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जानिए उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का इतिहास, कैसे यूनाइटेड प्रोविंस से बना यूपी

उत्तर प्रदेश 24 जनवरी को क्यों अपना 74वां स्थापना दिवस मनाता है। आजादी के पहले इसका क्या नाम था? जानिए पूरी कहानी।

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लखनऊ

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Adarsh Shivam

Jan 24, 2023

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आज उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस हैं। हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी कहानी बड़ी रोचक है। आज हम आपको बताएंगे United Province से कैसे उत्तर प्रदेश बना। कैसे 1989 से महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मनाया जाने लगा। आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस से जुड़ी दिलचस्प बातें।

भारत की आजादी के बाद साल 1950 में 24 जनवरी को United Provinces यानी संयुक्त प्रांत की जगह इसका नाम बदलकर उत्तर प्रदेश किया गया। उसी समय से लोग उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मानाने लगे। महाराष्ट्र में साल 1989 से बीजेपी नेता अमरजीत मिश्र ने उत्तर प्रदेश स्थापना मनाना शुरू किया था।

14 जुलाई 2014 को राम नाईक उत्तर प्रदेश के गवर्नर बने। उस समय बीजेपी नेता अमरजीत मिश्र ने उत्तर प्रदेश स्थापना का सुझाव दिया था। जब राम नाईक गवर्नर ने सरकार के सामने इस बात को रखा तब समाजवादी पार्टी सरकार ने इसे मंजूर नहीं किया। इसके बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने मई 2017 से हर साल 24 जनवरी को यूपी दिवस मनाने का ऐलान किया।

यूनाइटेड प्रॉविंस से कैसे बना यूपी
आइए, अब थोड़ा इतिहास की बातें कर लेते हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी ने साल 1775 से 1816 के बीच तमाम रियासतों पर कब्जा कर लिया। 1801 में नवाब, 1803 में सिंधिया रियासत के बाद 1816 में गोरखों से छीने प्रांतों को पहले बंगाल प्रेसीडेंसी में रखा गया। 1833 में पश्चिमोत्तर प्रांत यानी आगरा प्रेसीडेंसी गठित हुआ। साल 1856 में अवध पर कब्जे के बाद आगरा और अवध संयुक्त प्रांत के तौर पर इसे 1877 में पश्चिमोत्तर प्रांत में मिलाया गया।

साल 1902 ब्रिटिश काल में नार्थ वेस्ट प्रोविंस का नाम बदल कर यूनाइटेड प्रॉविंस ऑफ आगरा एंड अवध रखा गया। फिर इसे आम बोलचाल में यूपी कहा जाने लगा। साल 1920 में यूपी की राजधानी इलाहाबाद से लखनऊ ट्रांसफर की गई थी। सिर्फ हाईकोर्ट पहले की तरह इलाहाबाद में ही रहा। बांकी सब चीजें लखनऊ चली गई।

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यूनाइटेड प्रोविंस बनने के कुछ साल बाद 3 अप्रैल 1937 को नवाब ऑफ छत्री के तौर पर लेफ्टिनेंट कर्नल मुहम्मद अहमद सैयद छतरी को यूनाइटेड प्रोविंस का गवर्नर बनाया गया। उस समय यह पद मुख्यमंत्री जैसा ही था। जुलाई 1937 के चुनाव तक वो पद पर रहे। फिर साल 1947 में संयुक्त प्रांत यानि उत्तर प्रदेश को आजाद भारत की एक प्रशासनिक इकाई बनाया गया।

रियासतों को शामिल करने के बाद बना यूपी
फिर 2 साल बाद टिहरी गढ़वाल और रामपुर की रियासतों को भी संयुक्त प्रांत में शामिल किया गया। साल 1950 में भारतीय गणराज्य का नया संविधान लागू हुआ। 12 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश को भारतीय संघ का राज्य बनाया गया।

यूपी ने बड़े-बड़े नेताओं को बनाया है प्रधानमंत्री
दिल्ली से सटे होने की वजह से यूपी को राजनीतिक तौर पर दिल्ली का द्वार माना जाता है। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इलाहाबाद से सांसद थे। इसके बाद कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी भी दो बार प्रधानमंत्री बनीं। बलिया में जन्में समाजवादी नेता चंद्रशेखर सिंह भी भारत के प्रधानमंत्री बने।

हापुड़ में जन्मे किसान नेता चौधरी चरण सिंह भी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। अमेठी से लोकसभा सांसद रहे राजीव गांधी भी साल 1984 में पीएम बने। लखनऊ से सांसद रहे अटल बिहारी वाजपेयी और फिर बनारस से सांसद के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सत्ता संभाले हुए हैं।

भारत में पहली महिला मुख्यमंत्री यूपी से बनी थीं
गोविंद वल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थें। इनका मुख्यमंत्री कार्यकाल 15 अगस्त, 1947 से 27 मई, 1954 तक रहा। इसके बाद सुचेता कृपलानी ने अक्टूबर 1963 में उत्तर प्रदेश के साथ भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया था। फिर मायावती जून 1995 में मुख्यमंत्री बनीं। देश में किसी भी राज्य की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री थीं। अब योगी आदित्यनाथ राज्य के सीएम है।

आजादी से पहले यूपी का योगदान
साल 1857 में भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम में उत्तर भारत की तत्कालीन रियासतों का अहम योगदान रहा है। ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ 1857-1859 का विद्रोह पश्चिमोत्तर प्रांत में केंद्रित था। 10 मई 1857 को मेरठ छावनी में सैनिकों के बीच विद्रोह की चिंगारी भड़की थी। जो 25 से भी ज्यादा बड़े इलाको में फैल गई। बगावत के दमन के बाद ब्रिटिश भारत का प्रशासनिक नियंत्रण ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश महाराजा को सौंप दिया गया।