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कहां गए ये दरोगा हंटर सिंह, लोहा सिंह और समझावन लाल

कानून व्यवस्था की हालत देखकर याद आते हैं ये पुराने दरोगा  

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लखनऊ

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Anil Ankur

Sep 15, 2019

police

Expose: उजागर हुआ राजस्थान पुलिस का क्रूर चेहरा, खाकी के खौफ से खत्म हुई जिंदगियां...,Expose: उजागर हुआ राजस्थान पुलिस का क्रूर चेहरा, खाकी के खौफ से खत्म हुई जिंदगियां...

अनिल के. अंकुर

लखनऊ। चौक चौराहों पर अक्सर इन दरोगाओं की चर्चा होती थी। अब नहीं होती। क्यों कि अब न वैसे दरोगा बचे और न ही वैसी व्यवस्था। एक दरोगा थे बब्बन। उन्हें बड़े बाल वालों से परेशानी थी। वे एक नाई को लेकर चलते थे। जिसके बड़े बाल देखे, उसे पकड़ा और पूरा सिर मुड़वा दिया। मतलब गंजा करा दिया। इसी प्रकार एक दरोगा हुए कंजे चौबे, इनका शगल था कि अगर चौड़ी मोहरी के पेंट वाले को देखते ही उसके पैंट के नीचे की चौड़ाई कटवा देते थे। इसी श्रृंखला में मिश्रा एनकाउंटर स्पेस्लिस्ट, लोहा सिंह और हंटर सिंह भी हुए हैं। जिस थाने में पोस्टिंग होती थी, गुंडे आस पास के जिले से भाग जाते थे। कहा जाता है कि कलांतर में यह प्रथा खत्म हुई और दरोगाओं की दोस्ती गुंडों से ही नहीं उनके गुर्गों से भी हो गई। सब गलबहियां करके घूमने लगे और क्राइम बढ़ता गया।

चंबल घाटी सा था बिल्लौचपुरा

याद आता है वह जमाना। बिल्लौचपुरा को उस समय पुलिस के लोग "चंबल घाटी" के नाम से पुकारते थे जल्दी-जल्दी कोई दरोगा इस बीट में अपनी ड्यूटी लगवाना नहीं चाहता था तभी बाजारखाला थाने में उप निरीक्षक प्रकाश अरविंद की तैनाती हुई और उन्हे बिल्लौचपुरा बीट की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिस बिल्लौचपुरा में सिपाही घुसते घबड़ाते थे वहां जब दरोगा प्रकाश अरविंद की बुलट धड़-धड़ाते हुए निकलती थी तो लगता था जैसे भूचाल आ गया हो। बड़े-बड़े बदमाश गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाते थे। आगे चलकर प्रकाश अरविंद का असली नाम ही लोग भूल गए और उन्हे नया नाम मिला "लोहा सिंह" और ये नाम इतना मशहूर हुआ कि लोहा सिंह का नाम आते ही चोर-बदमाश उनके क्षेत्र छोड़कर भाग जाते थे। इंस्पेक्टर आरपी सिंह, ओपी ओझा, इनाम चंद्र, राजाराम पाल सिंह, सीओ परेश पांडेय, एसएसपी बीबी बख्शी के नेतृत्व में कई बड़ी घटनाओं का खुलासा करने वाले "लोहा सिंह" बाद में गोमतीनगर एवं तालकटोरा थाने के दो-दो बार थानाध्यक्ष रहे और दोनों ही बार उन्होने डबल-डबल इनकाउंटर किए थे। उस समय के 50 हजार के इनामी शातिर अपराधी सत्तू पांडेय को सीतापुर बार्डर पर जाकर ढेर किया था "लोहा सिंह" ने।

