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जिस दिन नहीं बिकती शराब उसे क्यों कहते हैं ड्राई डे? जानें कैसे चलन में आया ये शब्द

आबकारी विभाग ने 26 जून ड्राई डे घोषित किया है। लेकिन जिस दिन शराब की दुकानें बंद होती हैं, आखिर उसे ड्राई डे क्यों कहा जाता है। आज हम इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं कि जिस दिन शराब की दुकानें बंद होती है, उसे ड्राई डे क्यों कहते हैं?

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Dry Day File Photo

नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के खिलाफ रविवार 26 जून को उत्तर प्रदेश में ड्राई डे घोषित किया गया है। शाम पांच बजे तक खुदरा व्यापार नहीं होगा, यानी कि शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी। इस दौरान कल शाम को पांच बजे तक किसी भी बार या पब में भी शराब नहीं परोसी जाएगी। उत्तर प्रदेश के अपर आयुक्त आबकारी हरिश्चचंद्र ने इस बारे में एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि यूपी में शाम पांच बजे तक खुदरा व्यापार नहीं होगा। आबकारी विभाग ने 26 जून ड्राई डे घोषित किया है। इन सबके बीच क्या आप जानते हैं कि जिस दिन शराब की दुकानें बंद होती हैं, आखिर उसे ड्राई डे क्यों कहा जाता है। आज हम इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं कि जिस दिन शराब की दुकानें बंद होती है, उसे ड्राई डे क्यों कहते हैं?

कब होता है ड्राई डे

देश में हर राज्य में अलग-अलग तारीख को ड्राई डे होता है। ज्यादातर राज्यों में 2 अक्टूबर, 15 अगस्त और 26 जनवरी को ड्राई डे होता है। राज्य सरकारें अपने इलाके और वहां आने होने वाले त्योहार या किसी विशेष दिन को देखते हुए शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाती हैं। दरअसल, राज्य और केंद्र की अलग-अलग एक्साइज पॉलिसी होती हैं। सरकारें उसी के हिसाब से ड्राई डे की तारीख निर्धारित करती हैं।

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क्यों होता है ड्राई डे

ड्राई डे घोषित करने के पीछे कई वजह होती है। अक्सर ड्राई डे राष्ट्रीय त्योहार और धार्मिक पर्व से जुड़े मौकों पर होता है। राष्ट्रीय पर्व पर सैनिकों, शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के लिए और धार्मिक पर्व पर धार्मिक भावनाओं को लेकर शराब की दुकानें बंद की जाती हैं। कई बार कानून व्यवस्था को लेकर भी शहर या राज्य में ड्राई डे घोषित कर दिया जाता है।

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क्यों कहा जाता है ड्राई डे

माना जाता है कि जब किसी ने कुछ नहीं पिया तो इसका मतलब कि वो ड्राई यानी सूखा है। ऐसे में इस शब्द को शराब के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, ये किसी प्रकार का आधिकारिक प्रमाण नहीं होता है। अगर इतिहास के पन्नों को देखें तो भारत में सबसे पहले सन् 1926 में पंजाब के एक्साइज लॉ में ड्राई डे का जिक्र किया गया था। इसके बाद सन् 1950 में केंद्र सरकार में इसे पूरे भारत में लागू कर दिया। यही वजह है कि सरकारी डॉक्यूमेंट में भी ड्राई डे शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।