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वरुण गांधी ने क्यों कहा था- मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं, उस हाथ को काट डालूंगा

वही वरुण गांधी जो कभी यूपी सीएम की रेस में रहे। वही वरुण गांधी जो आज हासिए पर हैं। आखिर वरुण करियर में आखिरी 13 साल में हुआ क्या है? आज वरुण की राजनीतिक करियर की एक-एक परत खोलते हैं…

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लखनऊ

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Upendra Singh

Jan 26, 2023

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वरुण गांधी का राजनीतिक जीवन शुरू हुआ साल 1999 में। जब उन्होंने अपनी मां मेनका गांधी के लिए लोकसभा चुनाव में प्रचार किया। मेनका उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ीं और जीत गईं। तब तक वरुण गांधी की छवि एक फायर ब्रैंड हिंदुवादी नेता की बन चुकी थी।

प्रमोद महाजन ने मेनका-वरुण को बीजेपी में शामिल कराया
तब वरुण गांधी भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में एक प्रमोद महाजन की नजर में आ गए थे। 2004 के चुनाव में सोनिया गांधी की लोकप्रियता बढ़ रही थी। ऐसे में प्रमोद महाजन ने गांधी परिवार की काट खोजने के लिए मेनका-वरुण को बीजेपी में शामिल कराया। बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने 16 फरवरी, 2004 को मेनका और वरुण को पार्टी की सदस्यता दिलाई। तब वरुण मात्र 24 साल के थे।

IMAGE CREDIT: Patrika: वरुण गांधी को प्रमोद महाजन ने बीजेपी में शामिल कराया।

प्रमोद महाजन ने लालकृष्ण आडवाणी ओर अटल बिहारी को मनाया था
महीना फरवरी, तारीख 15 और साल 2004। उस वक्त के राष्ट्रीय महासचिव प्रमोद महाजन ने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी को वरुण-मेनका के बीजेपी में शामिल होने की जानकारी दी। अटल-आडवाणी दोनों इस सूचना से चौक गए। अटल और आडवाणी को वरुण की एंट्री के लिए मनाया। महाजन ने ही वरुण को राजनीति में आने और बीजेपी में शामिल होने को लेकर प्रेरित किया था।

महाजन का तर्क था कि सोनिया और राहुल को पब्लिक में जो भावनात्मक सपोर्ट मिल रहा है। वरुण और मेनका के आ जाने से यह नहीं मिलेगा। साल 2009 में बीजेपी ने उन्हें पीलीभीत सीट से चुनाव लड़ाया। वरुण गांधी ने मार्च 2009 में पीलीभीत लोकसभा सीट से चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण दिया।

महात्मा गांधी के अहिंसावादी टिप्पणी को बेवकूफीपूर्ण बताया था
एक बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विश्व प्रसिद्ध अहिंसावादी टिप्पणी को वरुण गांधी ने गलत ठहराया था। वरुण ने कहा था, 'मैं इसे बेवकूफीपूर्ण मानता हूं कि कोई अगर आपके गाल पर एक चांटा मारे तो आप दूसरा गाल आगे कर दें। उसके हाथ काट दो, ताकि वो किसी दूसरे पर भी हाथ न उठा सके।

वरुण बोले थे-गठबंध के लोग पाकिस्तानी हैं
एक बार तो मुलायम सिंह पर निशाना साधते हुए वरुण गांधी ने कहा था कि अयोध्या में रामभक्तों को किसने गोली मारी थी। राम भक्तों का खून बहाया गया, इसे हम लोग कैसे भूल सकते हैं। गठबंधन के लोग पाकिस्तानी हैं। खुद बताइए रामभक्तों के खून बहाने वाले और पाकिस्तानियों को वोट देकर जिताएंगे कि भारत माता के नाम पर वोट देंगे।

