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विश्व के 40 देशों में घट रही आबादी: छोटे हो रहे परिवार, शादी और बच्चे पैदा करने से क्यों कतरा रहे युवा?

विश्व के 73 देशों में किए गए सर्वे के मुताबिक, करीब 40 देशों की आबादी घट (Population Declining) रही है। आबादी घटने के कारणों में समय के साथ बदल रही लोगों की प्राथमिकताएं, नौकरी की अनिश्चितता, आपसी तालमेल, आर्थिक स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण कारण शामिल हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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भारत

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Vinay Shakya

Jul 20, 2026

UNFPA survey

दुनिया के 40 देशों में घट रही आबादी (फोटो सोर्स- UNFPA)

UNFPA Demographic Survey: संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में वैश्विक जनसांख्यिकीय में हो रहे बड़े बदलावों पर चौंकाने वाली बात सामने आई है। UNFPA रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के करीब 40 देशों में आबादी घट रही है। आबादी घटने से परिवार छोटे होते जा रहे हैं और युवा शादी एवं बच्चे पैदा करने कतरा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 'Lives, Choices and Futures: Findings from the Demographic Futures Survey' नाम से अपनी रिपोर्ट जारी की है।

73 देशों में किया गया सर्वे

UNFPA रिपोर्ट, 73 देशों के 18 से 39 वर्ष के1 लाख 8 हजार से अधिक युवाओं पर आधारित है। इनमें इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले युवाओं को शामिल किया गया। भारत समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 16 देश इस सर्वे में शामिल हैं। अध्ययन में रिश्तों, विवाह, संतान और जिम्मेदारियों पर युवाओं की सोच का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट में ऐतिहासिक आंकड़े दिए गए हैं। 1950-1960 के दशक में एक महिला के औसतन 5 बच्चे होते थे। वर्ष 2024 में यह संख्या 2 से थोड़ी ऊपर रही। अनुमान है कि वर्ष 2100 तक यह दर घटकर 1.8 रह जाएगी। जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए प्रत्येक महिला पर औसतन 2.1 बच्चे होना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 55 प्रतिशत देशों में लोग कम बच्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप करीब 40 देशों में आबादी घटने लगी है।

छोटे हो रहे परिवार के लिए कौन जिम्मेदार?

UNFPA रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि कम बच्चों के लिए केवल महिलाओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसके लिए पुरुषों की आर्थिक स्थिति, नौकरी की अनिश्चितता और अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हैं। भारत में बच्चे पैदा करने के मुद्दे पर महिला और पुरुषों की सोच लगभग समान है।

सर्वे में शामिल दो तिहाई से अधिक युवाओं ने विवाह करने और जीवनसाथी के साथ रहने की इच्छा जताई है। करीब 80 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि माता-पिता बनने के लिए पार्टनर के साथ अच्छी साझेदारी जरूरी है। बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी दोनों को बराबर उठानी चाहिए। हालांकि, फिर भी वास्तविकता अलग है।

क्या है युवाओं की राय?

UNFPA के सर्वे के मुताबिक, 25 से 39 वर्ष के करीब एक चौथाई पुरुष फिलहाल अकेले हैं, हालांकि वे जीवन साथी चाहते हैं। लगभग 57 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि शादी के लिए पैसा और अच्छा घर सबसे बड़ी रुकावट बन रही है। अच्छी आर्थिक स्थिति और स्थिर रोजगार के बिना युवा परिवार शुरू करने से हिचकिचा रहे हैं। पराग्वे के एक युवक ने कहा- बच्चे को दुनिया में लाना केवल एक कदम है। असली चुनौती उसकी परवरिश करना है।

