वीरेंद्र सिंह ने कहा कि संस्था की चल और अचल संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दान में मिली संपत्तियों को आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लीज पर देने और व्यावसायिक उपयोग में लाने के आरोप सामने आए हैं। इसके अलावा संस्था की सदस्यता, चुनाव प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं।