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श्रीराम की दुनिया की सबसे ऊंची होगी प्रतिमा, सीएसआर के जरिए होगा धन का इंतजाम, 447 करोड़ जारी

251 मीटर की मूर्ति पर 3000 करोड़ से ज्यादा आएगा खर्च.  

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Nov 02, 2019

Ram Murti

Ram Murti

लखनऊ. अयोध्या में भगवार श्रीराम (Lord Sriram) की सबसे ऊंची मूर्ति लगायी जाएगी। यह गुजरात (Gujrat) में स्थापित लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabh Bhai) की मूर्ति से बड़ी होगी। यह अभी वर्तमान में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है। भगवान राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा के निर्माण पर 3000 हजार करोड़ से ज्यादा का खर्च आएगा। इसके लिए यूपी सरकार (UP Government) ने 447 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। इसके पहले जमीन की खरीद के लिए 200 करोड़ जारी किया जा चुका है। यह राशि अतिरिक्त होगी। मूर्ति निर्माण के लिए बाकी धन की व्यवस्था कंपनियों के सामाजिक उत्तरदायित्व फंड यानी सीएसआर और जनता की मदद से की जाएगी।

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गुजरात देगा टेक्निकल सपोर्ट-
अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान के लिए यहां राममंदिर के अलावा दुनिया की सबसे ऊंची और भव्य श्रीराम की प्रतिमा लगाने की योजना है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम जारी है। भगवान राम की मूर्ति 251 मीटर की होगी। यह विश्व की सबसे ऊंची मूर्ती होगी। शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में राम मूर्ति और अयोध्या के पर्यटन विकास के लिए 447.6 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके पहले राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 200 करोड़ रुपये पहले ही दे दिया था। जिसमें 100 करोड़ का आवंटन किया जा चुका है। मूर्ति के लायक आबोहवा (हवा और वहां मौजूद मिट्टी) का विस्तृत अध्ययन किया जाना है। मूर्ति निर्माण के लिए योगी सरकार ने गुजरात सरकार के साथ एक एमओयू किया है, जो प्रतिमा बनाने में टेक्निकल सपोर्ट देगा। मूर्ति पर गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति से ज्यादा यानी 3000 करोड़ रूपए से ज्यादा का खर्च आएगा।

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सरदार वल्लभ भाई पटेल (182 मीटर)-
विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति का गौरव भारत के पास है। गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति 182 मीटर ऊंची है। गुजरात सरकार ने इसे 3,000 करोड़ रुपए की लागत से बनवाया है। मुख्य प्रतिमा बनाने में 1,347 करोड़ रुपये खर्च आया था, वहीं 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये हैं। वहीं निर्माण के बाद 15 साल तक इसके ढांचे के रख रखाव के लिए 657 करोड़ रुपये खर्च के लिए रखे गए हैं। 83 करोड़ रुपये पुल के निर्माण पर खर्च किये गये। इसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नाम दिया गया है। इसका कुल वजन 1700 टन है। इस मूर्ति का निर्माण राम वी. सुतार की देखरेख में हुआ है। राम मर्ति और मुंबई में शिवाजी की मूर्ति के बाद यह तीसरे पायदान पर आ जाएगी।

शिवाजी मूर्ति (190 मीटर)-

महाराष्ट्र के मुंबई में स्टैच्यू ऑफ यूनिटि से 8 मीटर ज्यादा ऊंची प्रतिमा बनाने की कार्ययोजना है। महाराष्ट्र सरकार करीब 3800 करोड़ रुपये की लगात से छत्रपति शिवाजी महाराज मेमोरियल का निर्माण कर रही है। शिवा स्मारक की ऊंचाई 190 मीटर होगी। निर्माण होने के बाद यह (राम मूर्ति के बाद) विश्व की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति हो जाएगी। मुंबई में अरब सागर के भीतर छत्रपति शिवाजी महाराज मेमोरियल या शिवा स्मारक बनेगा। इसे बनाने का ठेका लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को मिला है। तय कार्ययोजना के मुताबिक यह स्मारक 2021 में बनकर तैयार हो जाएगा। इसी के साथ यह देश और दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति कहलाएगी।

स्प्रिंग टेंपल (153 मीटर)-

चीन स्थित स्प्रिंग टेंपल की 153 मीटर ऊंची बुद्ध प्रतिमा के नाम अब तक सबसे ऊंची मूर्ति होने का रिकॉर्ड था। लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा ने इसे दूसरे स्थान पर खिसका दिया है। वहीं राममूर्ति व शिवाजी मूर्ति के निर्माण के बाद यह चौथे पायदान पर आ जाएगी। स्प्रिंग टेंपल वैरोचन बुद्ध की सबसे विशालकाय प्रतिमा है, जो कि हेनान के जाओकुन कस्बे (लुशान काउन्टी) में चीन में स्थित है।