पैर से नहीं हाथ से बुलट स्टार्ट करने की अदा वाले दरोगा

बाजारखाला थाने में एक दरोगा हुआ करते थे शफीक अहमद, इन्हे लोग हाथ से बुलट स्टार्ट करने वाले दरोगा के नाम से जानते थे शफीक भाई ने कभी पैर से बुलट स्टार्ट ही नहीं की वे हमेशा हाथ से और एक बार में बुलट स्टार्ट करते थे। शफीक अहमद द्वारा नौबस्ता के एक शातिर अपराधी का थाने से लेकर टूडिय़ागंज तक निकाला गया "जुलूस" आज तक लोग याद करते हैं। "अपराध करना पाप है-पुलिस हमारी बाप है" के नारे लगाते हुए इस बदमाश के टूडिय़ागंज में उस समय लगने वाली गल्ला मंडी में सबके सामने बाल मुड़वाए गए थे।

बिजली की सीढ़ी से पकड़ते थे अपराधी

इसी तरह नक्खास चौकी पर एक दरोगा केपी यादव हुआ करते थे, उनकी मूंछों और उनके रुतबे का जवाब नहीं था। इंस्पेक्टर चौक उपाध्याय का भी कोई जवाब नहीं था। इंस्पेक्टर बाजारखाला आरपी सिंह का तो ये जलवा था कि क्षेत्र के बड़े बड़े-बड़े बदमाशों के पास सिपाही जाकर झूठ ही कह देते थे कि इंस्पेक्टर साहब पूछ रहे थे और वह अपराधी झट से सौ-दो सौ रुपए सिपाही की जेब में डाल कहता था कि कह देना कि मिले नहीं। थाने पर बिजली विभाग की लंबी वाली सीढ़ी रोज रात आ जाती थी और अपराधी के घर आधी रात सीढ़ी लगाकर पुलिस घर के अंदर से अपराधी को पकड़ लाती थी।

दूसरे राज्यों में घुसकर ठोंक दिया बदमाश को

इंस्पेक्टर राजाराम पाल सिंह के तो नाम से ही लोग थर्राते थे, अकबरी गेट का एक शातिर अपराधी राजाराम पाल के डर से दिल्ली जाकर छुप गया था तब पाल साहब आलमबाग इंस्पेक्टर हुआ करते थे उन्हे जब इसकी जानकारी हुई तो वे दरोगा "लोहा सिंह" को लेकर उसे ठोंकने दिल्ली तक जा पहुंचे थे। ये अपराधी दिल्ली पुलिस के मौके पर आ जाने से इनकाउंटर से तो बच गया परन्तु लखनऊ लाकर पुलिस ने इस अपराधी की जो "सेवा" की तो इसकी एक टांग काटनी पड़ गई।


अन्ना हों या बाबा बख्शी भंडारी, सब भाग खड़े हुए

1984-85 में एसपी सिटी हुआ करते थे बृजलाल। तब एसएसपी व एसपी सिटी के अलावा सिर्फ एसपी ग्रामीण हुआ करते थे। बृजलाल जी ने पहली बार लखनऊ में माफियाओं के खिलाफ जो अभियान छेड़ा था उसे आज तक लोग नहीं भूले हैं। अन्ना हों, बख्शी बाबा हों या भंडारी सब "सुधर" गए थें। इनके अलावा इनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से जाने जाते थे दरोगा डीएन सिंह तो "एसटीएफ वाले" के नाम से मशहूर थे इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा।

अब कौन कहां हैं पुलिस वाले

लखनऊ के पुलिस अधीक्षक (नगर) रहे बृजलाल डीजीपी होकर सेवानिवृत्ति होने के बाद इस समय राज्य अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष हैं और गोमतीनगर विस्तार में रहते हैं। इंस्पेक्टर आरपी सिंह, इनाम चंद्र, ओपी ओझा भी रिटायर हो गए, ओझा इस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत कर रहें हैं। उप निरीक्षक प्रकाश अरविंद "लोहा सिंह" इस समय विजीलेंस लखनऊ में ही तैनात हैं। इंस्पेक्टर राजाराम पाल सिंह एवं दरोगा डीएनए सिंह का निधन हो चुका है।)