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न्यूटन से पहले कणाद ऋषि ने खोजा था गुरुत्वाकर्षण का नियम

नासा के सीनियर साइंटिस्ट प्रो. ओम प्रकाश पाठक ने दावा किया है कि यजुर्वेद के 17वें अध्याय में एक मंत्र है जिसमें एक संख्या पर 27 शून्य का उल्लेख मिला

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लखनऊ.नासा के सीनियर साइंटिस्ट प्रो. ओम प्रकाश पाठक ने दावा किया है कि यजुर्वेद के 17वें अध्याय में एक मंत्र है जिसमें एक संख्या पर 27 शून्य का उल्लेख मिलता है। यानी वेद ने आर्यभटट् से पहले शून्य की जानकारी दी। इसी तर गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत आधुनिक विज्ञान के हिसाब से न्यूटन ने बताया लेकिन ऐसा नहीं है। गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत सवर्प्रथम कणाद ऋषि ने दिया था। लखनऊ यूनिवर्सिटी के ज्योतिर्विज्ञान विभाग की ओर से 'वेदों में ज्योतिष तथा विज्ञान के संदर्भ' विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

साइंटिस्ट प्रो. ओम प्रकाश पाठक बोले- 'कहा जाता है कि विश्व को शून्य महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने दिया है। ले किन यजुर्वेद के 17वें अध्याय में एक मंत्र है जिसमें एक संख्या पर 27 शून्य का उल्लेख है। इसलिए आर्यभट्ट से पहले यजुर्वेद ने शून्य बताया था। वहीं ग्रैविटी का सिद्धांत न्यूटन का कहा जाता है जबकि न्यूटन से पहले कणाद ऋषि ने दिया था।' इस मौके पर कला संकाय के डीन प्रो. पीसी मिश्रा ने कहा कि वेदों में हर चीज मौजूद है, इसलिए विवि में वैदिक शोध होना चाहिए। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के प्रो. मदन मोहन पाठक ने कहा कि ज्योतिष का विषय सभी विद्यालयों में होना चाहिए। कार्यक्रम में 150 शोधार्थियों ने भाग लिया और अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। यह तीन दिनों तक चलेगी, जिसका समापन शुक्रवार को होगा, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय शामिल होंगे।

एस्ट्ररोनॉमी और एस्ट्ररोलॉजी में मामूली अंतर

उनके मुताबिक, एस्ट्ररोनॉमी और एस्ट्ररोलॉजी में लेश मात्र का अन्तर वह है कि एस्ट्ररोनॉमर पोजीशन, फंकशन और मूवमेन्ट को देखते है और एस्ट्ररोलॉजर उससे एक कदम आगे सोचता है उनके पोजीशन, फंकशन और मूवमेन्ट को देखता ही है साथ ही पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों जैसे मनुष्य, पशु, पक्षी और पेड़ों पर क्या प्रभाव पड़ता है ये भी देखता है।उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने कहा था कि ब्रहम सत्य है और जगत मिथ्या है। जो गिना जा सके, जो मापा जा सके और दिखाई पड़े, वह सत्य नहीं है। सत्य वह है जो गिना न जा सके, मापा न जा सके व दिखाई न पड़े, वही सत्य है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के शोध के जरिये सुना है कि सूर्य से एक प्रकार की ध्वनि निकलती है। हमारे वेदों में शतपथ ब्राहमण में लिखा है जो महा स्वर देता है वही सूर्य है।

एलयू में होना चाहिए वैदिक शोध

वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय कला संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर पीसी मिश्र ने कहा कि वेदों में हर चीज का वर्णन है और विश्वविद्यालय में वैदिक शोध होना चाहिए। उन्होंने कहा भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है और आगे भी रहेगा। कार्यक्रम के मुख्यातिथि, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मदन मोहन पाठक ने कहा कि भारतीय संस्कृति वेदों में निहित है। संस्कृत का संरक्षण होना बहुत आवश्यक है। उन्होनें कहा कि ज्योतिष का विषय सभी विद्यालयों में होना चाहिए।