
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कैसे मिलेगा लाभ?
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana : भारतीय खेती आज भी बड़े पैमाने पर मौसम की दया पर टिकी है। कभी अत्यधिक बारिश खेतों को डुबो देती है, तो कभी सूखा फसल को सुखा देता है। ओलावृष्टि, तूफान और कीट-रोग भी किसानों की मेहनत और पूंजी पर भारी पड़ते हैं। इसी अनिश्चितता से किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) शुरू की थी। यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले फसल नुकसान की भरपाई के लिए एक वित्तीय सुरक्षा कवच देती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह योजना कैसे काम करती है, इसका लाभ किसे मिलता है, और किन परिस्थितियों में किसान को मुआवजा मिल सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत फरवरी 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसने पहले से चल रही राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) की जगह ली। योजना का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक आपदा, मौसम की मार, कीट प्रकोप या रोग के कारण फसल को नुकसान होने पर किसान आर्थिक रूप से बर्बाद न हों। पिछले लगभग एक दशक में यह योजना किसान नामांकन के लिहाज़ से देश की सबसे बड़ी और प्रीमियम की दृष्टि से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी फसल बीमा योजना बन चुकी है।
इस योजना का दायरा काफी व्यापक है और लगभग हर तरह के किसान को इसमें शामिल किया गया है।
यानी चाहे किसान के पास अपनी जमीन हो या वह किराए/बटाई पर खेती करता हो, वह भी योजना का लाभ उठा सकता है, बशर्ते संबंधित राज्य ने इसकी अनुमति दी हो।
योजना के अंतर्गत खरीफ, रबी और वार्षिक व्यावसायिक-बागवानी, तीनों तरह की फसलें शामिल हैं। खरीफ फसलें आमतौर पर जून-जुलाई में बोई जाती हैं और अक्टूबर-नवंबर में काटी जाती हैं। इसमें धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, सोयाबीन, मूंगफली और अरहर जैसी फसलें आती हैं। रबी फसलें अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं। इसमें गेहूं, जौ, चना, मसूर और सरसों प्रमुख हैं। व्यावसायिक और बागवानी फसलों में कपास, आलू, प्याज, टमाटर के साथ-साथ वे तमाम फसलें शामिल हैं जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचित करती है।
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यही है कि किसान की जेब पर बोझ बहुत कम पड़ता है, क्योंकि प्रीमियम की दर एक समान और न्यूनतम रखी गई है।
बचा हुआ पूरा प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं, ताकि नुकसान की स्थिति में किसान को पूरी बीमित राशि मिल सके। हालांकि, राज्य और सीज़न के अनुसार दरों में थोड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है, इसलिए आवेदन से पहले pmfby.gov.in पर मौजूदा दरों की पुष्टि करना बेहतर रहता है।
बुवाई न हो पाने की स्थिति में : यदि कम बारिश या प्रतिकूल मौसम के कारण किसान समय पर बुवाई ही नहीं कर पाता, तो भी योजना के तहत सहायता का प्रावधान है।
खड़ी फसल को नुकसान होने पर : अगर सूखा, बाढ़, जलभराव, चक्रवात, तूफान, आंधी, ओलावृष्टि, बिजली गिरना, बादल फटना या भूस्खलन जैसी घटनाओं से खड़ी फसल को नुकसान पहुंचता है, तो किसान मुआवजे का दावा कर सकता है।
कीट और बीमारियों से नुकसान : यदि बड़े पैमाने पर कीट प्रकोप या रोग के कारण फसल की पैदावार प्रभावित होती है, तब भी बीमा का लाभ मिल सकता है।
कटाई के बाद का नुकसान : कई बार फसल काटकर खेत में सुखाने के लिए रखी जाती है। ऐसे में यदि बेमौसम बारिश, आंधी, चक्रवात या ओलावृष्टि से नुकसान होता है, तो भी योजना के तहत सहायता का प्रावधान है।
स्थानीय आपदाओं के मामले में : ओलावृष्टि, जलभराव, बादल फटना, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ जैसी स्थानीय घटनाओं को भी योजना के दायरे में रखा गया है।
फसल खराब होते ही सबसे जरूरी है समय पर सूचना देना, क्योंकि इसी आधार पर नुकसान का आकलन होता है। किसान को चाहिए कि वह -
देरी होने पर नुकसान के सही आकलन में दिक्कत आ सकती है, इसलिए तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
सूचना मिलने के बाद संबंधित कृषि विभाग और बीमा कंपनी संयुक्त रूप से सर्वे करती हैं। फसल क्षति के आकलन के आधार पर, कुछ मामलों में फसल कटाई प्रयोग (CCE) और सैटेलाइट व ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है। दावा स्वीकृत होने के बाद मुआवजे की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है।
कुल मिलाकर, यदि किसी किसान ने समय रहते अपनी फसल का बीमा करा लिया है और बाद में प्राकृतिक आपदा, कीट या बीमारी के कारण फसल को नुकसान पहुंचता है, तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना उसकी आर्थिक भरपाई में एक भरोसेमंद सहारा बनती है। कम प्रीमियम, व्यापक कवरेज और सीधे बैंक खाते में भुगतान जैसी खूबियों के चलते यह योजना आज भारत के करोड़ों किसानों के लिए संकट के समय एक सुरक्षा कवच का काम कर रही है।
Updated on:
19 Jul 2026 10:16 am
Published on:
19 Jul 2026 10:16 am
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