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दुनिया का इकलौता ज्वालामुखी, जो उगलता है ‘नीला लावा’, कहां है यह अनोखा स्थान? जानिए इसका वैज्ञानिक रहस्य

कावाह इजेन ज्वालामुखी (Kawah Ijen Volcano) अपनी अनोखी पहचान के लिए प्रसिद्ध है। कावाह इजेन ज्वालामुखी से नीले रंग की आग की लपटें निकलती हैं, जो रात के समय बेहद खूबसूरत लगती हैं। आइए जानते हैं कावाह इजेन ज्वालामुखी पर होने वाली घटनाओं के पीछे क्या कारण है?
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भारत

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Vinay Shakya

Jul 20, 2026

Kawah Ijen Volcano

कावाह इजेन ज्वालामुखी से निकलती हैं आग की नीली लपटें (फोटो- AI)

Kawah Ijen Volcano: ज्वालामुखी का नाम सुनते ही जहन में लाल-नारंगी कलर का धधकता हुआ लावा, धुंआ और तबाही जैसे मंजर की छवि उभर आती है। दुनिया में एक ऐसा ज्वालामुखी भी है, जिसकी खासियत सबसे अलग है। यह अनोखा ज्वालामुखी 'नीला लावा' उगलता है। इस ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा रात के अंधेरे में धधकती हुई चमकीली नीली आग के समान दिखाई देता है। अनोखी पहचान के कारण यह ज्वालामुखी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

क्या है इस ज्वालामुखी का रहस्य?

इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित कावाह इजेन (Kawah Ijen) ज्वालामुखी दुनिया का सबसे रहस्यमयी और अनोखा है। इस ज्वालामुखी को देखने पर पहली नजर में ऐसा लगता है कि यह रात के अंधेरे में नीला लावा उगल रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यहां दिखाई देने वाली चमकदार नीली लपटें (Blue Flames) वास्तव में ब्लू फायर (Blue Fire) है। यह प्राकृतिक घटना दुनिया में बेहद दुर्लभ है और इसे देखने के लिए हर साल हजारों पर्यटक, फोटोग्राफर और वैज्ञानिक इंडोनेशिया पहुंचते हैं।

ज्वालामुखी के पास है दुनिया की सबसे खतरनाक झील

कावाह इजेन (Kawah Ijen) ज्वालामुखी रात के अंधेरे में देखने पर जितना शानदार लगता है, यह उतना ही खतरनाक भी है। यहां झील मौजूद है, जो दुनिया की सबसे अधिक अम्लीय (एसिडिक) पानी के स्रोत में से एक है। इस झील से लगातार जहरीली सल्फर गैसें निकलती रहती हैं।

कावाह इजेन केवल ज्वालामुखी केवल ब्लू फायर के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है। इसके क्रेटर के अंदर मौजूद फिरोजी रंग की झील दुनिया की सबसे अधिक अम्लीय झीलों में गिनी जाती है। इस झील का पानी देखने में बेहद सुंदर लगता है, लेकिन इसमें सल्फ्यूरिक और हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा काफी अधिक होती है। इस झील के पानी का pH स्तर लगभग 0.2 से 0.5 तक पहुंच जाता है।

यह सामान्य बैटरी एसिड के बराबर अम्लीय माना जाता है। इस क्रेटर का व्यास लगभग 722 मीटर और गहराई करीब 200 मीटर है। वहीं, पूरा कावाह इजेन काल्डेरा लगभग 20 किलोमीटर चौड़ा है, जिसमें कई ज्वालामुखीय संरचनाएं मौजूद हैं। इस क्षेत्र से निकलने वाला अत्यधिक अम्लीय पानी धातुओं को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

क्यों नीला दिखाई देता है लावा?

