
Weather forecast summer 2022: ठंड का मौसम लगभग समाप्त होने वाला है ओर गर्मी का मौसम होली के बाद से शुरू हो जाएगा। इस बार गर्मी का मौसम परेशान करने वाला होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार इस बार भारत में असहनीय गर्मी पड़ेगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के लोगों को इस गर्मी के मौसम में समस्याओं का सामना करना पड़ेगा और असहनीय गर्म मौसम की परिस्थिति से गुजरना पड़ेगा।
रिपोर्ट में डराने वाले तथ्य
संयुक्त राष्ट्र इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑफ क्लाइमेट चेंज (IPCC) की रिपोर्ट डराने वाली है। रिपोर्ट के तहत अगर समय रहते कार्बन उत्सर्जन में कटौती नहीं की गई तो निकट भविष्य में गर्मी व तापमान इंसान की सहनशीलता को पार कर जाएगा। रिपोर्ट में खासतौर पर वेट बल्ब तापमान का जिक्र करते हुए डराने वाली स्थिति के बारे में बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में वेट बल्ब का तापमान इससे पहले शायद ही कभी 31 डिग्री सेल्सियस से अधिक गया हो। अभी तक यह अधिकतम 25 से 30 डिग्री सेल्सियस होता है। लेकिन अगर समय रहते उत्सर्जन में कमी नहीं की गई तो तो इस बार वेट बल्ब तापमान 31 डिग्री तक पहुंच जाएगा। डराने वाली बात यह है कि रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर समय रहते उत्सर्जन की वृद्धि में कमी नहीं की गई तो भारत के कई हिस्सों में वेट बल्ब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाएगा जो काफी खतरनाक है।
राजधानी लखनऊ के लिए खतरा
रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का जिक्र भी किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि समय रहते अगर कार्बन उत्सर्जन में कमी नहीं की गई तो राजधानी लखनऊ का वेट बल्ब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है। अहमदाबाद, इंदौर, मुंबई, चेन्नई व भुवनेश्वर जैसे इलाकों को लेकर भी डरने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार इन इलाकों में भी इस बार गर्मी के मौसम में वेट बल्ब तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मेघालय, त्रिपुरा असम में अधिक गर्मी होने के आसार हैं।
हो सकती हैं कई समस्याएं
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर तापमान में वृद्धि इसी तरीके से जारी रही तो भारत को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर समय रहते कार्बन उत्सर्जन पर लगाम नहीं लगाई गई और तापमान को संतुलित बनाए रखने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो भारत की 40% तक की आबादी 2050 तक पानी की कमी से जूझेगी। बढ़े हुए तापमान का असर फसल पर भी पड़ेगा, जिससे चावल, मक्के के उत्पादन में काफी गिरावट आएगी। लगातार जलवायु परिवर्तन के चलते मछली उत्पादन भी प्रभावित होगी।
Updated on:
02 Mar 2022 11:14 am
Published on:
02 Mar 2022 11:12 am
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