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क्यों अखिलेश के फैसले से भी ज़रूरी हुआ शिवपाल के लिए ‘राम-गायत्री’ मंत्र

आखिर क्या हैं शिवपाल यादव की राजनैतिक मजबूरियां की मुख्यमंत्री की बातों भी कर रहे नज़रअंदाज़

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Dikshant Sharma

Dec 27, 2016

rampal yadav gayatri prajapati

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता आपस में ही ये नही समझ पा रहे हैं आखिर उनकी पार्टी के लिए क्या सही और क्या गलत है। इसका उदाहरण कुछ नेताओं के निष्कासन और वापसी को देखकर लगाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में आने वाले साल विधानसभा चुनावों में एक ओर जहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव साफ़ छवि और विकास का एजेंडा लेकर उतरना चाहते हैं वही गायत्री प्रजापति का संगठन में बड़ा कद और रामपाल यादव की वापसी ने मुश्किल खड़ी कर दी है। सीएम अखिलेश ने भ्रष्टाचार के आरोप में खुद प्रजापति से उनका मंत्री पद छीना था तो रामपाल यादव के अवैध निर्माण पर बुलडोज़र चलवा दिया था। उसके बाद रामपाल ने सपा को कौरवों की पार्टी कहते हुए अखिलेश को दुर्योधन तक बता डाला था। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर शिवपाल यादव की आखिर क्या ऐसी राजनैतिक मजबूरियां है जिसके आगे वे मुख्यमंत्री की बातों को नज़रअंदाज़ कर एक के बाद एक निर्णय लेते जा रहे हैं।

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आखिर शिवपाल क्यों जप रहे हैं 'राम-गायत्री' मंत्र
गायत्री प्रसाद प्रजापति राज्य मंत्री हैं और विधायक रामपाल यादव की भी बीते दिन सपा में वापसी हो गयी। इन दोनों को अखिलेश न पसंद करते हैं। मौजूदा समय में प्रजापति राज्यमंत्री है और रामपाल एक बार फिर पार्टी के विधायक हैं। दरअसल इन दोनों के साथ शिवपाल यादव की सियासी मजबूरियां जुडी हैं। मुलायम का ख़ास होना प्रजापति के लिए किसी वरदान से कम नहीं। सीएम और बेटे द्वारा कार्रवाई के बाद भी प्रजापति की वापसी अपने आप में प्रजापति की मुलायम की करीबी बयान करती है। साथ ही अब तो उनका कद बढ़ा कर राष्ट्रीय सचिव बना दिया गया है। वही रामपाल यादव की सीतापुर और आसपास के क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। अपने बेटे को निर्दलीय जिला पंचायत का चुनाव जिता कर वह ये साबित भी कर चुके हैं। साथ ही उनके साथ 3 से 4 विधायकों का समर्थन भी है। ऐसे में शिवपाल प्रदेश में आने वाले चुनाव से पहले किसी प्रकार का रिस्क न लेते हुए जिताऊ उम्मीदवारों पर अपना दांव खेलना चाहते हैं।




कौन है गायत्री प्रजापति
गायत्रीप्रजापति के जीवन की कहानी बीपीएल होल्डर से शुरू हो और बीएमडब्ल्यू पर पहुँच चुकी है।
2002 में गायत्रीप्रजापति ने विधायक का चुनाव लड़ने के लिए जो हलफनामा दिया था उसमें उनकी कुल संपत्ति 91,436 बताई थी। जीत के बाद 28 जुलाई 2013 को प्रजापति को खनन मंत्री बना दिया गया। इसके बाद से मिट्टी को सोना बनाने का खेल जारी है। साल 2012 के विधानसभा चुनाव के लिए भरे पर्चे के साथ लगे हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति 1.81 करोड़ बताई। यह संपत्ति अब बढ़कर 942.57 करोड़ रुपए हो गई है। आज उनके पास कई बंगले, गाडी, फार्म हाउस सहित सैकड़ों करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है। लखनऊ के मुख्यमंत्री आवास के बगल में आलिशान कोठी है।



इन विवादों में घिरे गायत्रीप्रजापति
-करोड़ों के मालिक गायत्रीप्रजापति पर बीपीएल कोटे की सुविधाएं लेना का भी आरोप लगा है। आरोप यह भी है की गायत्री ने अपनी बेटी को गलत तरीके से कन्या विद्या धन दिलाया। कन्या विद्या धन केवल गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली लड़कियों के लिए है।
-गायत्रीप्रजापति के बेटे अनुराग प्रजापति पर अमेठी में सरकारी जमीन कब्जाने और एक महिला के अपहरण का भी आरोप लगा था।
-गायत्रीप्रजापति पर लखनऊ में ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर प्लाट बेचने का आरोप भी है
-अमेठी में एक बेसहारा महिला ने भी गायत्रीप्रजापति पर अपनी जमीन पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाया था।

-खनन मंत्री उस वक्त सुर्ख़ियों में आये जब उन पर नोएडा में अवैध खनन के खिलाफ आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के अभियान को उन्होंने अपनी योजना बताया

राजनीती में थोड़े ही समय में खेली बड़ी पारियां
-2012 में समाजवादी पार्टी की तरफ से इलेक्शन में खड़े हुए और अमेठी से विधायक बनें
-2013 से 14 के बीच अखिलेश मंत्रिमंडल में विस्तार हुआ और वह तीनों बार गायत्री प्रजापति ने शपथ ली
-फरवरी 2013 में राज्य मंत्री बनें
-2014 में उन्हें खनन मंत्री बनाया गया
-गायत्री प्रजापति ऐसे इकलौते मंत्री हैं जिन्होंने समाजवादी पार्टी में तीन बार शपथ ली।

कौन है रामपाल यादव



सीतापुर बिसवां से विधायक रामपाल यादव अपने अवैध निर्माण से सुर्खियों में आए। समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधायक रामपाल यादव को अनियमितताओं व अवैधानिक कामों में लिप्त रहने और पार्टी की छवि खराब करने के कारण सपा से निष्कासित कर दिया था।

रामपाल यादव 2012 में बिसवां विधान सभा सीट से जीते। उन्होंने उस दौरान अपनी 1 करोड़ 76 लाख की कुल सम्पति बताई थी। उनपर उस समय 2 आपराधिक मामले भी चल रहे थे।

कैसे आये चर्चा में



जब लखनऊ विकास प्राधिकरण के दस्ते ने विधायक के जियामऊ स्थित अवैध निर्माण पर कार्रवाई शुरू की तो विधायक के गुर्गों पर सत्ता की हनक कुछ ऐसी सवार दिखी कि आदेश न होने पर एलडीए के तत्कालीन सचिव श्रीचंद वर्मा से विधायक ने हाथ पाई शुरू कर दी। बीच बचाव कर रहे पुलिस कर्मी से भी धक्का मुक्की और अभ्रदता की गयी। पुलिस ने बल प्रयोग कर विधायक समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

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बेल पर बाहर आने पर उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सपा सरकार कौरवों की सरकार है और अखिलेश इसमें दुर्योधन की भूमिका निभा रहे है।
-रामपाल ने कहा कि 25 साल पार्टी को देने के बाद अंत में मेरा सब कुछ पार्टी ने मुझसे छीन लिया। अब मेरे घर उस दिन दिवाली मनाई जाएगी जिस दिन समाजवादी सरकार गिरेगी। पार्टी के खिलाफ अब लड़ाई जारी रहेगी।

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