़े मिलने के बाद डीएम ने सभी एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारियों और उप निदेशक कृषि को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही जिले में पराली जलाने के मामले में 53 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। लगभग डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी थी कि पराली जलाए जाने के मामले में ग्राम प्रधान भी जिम्मेदार होंगे। इस तरह के मामले सामने आने पर 36 प्रधानों को नोटिस जारी किया गया है।