
भारत को वैश्विक स्तर पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित करने, सन 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने एवं रक्षा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर दो रक्षा गलियारे का निर्माण किया जा रहा है। इन दो रक्षा गलियारों (डिफेंस कॉरिडोर) का निर्माण उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में किया जा रहा है।
भारत की आजादी के बाद से ही हमें अपने पड़ोसी देशों की तरफ से सीमा विवादों के चलते देश पर थोपा गया युद्ध लड़ना पड़ा। जिसके कारण प्रारंभ से ही भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आयातित रक्षा उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ा। अगर नवीनतम आंकड़ो की बात करें तो सिपरी की मार्च 2022 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012-16 और 2017-21 के बीच भारत के रक्षा उपकरणों के आयात में 21 प्रतिशत की कमी तो आयी लेकिन इसके बावजूद भारत 2017-21 में दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश था। अर्थात 2012 के पूर्व भारत 2021 की तुलना में कहीं अधिक रक्षा उपकरण आयात करता था।
2014 में जब श्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तभी से रक्षा के क्षेत्र में होने वाली खरीद पर अधिक ध्यान देने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के विचार ने भी जन्म लिया।परिणामस्वरूप भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो अलग-अलग रक्षा गलियारा बनाने का प्रस्ताव बनाया बल्कि उसे अमली जामा भी पहना दिया। उत्तर प्रदेश में बन रहे रक्षा गलियारे की शुरुआत अगस्त 2018 में उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ की मीट में रक्षा उत्पादन में 3700 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की घोषणा के साथ हुई। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की योजना उत्तर प्रदेश के 6 जनपदों में विस्तारित होगी। यह जनपद हैं लखनऊ कानपुर झांसी आगरा अलीगढ़ और चित्रकूट।
रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भारत 2025 तक 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की जरूरतों के साथ वैश्विक पटल पर बतौर एक प्रमुख रक्षा बाजार एवं एयरोस्पेस उभर रहा है। अगर बात करें तो लड़ाकू विमानों, पनडुब्बी, हेलीकॉप्टर, ग्राउंड लेवल डिफेंस सिस्टम, हथियार और अत्याधुनिक सेंसर के क्षेत्र में भारत की आवश्यकता और मांग बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से 2018-19 के बजट में रक्षा के लिए का प्रावधान रखा था। अब बात आती है कि आखिर सरकार ने उत्तर प्रदेश में रक्षा गलियारा बनाने की बात क्यों सोची? आइए जानते हैं इसका क्या कारण है....!
दरअसल उत्तर प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में चौथा सबसे बड़ा राज्य है और अर्थव्यवस्था के नजरिए से कहें तो तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 200 मिलियन से अधिक जनसंख्या के साथ उत्तर प्रदेश के पास सबसे अधिक एक्टिव श्रमबल है। विनिर्माण क्षेत्र में भारत में शीर्ष पांच में से एक है। एम.एस.एम.ई. में भी उत्तर प्रदेश नंबर एक स्थान पर है। उत्तर प्रदेश दिल्ली, कोलकाता तथा मुंबई के साथ सड़क एवं रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से लेकर हल्दिया तक गंगा नदी में जल यातायात भी प्रारम्भ होने जा रहा है। इसके अलावा एक्सप्रेस-वे के मामले में उत्तर प्रदेश में उत्कृष्ट एक्सप्रेस-वे का जाल सा बिछ गया है। रक्षा गलियारे के लिए चिन्हित जनपद कहीं न कहीं से किसी न किसी एक्सप्रेस वे से बखूबी जुड़े हुए हैं। इसमे कोई संदेह नहीं है कि रक्षा गलियारे के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सर्वाधिक उपयुक्त स्थानों में से एक है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी रक्षा गलियारे को लेकर राज्य स्तर पर ठोस कदम उठाए हैं। आईआईटी, कानपुर और बीएचयू, वाराणसी को इस रक्षा गलियारे के विनिर्माण में तकनीकी एवं अन्य आवश्यक सहयोग तथा सुझाव हेतु जुड़ा है। उत्तर प्रदेश में बाहरी निवेश के प्रोत्साहन हेतु राज्य सरकार ने रक्षा एवं एयरोस्पेस इकाई तथा उससे संबंधित रोजगार संबंधित संवर्धन नीति 2019 का प्रकाशन भी किया है। रक्षा गलियारे हेतु आवश्यक भूमि आवंटन की प्रक्रिया को भी न केवल पारदर्शी बनाया है अपितु प्रभावी भी बनाया है। इतना ही नहीं अगस्त 2020 में ही संभावित समस्याओं के निदान हेतु और भारतीय नौसेना के बीच समन्वय स्थापित कर एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किया जा चुका है।
उपरोक्त के अतिरिक्त सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और आईआईटी के संयुक्त प्रयास से एक डिफेंस पार्क स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। यह डिफेंस पार्क कानपुर आईआईटी के पास 30 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा।इसके अलावा रक्षा गलियारे हेतु चिन्हित 6 जनपदों में डिफेंस टेस्टिंग सेंटर को भी बनाने का प्रस्ताव है। परन्तु यह सेंटर अभी रक्षा मंत्रालय की अनुमति हेतु विचाराधीन है।
उपरोक्त योजना हेतु सरकार की प्रतिबद्धता और प्रगति को देखते हुए मुझे पूर्ण विश्वास है कि उत्तर प्रदेश में रक्षा गलियारे का निर्माण न केवल देश बल्कि प्रदेश को भी वैश्विक पहचान दिलाएगा। इसके अलावा प्रदेश के जिन-जिन क्षेत्रों में इसे बनाया जा रहा है, वहां के स्थानीय नागरिकों के लिए यह रोजगार का अवसर भी प्रदान करेगा। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से तमाम रक्षा समस्याओं से रू-ब-रू होते हुए देश की रक्षा जरूरतों के अनुसार भारत को आत्मनिर्भर बनाने में यह रक्षा गलियारा महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
Updated on:
20 Jan 2023 11:49 pm
Published on:
20 Jan 2023 10:16 pm
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