महिलाओं को पूर्व स्वतंत्रता नहीं

सर्वे रिपोर्ट में महिलाओं की स्थिति को चिंताजनक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में महिलाएं बच्चे पैदा करने और अपने स्वास्थ्य संबंधी फैसले स्वतंत्र रूप से नहीं ले पा रही हैं। लगभग हर 10 में से एक महिला गर्भनिरोधक के इस्तेमाल पर निर्णय नहीं ले सकती। एक चौथाई महिलाएं अपने स्वास्थ्य की देखभाल के फैसले खुद नहीं ले पातीं हैं। इसी आकड़े के बराबर महिलाएं आपसी संबंधों के दौरान किसी भी बात को 'न' बोलने में असमर्थ हैं।

महिलाएं आर्थिक संकट, बांझपन और लंबी बीमारियों को पुरुषों की तुलना में ज्यादा गंभीरता से लेती हैं। रिपोर्ट में कम उम्र में मां बनने को कुछ समाजों की समस्या बताया गया है, जबकि यह शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी सफलता है। कम उम्र में गर्भावस्था स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाती है और लड़कियों की पढ़ाई प्रभावित करती है।

युवाओं की बदलती प्राथमिकताएं

आधुनिक युवा पहले वित्तीय सुरक्षा, स्थिर रोजगार और भावनात्मक तैयारी चाहते हैं। सर्वे में 90 प्रतिशत युवाओं ने पैसा और अच्छी सेहत को जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बताया। हालांकि, 73 प्रतिशत युवा जीवनसाथी के साथ समय बिताने और परिवार बढ़ाने को भी प्राथमिकता देते हैं।

करीब 55.5 प्रतिशत युवा पढ़ाई और बेहतर करियर पर फोकस करना चाहते हैं। इसके अलावा 53.8 प्रतिशत युवा, माता-पिता से अलग होकर स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं। वहीं, 44.9 प्रतिशत परिवार के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। ज्यादातर युवा परिवार में दो बच्चों को आदर्श मानते हैं। सर्वे में शामिल केवल 24 प्रतिशत युवाओं ने दोस्तों के बड़े नेटवर्क को महत्वपूर्ण बताया है। यानी कि व्यक्तिगत संबंधों में युवा अधिक चयनात्मक हो रहे हैं।

युवाओं की प्रमुख चिंताएं

सर्वे में युवाओं से उनकी चिंताओं के बारे में भी पूछा गया। 54.3 प्रतिशत युवा विभिन्न देशों में चल रहे युद्धों से चिंतित हैं और खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। 48.9 प्रतिशत आर्थिक असमानता से परेशान हैं। 41.4 प्रतिशत पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी बदलावों को लेकर चिंतित हैं। केवल 21.8 प्रतिशत युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से खतरे का अंदेशा है। ज्यादातर युवा AI को सकारात्मक रूप में देखते हैं।

सर्वे का भौगोलिक विस्तार

UNFPA सर्वे में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के 16 देश (भारत, बांग्लादेश, भूटान, इंडोनेशिया, जापान आदि), पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के 15 देश, लैटिन अमेरिका व कैरिबियन के 13 देश, पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका के 12 देश, अरब क्षेत्र के 8 देश तथा अफ्रीका के कुछ देश शामिल हैं।

बदलते परिवेश से प्रभावित हो रहे युवा

संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत मिले हैं कि बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य युवाओं की पसंद को प्रभावित कर रहे हैं। आर्थिक सुरक्षा, करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की चाहत परिवार व जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित कर रही है। यदि समय रहते नीतिगत हस्तक्षेप नहीं किया गया तो कई देशों में जनसंख्या संकट गहरा सकता है।

UN की रिपोर्ट युवाओं की सोच में सकारात्मक बदलाव भी दिखाती है। इसमें दर्शाया गया कि युवा समानतापूर्ण साझेदारी, जिम्मेदारीपूर्ण पालन-पोषण और स्वस्थ जीवन की कामना रखते हैं। सरकारों, समाज और नीति-निर्माताओं को इन बदलावों को समझते हुए युवा-अनुकूल नीतियां बनानी होंगी, ताकि जनसांख्यिकीय संतुलन बना रहे और भविष्य सुरक्षित हो।