"गोबर उठाने वाले आज 5-5 करोड़ की गाड़ियों से घूमते हैं"
एक बार वरुण गांधी ने मुलायम सिंह यादव परिवार को लेकर कहा था कि जो लोग सैफई में 15-20 साल पहले गोबर के कंडे उठाते थे, वह आज पांच-पांच करोड़ की गाड़ियों में घूम रहे हैं। ये पैसा जनता का है न कि इनके दादा का। ये लोग भ्रष्टाचारी हैं और सिर्फ देश का पैसा लूटते हैं।

"गठबंधन को जिता दिया तो पाकिस्तान चले जाएंगे"
वरुण ने कहा था कि मेरी मां चुनाव लड़ रही हैं, वो नेक हैं। 24 साल के सियासी इतिहास में उनके ऊपर एक भी दाग नहीं है। मैं अपनी मां के नाम पर नहीं बल्कि, भारत माता के नाम पर वोट मांग रहा हूं। भारत माता के नाम पर क्या आप लोग वोट देने के तैयार हैं। हिंदुस्तान के साथ हैं या पाकिस्तान के साथ? गठबंधन को जिता दिया तो पाकिस्तान चले जाएंगे।

बयान के बाद वरुण का राजनीतिक कद बढ़ गया
इस बयान के बाद उनका कद बढ़ता गया। पार्टी में भी और जनता ने भी उन्हें भारी वोट देकर संसद पहुंचा दिया। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत की जनता ने वरुण गांधी को 4 लाख 19 हजार 539 वोट दिए। कांग्रेस के वीएन सिंह को 2 लाख 81 हजार 501 के अंतर से हराया।

IMAGE CREDIT: Patrika: भड़काऊ बयान देने पर मायावती सरकार में वरुण पर रासुका लगा गया। 28 मार्च 2009 को वरुण ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।

मायावती सरकार ने रासुका लगा दिया
वरुण के इन ताबड़तोड़ बयानों ने मीडिया का ध्यान खींचा। देशभर की मीडिया पीलीभीत पहुंच गया। उधर, उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने वरुण पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका लगा दिया। मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस ने उन्हें तलाशने लगी। वरुण पुलिस के हाथ नहीं लगे तो पीलीभीत के डीएम और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया।

IMAGE CREDIT: Patrika: कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने वरुण गांधी को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

लालकृष्‍ण आडवाणी ने वरुण की तुलना जय प्रकाश नारायण से कर दी
अजय चौहान और प्रकाश डी क्रमशः नए डीएम और एसपी बनकर पीलीभीत आ गए। तभी 28 मार्च 2009 को वरुण ने आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह वरुण गांधी से एकजुटता दिखाने जेल पहुंच गए। उधर, पार्टी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी ने वरुण की तुलना जय प्रकाश नारायण से कर दी। उन्होंन कहा कि जेपी और राजनारायण को भी सरकार इसी तरह जेल में डाला गया था।

29 साल की उम्र में वरुण गांधी पहली बार पीलीभीत सीट से सांसद बने
साल 2009 में 29 साल की उम्र में वरुण गांधी पहली बार पीलीभीत सीट से सांसद बने। यह सीट उनकी मां मेनका गांधी की थी। वरुण का राजनीतिक लोकप्रियता चरम पर था। हिंदू के फायरब्रांड युवा नेता बन गए थे। बीजेपी ने उन्हें कई राज्यों में प्रचार करने की जिम्मेदारी दी।

साल 2013 में वरुण गांधी बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बने
साल 2013 में पार्टी ने पहली बार वरुण गांधी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया। उन्हें 42 लोकसभा सीटों वाली पश्चिम बंगाल का प्रभार भी सौंपा गया। वरुण के लगातार हो रहे प्रमोशन के बाद माना जा रहा था कि वे यूपी बीजेपी में सीएम के सबसे बड़े दावेदार हैं, लेकिन पिछले 9 सालों में स्थिति बिल्कुल उलट गई है।

