
भारत में महिलाएं नहीं दे रहीं फिटनेस पर ध्यान, अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
लखनऊ. भारत में एक ओर कुछ बच्चे कुपोषण (Malnutrition) का शिकार हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में अधिकतर लड़कियां व महिलाएं मोटापे (Fat) का शिकार हो रही हैं। यह संख्या शहरी, शिक्षित और अमीर घराने की लड़कियों की ज्यादा है। एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ कि अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त महिलाओं का अनुपात 17 वर्षों में दोगुना हो गया है।
दक्षिण एशिया में किए गए अध्ययन में छह देश अफगानिस्तान, भारत, पाकिस्तान, मालदीव, बांग्लादेश, मालदीव और नेपाल को शामिल किया गया। इसमें भारत, बांग्लादेश और नेपाल में अधिक वजन वाली लड़कियों और महिलाओं का अनुपात बढ़ा है। अध्ययन में पाया गया है कि इन देशों में अभी भी इनकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा कुपोषण से जूझ रहा है, जबकि दूसरे हिस्से में पोषण की अधिकता है, चाहे वे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं और लड़कियां हों या अशिक्षित और गरीब परिवार हो। अधिक वजन वाली लड़कियों और महिलाओं की संख्या भी कम वजन वाली लड़कियों के मुकाबले बढ़ रही है।
इससे पहले, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर न्यूट्रीशन, जो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आता है, ने 2016 के एक अध्ययन में वयस्कों में मोटापा बढ़ने की बात कही थी। भारत की 44 फीसदी शहरी महिलाएं मोटापे से ग्रस्त पाई गई थीं। 2017 में अनुमानित 72 मिलियन मामलों के साथ, वर्तमान भारत में दुनिया के 49 फीसदी मधुमेह रोगी रहते है, यह आंकड़ा 2025 तक लगभग 134 मिलियन तक होने की आशंका है।
बढ़ते वजन का कारण
शोध में पाया गया कि आय बढ़ने के साथ लोग अपने आहार में अधिक कार्बोहाइड्रेट, खाद्य तेलों और मीठे की मात्रा बढ़ा देते हैं। इसके अलावा जिन बच्चों ने कम से कम अलग-अलग प्रकार के आहारों का सेवन किया है, उनमें भी अधिक वजन होने की संभावना थी।
कम उम्र में मां बन रही लड़कियां
न्यूट्रिशन इंटरनेशनल की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवा के मामले में सबसे पिछड़ा राज्य है। 42 फीसदी महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं। वहीं, करीब 25 फीसदी महिलाएं 18 या उससे कम उम्र में ही गर्भवती हो जा रही हैं। इन महिलाओं का आंकड़ा 62 फीसदी है। कम उम्र में महिलाएं गर्भवती बनने से हाई रिस्क जोन में हैं। यह स्थिति राज्य के 18 जिलों में है। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसूति के 24 घंटे के अंदर ही छुट्टी दे दी जाती है। यह भी खतरनाक है।
मातृत्व व शिशु सुरक्षा को लेकर देशभर में स्वास्थ्य योजना पर काम चल रहा है। गांव-गांव तक लोगों को जागरूक करने, स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने और आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को शिक्षित करने के लिए कनाडा सरकार के सहयोग से न्यूट्रिएशन इंटरनेशनल उत्तर प्रदेश और गुजरात में काम कर रहा है। इसके तहत यूपी के चार जिलों (बस्ती, मैनपुरी, गाजीपुर और फतेहपुर) में सबसे पहले फोकस किया गया। पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू हुए इस कार्य में गर्बवत महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के एक हजार दिन पूरे होने पर मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट जारी की गई।
Updated on:
03 Sept 2019 04:56 pm
Published on:
03 Sept 2019 04:21 pm
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