
Amitabh Thakur
पत्रिका न्यूज नेटवर्क.
लखनऊ. यूपी सरकार ने चर्चित आईपीएस अमिताभ ठाकुर (Amitabh Thakur) समेत तीन आईपीएस अधिकारियों (IPS officers) को मंगलवार को जबरन रिटायर (Compulsory retirement) कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्क्रीनिंग में अमिताभ ठाकुर को लोकहित में सेवा में बनाये रखे जाने के उपयुक्त नहीं पाया है। ऐसे में यूपी सरकार ने आदेश जारी कर तात्कालिक प्रभाव से समय से पहले ही उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। आदेश प्राप्त होने पर अमिताभ ठाकुर ने इसकी जानकारी अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर देते हुए बताया, "मुझे अभी-अभी वीआरएस (लोकहित में सेवानिवृति) आदेश प्राप्त हुआ। सरकार को अब मेरी सेवाएं नहीं चाहिए। जय हिन्द !" ठाकुर के अतिरिक्त आईपीएस राजेश कृष्ण (Rajesh Krishna) (सेनानायक, 10वीं बटालियन, बाराबंकी) व राकेश शंकर (Rakesh Shankar) (डीआईजी स्थापना) को भी सरकारी सेवा के लिए अनुपयुक्त पाया गया है। ऐसे में उनकी सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। राजेश कृष्ण पर आजमगढ़ में पुलिस भर्ती (UP Police recruitment) में घोटाले का आरोप लगा था। राकेश शंकर पर देवरिया शेल्टर होम (Shelter Home) प्रकरण में संदिग्ध भूमिका के आरोप थे।
स्क्रीनिंग में अनुपयुक्त पाए जाने के बाद इस संबंध में 17 मार्च 2021 को भारत सरकार के ग़ृह मंत्रालय ने यूपी सरकार को आदेश जारी किया था। इस आदेश के क्रम में ही प्रदेश के गृह विभाग की ओर से अमिताभ ठाकुर को वीआरएस देने या यू कहें कि 'जबरन रिटायर' करने का आदेश जारी हो गया है।
अमिताभ ठाकुर हमेशा रहे हैं सुर्खियों में-
1993 बैच के आईपीएस अमिताभ ठाकुर हमेशा से ही सामाजिक मुद्दों को लेकर बेबाक प्रतिक्रिया देते रहे हैं। इसके अतिरिक्त वह कवि और लेखक भी हैं। सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। प्रदेश में आपराधिक घटनाओं को लेकर भी वह टिप्पणी करते रहे हैं। मुख्य रूप से वह सुर्खियों में तब आए थे, जब उन्होंने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से वअखिलेश यादव सरकार से सीधे-सीधे पंगा ले लिया था।
क्या था विवाद-
अखिलेश यादव की सरकार में मुलायम सिंह यादव पर अमिताभ ठाकुर को फोन कर धमकी देने का आरोप लगा था। अमिताभ ठाकुर का आरोप था कि 15 जुलाई 2015 को मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी, जिसको लेकर लखनऊ के पुलिस स्टेशन में तहरीर भी दी गयी थी। सपा सरकार में मुलायम सिंह यादव से जुड़ा प्रकरण होने के चलते मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। इसके बाद अमिताभ ठाकुर ने कोर्ट की शरण ली थी और कोर्ट के निर्देश पर इस मामले में मुकदमा दर्ज करने को कहा था। तब से इस मामले की जांच चल रही है। इस के चलते अखिलेश यादव सरकार में ठाकुर को निलंबित कर दिया गया था।
संपत्ति का ब्योरा न देने का आरोप-
ठाकुर और भी मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अमिताभ ठाकुर पर आरोप था कि उन्होंने 16 नवम्बर 1993 को आईपीएस की सेवा प्रारंभ करते समय अपनी संपत्ति का जानकारी शासन को नहीं दिया गया। साथ ही ठाकुर ने 1993 से 1999 तक का वर्षवार संपत्ति विवरण शासन को एकमुश्त दिया। उनके वर्षवार वार्षिक संपत्ति विवरण में काफी भिन्नताएं हैं। उन्होंने अपनी पत्नी व बच्चों के नाम से काफी संख्या में चल एवं अचल संपत्तियां, बैंक व पीपीएफ जमा की हैं। उनको इसकी सूचना शासन को नहीं दी थी।
Published on:
23 Mar 2021 05:56 pm
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