
Non Muslim member in Waqf Board : दानिश आजाद अंसारी ने सरकार के फैसले का किया स्वागत, PC- Patrika
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारियों के बीच गैर-मुस्लिम सदस्य को शामिल किए जाने का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी और भाजपा सांसद सीमा द्विवेदी ने वक्फ संशोधन अधिनियम का समर्थन करते हुए इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं, दोनों नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और अवैध कब्जों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था विकसित नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान वक्फ संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुए और वक्फ माफिया को संरक्षण मिला।
उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्तियां मुस्लिम समाज के कल्याण और विकास के लिए उपयोग होनी चाहिए थीं, लेकिन अतीत में उनका अपेक्षित लाभ जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पाया। अंसारी के अनुसार, केंद्र सरकार का वक्फ संशोधन अधिनियम इसी स्थिति को बदलने और वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से लाया गया है।
मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत वक्फ बोर्ड में व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। प्रस्तावित 11 सदस्यीय बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं, पसमांदा समाज, विधि विशेषज्ञों और एक गैर-मुस्लिम सदस्य को भी शामिल करने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और नए बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह गठन केंद्र सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों और संशोधित कानून के प्रावधानों के अनुरूप होगा।
भाजपा सांसद सीमा द्विवेदी ने भी वक्फ संशोधन कानून का समर्थन करते हुए कहा कि पुराने कानून के तहत जवाबदेही की कमी थी, जिसके कारण कई विवाद और शिकायतें सामने आती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों के नाम पर बड़ी मात्रा में भूमि पर कब्जों के मामले सामने आए, लेकिन उनकी प्रभावी निगरानी नहीं हो सकी।
सीमा द्विवेदी ने कहा कि संशोधित व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। उनके अनुसार, नए वक्फ बोर्ड में केवल मुस्लिम सदस्यों तक सीमित व्यवस्था नहीं होगी, बल्कि अन्य वर्गों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित और जवाबदेह बन सकेगी।
कांग्रेस द्वारा वक्फ संशोधन कानून को अदालत में चुनौती देने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए सीमा द्विवेदी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को न्यायालय जाने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रुख अक्सर समस्याओं के स्थायी समाधान के बजाय राजनीतिक विवादों को बनाए रखने वाला रहा है।
उत्तर प्रदेश में नए वक्फ बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में बोर्ड की संरचना और नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा और बढ़ने की संभावना है।
Source - IANS
Updated on:
09 Jul 2026 09:00 pm
Published on:
09 Jul 2026 09:00 pm
