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योगी सरकार के 6 साल: ऑपरेशन लंगड़ा ने किया पॉपुलर, 2185 दिन पहले कहा था- गुंडे ऊपर जाने को रहें तैयार

CM Yogi government completed 6 year: कानून व्यवस्था पर लोगों ने की योगी की तारीफ। लेकिन सरकार के लिए आवारा पशु क्यों बने समस्या?

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लखनऊ

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Prashant Tiwari

Mar 17, 2023

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योगी आदित्यनाथ को 25 मार्च 2023 को मुख्यमंत्री बने 6 साल 6 दिन हो जाएंगे। बता दें की इससे पहले प्रदेश का कोई भी CM इतने दिनों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं रहा हैं। मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव BJP ने जीता था। इसके बाद पार्टी ने गोरखपुर के सांसद और फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को सूबे का CM बनाया।

मुख्यमंत्री बनते के बाद से ही योगी लगातार सुर्खियों में बने रहें। वैसे तो इसके बहुत से कारण रहें। लेकिन सूबे में कानून व्यवस्था को ठीक करने के लिए उनके ऑपरेशन लंगड़ा की नीति प्रमुख रहीं।

बदमाशों को UP छोड़ने या ऊपर जाने की धमकी
17 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने 25 मार्च को गोरखपुर में एक जनसभा किया। बोले, “प्रदेश के माफिया, गुंडे और बदमाश या तो UP छोड़ दें या ऊपर जाने के लिए तैयार रहें।” इसके बाद प्रदेश में 1 साल में करीब 400 एनकाउंटर हुए। इससे प्रदेश के लोगों को में कानून व्यव्सथा को लेकर भरोसा जगा। 2021 में जारी NCRB के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 4 साल के दौरान सूबे में महिला अपराध, डकैती, हत्या के मामलों में कमी देखने को मिलीं।

सफेदपोश माफियाओं पर कार्रवाई
CM योगी ने प्रदेश के बड़े सफेदपोश माफियाओं मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, विकास दुबे, विजय मिश्रा जैसे बड़े अपराधियों पर कार्रवाई की। इस दौरान उन्होंने इन माफियों के गैंग पर लगाम लगाते हुए उन्हें जेल भेजा। वहीं, उनकी अपराध से अर्जित अरबों की संपत्तियों पर या तो बुल्डोजर चलवा दिया या उसे कुर्क कराकर अपने कब्जे में ले लिया।

निवेश के लिए इन्वेस्टर समिट
BJP ने चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। इसके लिए CM योगाी ने इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया था। हांलाकि इससे कितना फायदा हुआ यह़ बता पाना मुश्किल हैं। क्योंकि इसका आधिकारीक डाटा अभी उपलब्ध नहीं है। लेकिन सरकार दावा करती है कि इससे प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

सरकार के कोरोना मैनेजमेंट की तारीफ
2020 के मार्च में जब कोविड-19 पूरी दुनियां में फैला तो UP भी इससे अछूता नहीं रहा। कोरोना के पहली लहर में तो सरकार ने किसी प्रकार से मोर्चा संभाल लिया। लेकिन जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो पूरे देश के साथ ही प्रदेश की स्वास्थय सेवाओं की सच्चाई सामने आ गई। अस्पतालों में बेड से लेकर ऑक्सिजन तक की कमी ने सरकार की व्यवस्थाओं का पोल खोल दिया।

इसके बाद CM योगी ने अपनी टीम के साथ लगातार बैठक और दौरें कर इसे रोकने का काम किया। उनके कोरोना प्रबंधन की तारीफव देश ही नहीं बल्कि दुनियां के कई देशों ने की। इस दौरान CM योगी ने प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक मेडिकल कॉलेज बनवाने का फैसला किया।

सड़क को गड्ढ़ा मुक्त बनाने का निर्देश
मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश की करीब 2 लाख किलोमीटर की सड़के को गड्ढ़ा मुक्त करने का आदेश दिया था। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे जैसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवें, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवें, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवें बनाया। लेकिन समाजवादी पार्टी इन सभी को अपने सरकार का काम बताती है। सपा प्रमुखल कई बार इन एक्सप्रेसवें की क्वालिटी पर सवाल उठा चुके हैं।

यहां तक तो आप ने योगी सरकार के उपलब्धियों को जाना। आइए अब बात करते है उन मुद्दों की जिन पर जनता गाहे बगाहे सरकार से नाराजगी जाहिर करती हैं। या यह कह सकते हैं कि इन मुद्दों पर सरकार अब तक कोई खास काम नहीं कर पाई हैं।

आवारा पशु खा जाते है किसानों की फसल
हालांकि योगी सरकार के आवारा पशुओं की नीति से लोग खासकर किसान परेशान हैं। प्रदेश में अवैध बूचड़खानों के बंद हो जाने के कारण आवारा गोवंश लोगों को आय दिन घायल कर रहे है। किसानों के खेत में घुसकर उनके फसलों को खाने के साथ ही उनके फसलों को बर्बाद कर देते हैं। हालांकि 2022 के चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस समस्या का समाधान करने का वादा किया था। लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई हैं।

6 साल के दौरान कई बार खाकी हुई शर्मसार
CM योगी ने प़ुलिस को अपराधियों पर कार्रवाई करने के लिए खुली छूट दी। इसका कई अफसरों ने गलत फायदा उठाया। कानपुर के व्यापारी जो गोरखपुर घुमने के लिए आया था। उसकी पुलिसवालों ने हत्या कर दी। इसी तरह प्रदेश के एक IPS के बार बार परेशान करने पर व्यापरी के आत्महत्या करने का मामला सामने आया। कानपुर के बीकरू कांड में पुलिस वालों की मिलीभगत भी सामने आई।

विधायक बोले- अधिकारी हमारी नहीं सुनते
योगी आदित्यनाथ सरकार पर हमेशा से यह आरोप लगता आया हैॆं कि उनके सरकार में अधिकारी मनमाने हो गए हैं। सांसदों, विधायकों की हमेशा से यह शिकायत रही कि उनके जिले के अधिकारी उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। कई बार तो वह उनका फोन तक नहीं उठाते। यह समस्या इतनी बड़ी हो गई कि खुद CM योगी को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।