अधिकांश लोग मानते हैं कि कावाह इजेन ज्वालामुखी से नीला लावा निकलता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। इस ज्वालामुखी के भीतर बड़ी मात्रा में सल्फर गैस (Sulfur Gas) निकलती है। जब यह गैस सतह पर आकर ऑक्सीजन के संपर्क में लगभग 600 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर जलती है तो चमकदार नीली लपटें दिखाई देती हैं।

वैज्ञानिक इसे ब्लू फायर कहते हैं। दिन के उजाले में यह नीली आग लगभग दिखाई नहीं देती, लेकिन रात के अंधेरे में पूरा क्षेत्र नीली रोशनी से जगमगा उठता है। यही कारण है कि पर्यटक देर रात ट्रेकिंग करके इस अद्भुत प्राकृतिक घटना को देखने पहुंचते हैं।

1999 में हुआ था अंतिम विस्फोट

कावाह इजेन ज्वालामुखी में अंतिम बार सबसे बड़ा विस्फोट 1999 में हुआ था। इसके बाद से इस ज्वालामुखी में कोई बड़ा विस्फोट नहीं हुआ, लेकिन यह आज भी सक्रिय माना जाता है। यहां लगातार गैसों का उत्सर्जन और भू-तापीय गतिविधियां जारी रहती हैं। इसी कारण दुनियाभर के भू-वैज्ञानिक और ज्वालामुखी विशेषज्ञ यहां नियमित रूप से अध्ययन करने आते हैं। यह ज्वालामुखी इजेन ज्वालामुखीय परिसर (Ijen Volcanic Complex) का हिस्सा है, जिसमें कई पर्वत और ज्वालामुखीय संरचनाएं शामिल हैं। इस पूरे क्षेत्र की गतिविधियों पर इंडोनेशिया की ज्वालामुखी निगरानी एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं।

यहां जान जोखिम में डालकर सल्फर निकालते हैं मजदूर

कावाह इजेन की सबसे मार्मिक तस्वीर यहां काम करने वाले स्थानीय मजदूरों की है। ज्वालामुखी के अंदर बनने वाले ठोस सल्फर को मजदूर पारंपरिक तरीकों से काटकर बड़े-बड़े टुकड़ों में इकट्ठा करते हैं। इसके बाद करीब 60 से 90 किलोग्राम तक वजन अपने कंधों पर लादकर करीब 3 किलोमीटर कठिन पहाड़ी के रास्ते से नीचे पाल्टूडिंग घाटी तक ले जाते हैं।

यहां काम करने वाले मजदूरों को एक दिन में औसतन 1000 रुपए मिलते हैं। यहां अधिकांश मजदूर बिना आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के जहरीली सल्फर गैसों के बीच काम करते हैं। इसलिए मजदूरों को सांस, आंख और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।

पर्यटकों को आकर्षित करता है यह स्थान

कावाह इजेन ज्वालामुखी से निकलने वाली ब्लू फायर पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। ब्लू फायर देखने के लिए पर्यटक आमतौर पर आधी रात के बाद ट्रेकिंग शुरू करते हैं, ताकि सूर्योदय से पहले इस प्राकृतिक दृश्य का आनंद ले सकें। स्थानीय प्रशासन पर्यटकों को गैस मास्क पहनने और प्रशिक्षित गाइड के साथ ही ज्वालामुखी क्षेत्र में जाने की सलाह देता है।

कई बार जहरीली गैसों का स्तर बढ़ने पर प्रशासन ट्रेकिंग पर अस्थायी रोक भी लगा देता है। यह स्थान फोटोग्राफी, एडवेंचर ट्रैवल और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है, लेकिन यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ मौजूद खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

प्रकृति की अद्भुत रचना है कावाह इजेन ज्वालामुखी

कावाह इजेन ज्वालामुखी प्रकृति की अद्भुत और रहस्यमयी रचना है। रात में दिखाई देने वाली नीली आग दुनिया के सबसे दुर्लभ प्राकृतिक दृश्यों में से एक है, जबकि इसकी एसिडिक झील और सल्फर गैसें इसे पृथ्वी के सबसे खतरनाक ज्वालामुखीय क्षेत्रों में शामिल करती हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह शोध का महत्वपूर्ण केंद्र है और पर्यटकों के लिए यह रोमांच का अनूठा अनुभव है। यही वजह है कि इंडोनेशिया का यह ज्वालामुखी दुनिया के सबसे चर्चित प्राकृतिक स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।