
जिगर के टुकड़ों को बेसहारा छोड़ गई मां, बाप भी जेल में, भीख मांगने को मजबूर बच्चे
महासमुंद. निर्दयी मां ने अपने जिगर के चार टुकड़ों को खुद से जुदा कर दिया, पिता जेल की हवा खा रहा है, दादा की मौत के बाद दादी भी लाचार है। अब ये बच्चे अपने पेट की आग बुझाने भीख मांगने के लिए बेबस हैं। कई बार मध्याह्न भोजन और आंगनबाड़ी केंद्र से इन बच्चों की पेट की आग बुझ जाती है, पर स्थाई समाधान नहीं हो रहा है।
यह कहानी जिला मुख्यालय से लगे बेमचा गांव के नयापारा के एक गरीब परिवार के चार बच्चों की है। संध्या (5), शालू (7), लकी (10), आरती हरवंश (14) का पिता उत्तम हरवंश जेल में है और मां मानबाई बच्चों का साथ छोडक़र कहीं चली गई। हैरानी इस बात की है कि अब बच्चों के अपने ही उन्हें स्वीकार नहीं कर रहे हैं। महिला एवं बाल विकास भी इन बच्चों की सुध नहीं ले रहा है। यह मामला 2016 में पहली बार सामने आया था। तब ग्राम पंचायत में महिला व बाल विकास विभाग की बैठक हुई थी। बैठक में बच्चों के दादा ने पालन-पोषण की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन कुछ महीने पहले ही बच्चों के दादा अर्जुन हरवंश की हत्या हो गई। इसके बाद आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से दादी ने बच्चों को रखने से ही इनकार कर दिया। ये चारों बच्चे फिर से भटकने को मजबूर हैं। घर तो है, पर जर्जर अवस्था में है। इस वजह से गांव में ही हर रोज रात गुजारने के लिए ठिकाना तलाशते रहते हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अन्नपूर्णा ने बताया कि बच्चे जब भी आते हैं, उन्हें पर्याप्त भोजन कराया जाता है। हम उन्हें सहयोग भी करते हैं। लोगों से यह भी पता चला कि चारों बच्चों का पिता उत्तम शराबी है। गांव में जब भी वह आता है, गाली-गलौच करता है। जिससे आसपास का माहौल खराब हो जाता है। हालांकि, अभी वह जेल में है।
माता-पिता की अनदेखी की वजह से चारों बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। कोई भी बच्चा नहीं पढ़ रहा है। चार बच्चों में तीन बालिकाएं है। 14 वर्ष की आरती ने बताया कि आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी हूं। कभी पंचायत तो कभी अपने जर्जर घर में रहते हैं। कभी-कभी खुद ही भोजन बना लेते हैं। अब इन बच्चों को अपनों के सहारे का इंतजार है, लेकिन इनके परिवार का कोई भी सदस्य इन्हें साथ रखना नहीं चाहता। इसलिए इधर-उधर घूम रहे हैं।
शिक्षक रामकुमारी राजपूत ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के साथ देखरेख की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। महिला व बाल विकास विभाग को ध्यान देना चाहिए। यह गंभीर मामला है।
महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी एमडी नायक ने कहा कि 2016 में बैठक लेकर समस्या का समाधान करने की कोशिश की गई थी, लेकिन बच्चों के दादा ने मना कर दिया था। फिर बैठक लेंगे। निकराकरण की कोशिश करेंगे।
बेमचा के सरपंच पति रोहित चंद्राकर ने कहा कि इस मामले का स्थाई निवारण होना चाहिए। हम चाहते हैं, कि बच्चों की देखरेख की व्यवस्था हो, हम खुद उन्हें पैसे देते हैं, भोजन की व्यवस्था भी कर रहे हैं।
Published on:
31 Aug 2018 12:55 pm
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