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Ganga Expressway: बिना कर्ज बना गंगा एक्सप्रेसवे: योगी का दावा, यूपी ने रचा विकास का नया इतिहास

Ganga Expressway Yogi Adityanath Says: योगी आदित्यनाथ ने कहा, बिना बैंक कर्ज गंगा एक्सप्रेसवे पूरा हुआ, यूपी ‘बीमारू’ से ‘रेवेन्यू सरप्लस’ बना, वित्तीय अनुशासन से अर्थव्यवस्था और विकास को नई दिशा मिली।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

May 04, 2026

उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती की नई कहानी: बिना कर्ज गंगा एक्सप्रेस-वे, पारदर्शी भर्ती और वित्तीय अनुशासन पर योगी का जोर (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती की नई कहानी: बिना कर्ज गंगा एक्सप्रेस-वे, पारदर्शी भर्ती और वित्तीय अनुशासन पर योगी का जोर (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में सोमवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग तथा स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के नवचयनित कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता, विकास और रोजगार सृजन को लेकर विस्तृत संबोधन दिया, जिसमें पिछले नौ वर्षों में हुए बदलावों को रेखांकित किया गया।

बिना बैंक कर्ज के बना गंगा एक्सप्रेस-वे

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गंगा एक्सप्रेसवे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब इतनी आर्थिक क्षमता हासिल कर चुका है कि वह बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी अपने संसाधनों से पूरा कर रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 600 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे देश के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिस पर 36,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। इसके साथ ही 9 इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए करीब 7,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि ली गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पूरी परियोजना पर कुल मिलाकर 42,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया जा चुका है और यह सब बिना बैंकों से कर्ज लिए संभव हुआ है।

‘बीमारू’ से ‘रेवेन्यू सरप्लस’ तक का सफर

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ कहा जाता था। उस समय राज्य की वित्तीय स्थिति इतनी कमजोर थी कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान कर्ज देने को तैयार नहीं होता था। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “2017 में जब हमारी सरकार बनी, तब स्थिति यह थी कि बैंक के चेयरमैन तक फोन उठाने को तैयार नहीं थे। प्रदेश की छवि बेहद खराब हो चुकी थी।”

लेकिन सरकार ने वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए स्थिति को बदला। परिणामस्वरूप आज उत्तर प्रदेश “रेवेन्यू सरप्लस स्टेट” बन चुका है और देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।

वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वित्तीय अनुशासन नहीं होता और बिना योजना के खर्च किए जाते, तो राज्य कर्ज के बोझ तले दब जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण किया, राजस्व बढ़ाने के उपाय किए और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाया। इस प्रक्रिया में वित्त विभाग, स्थानीय निधि लेखा और पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

जेपीएनआईसी प्रोजेक्ट पर कुप्रबंधन का आरोप

मुख्यमंत्री ने लखनऊ में स्थित जेपीएनआईसी प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए इसे वित्तीय अनुशासनहीनता और कुप्रबंधन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की प्रारंभिक लागत 200 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 860 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, लेकिन इसके बावजूद यह परियोजना अधूरी है। मुख्यमंत्री ने इसे “जनता के पैसे का दुरुपयोग” बताते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि महापुरुषों के नाम का भी अपमान करती हैं।

राजस्व में वृद्धि और लीकेज पर नियंत्रण

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश को आबकारी (एक्साइज) से मात्र 12,000 करोड़ रुपये की आय होती थी, जो अब बढ़कर 62-63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।उन्होंने कहा कि यह वृद्धि तकनीकी सुधारों के साथ-साथ भ्रष्टाचार और लीकेज पर नियंत्रण के कारण संभव हुई है। पहले राजस्व का बड़ा हिस्सा गलत हाथों में चला जाता था, लेकिन अब उसे विकास कार्यों में लगाया जा रहा है।

आत्मनिर्भरता का आधार: मजबूत वित्तीय ढांचा

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए वित्तीय अनुशासन और प्रभावी प्रबंधन अनिवार्य है। उन्होंने ग्राम पंचायत, नगर निकाय और जिला पंचायत जैसी संस्थाओं को विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि इन संस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है। इंटरनल ऑडिट सिस्टम को उन्होंने इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया और नवचयनित लेखा परीक्षकों से अपेक्षा जताई कि वे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करें।

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की सराहना

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है। उन्होंने बताया कि नवचयनित अभ्यर्थियों में कोई भी ऐसा नहीं है जिसने सिफारिश के आधार पर नौकरी पाई हो। उन्होंने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया इतनी गोपनीय और निष्पक्ष होती है कि उच्च स्तर के अधिकारी भी चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर पाते।

‘चाचा-भतीजा’ संस्कृति पर प्रहार

मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में ‘चाचा-भतीजा’ संस्कृति हावी थी। पेपर लीक और सिफारिशों के आधार पर नियुक्तियां होती थीं, जिससे योग्य युवाओं के साथ अन्याय होता था। उन्होंने कहा कि अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और हर वर्ग के योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिल रहा है।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सहकारी समितियों और पंचायत लेखा परीक्षा विभाग में चयनित 371 अभ्यर्थियों में 78 महिलाएं शामिल हैं, जबकि स्थानीय निधि लेखा परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों में भी बड़ी संख्या में बेटियों ने स्थान बनाया है। उन्होंने इसे सकारात्मक बदलाव बताते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

रोजगार सृजन में बड़ी उपलब्धि

सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक प्रदेश में 9 लाख से अधिक लोगों को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। इसके अलावा एमएसएमई सेक्टर में करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। विभिन्न योजनाओं-जैसे “ड्रोन दीदी”, “लखपति दीदी”, “बीसी सखी”, पीएम स्टार्टअप, पीएम स्टैंडअप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के जरिए युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।