IMAGE CREDIT: Patrika: बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने 16 फरवरी, 2004 को मेनका और वरुण को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान की फोटो है।

10 साल में ही वरुण गांधी पार्टी में हाशिए पर चले गए
वरुण गांधी बीजेपी में पूरी तरह साइड लाइन हो चुके हैं। पार्टी ने पिछले साल उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पद से भी हटा दिया है। 2024 के चुनाव में उन्हें बीजेपी से टिकट नहीं मिलने की चर्चा भी जोरों पर है। बीजेपी हाईकमान के आंखों के तारा रहे वरुण गांधी 10 साल में ही हाशिए पर कैसे चले गए? इसकी 3 बड़ी वजह मानी जाती है।

वजह नंबर एक- लालकृष्ण आडवाणी के लिए रैली का आयोजन
2013 में नरेंद्र मोदी दिल्ली की सियासत में आने की तैयारी में थे। इसी बीच आडवाणी के लिए वरुण ने यूपी में रैली का आयोजन किया। इस रैली को आडवाणी के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। इसके बाद से ही वरुण नरेंद्र मोदी के गुडबुक से बाहर हो गए।

गोवा अधिवेशन के बाद लालकृष्ण आडवाणी का दौर बीजेपी में खत्म हो गया। हालांकि, वरुण को सुल्तानपुर से और उनकी मां को पीलीभीत से सांसदी का टिकट जरूर मिला। सरकार बनने के बाद मेनका गांधी को मंत्री भी बनाया गया, लेकिन वरुण साइड लाइन कर दिए गए

IMAGE CREDIT: Patrika: साल 2014 में सुल्तानपुर में नामांकन करते वरुण गांधी साथ उनकी मां मेनका गांधी।

वजह नंबर-2 इलाहाबाद अधिवेशन में शक्ति प्रदर्शन से हाईकमान खफा
जून 2016 में बीजेपी ने यूपी के इलाहाबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का अधिवेशन रखा। इस कार्यकारिणी में वरुण गांधी ने समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन किया।

पूरे शहर में वरुण के मुख्यमंत्री के दावेदारी वाले पोस्टर लगाए गए। वरुण के इस पोस्टर से बीजेपी हाईकमान इतने नाराज हो गए कि 2017 के यूपी चुनाव में उन्हें प्रचार के लिए भी नहीं बुलाया।

वजह नंबर-3 किसान आंदोलन पर पीएम मोदी के खिलाफ मोर्चाबंदी
मोदी सरकार के 3 कृषि कानून के खिलाफ जब पूरे देश में आंदोलन हुआ तो वरुण पार्टी लाइन से आगे बढ़ गए।

उन्होंने सोशल मीडिया और अखबारों में लेख के जरिए पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा। हालांकि, आंदोलन को देखते हुए बाद में मोदी सरकार ने कृषि कानून को वापस ले लिया।

अब वरुण गांधी अपनी ही सरकार पर निशाना साधने लगे
अब वरुण गांधी अपनी ही सरकार पर निशाना साधने लगे। राहुल गांधी की भारत जोडो यात्रा पर उन्होंन कहा, "देश को जोड़ने की राजनीति होने की ज़रूरत है, न कि देश को गृह युद्ध में डालने की राजनीति। आज धर्म की राजनीति करने वाले लोग रोजगार, महंगाई के मुद्दे पर जवाब दें। कभी पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से अपनी तुलना करते हैं तो कभी अखिलेश की तारीफ करते हैं।

पार्टी की कार्रवाइयों से वरुण के मन में खटास बढ़ी तो बीजेपी और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ उनकी बयानबाजियां भी बढ़ती गईं। उनके निशाने पर बीजेपी की राज्य सरकारें भी आती रहीं। फिर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन हुआ तो वरुण खुलकर समर्थन में उतर गए। वो जीएसटी, बेरोजगारी, अग्निवीर समेत कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेरने लगे।