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CG Tourism : एक रानी के मौन प्रेम का प्रतीक बना छत्तीसगढ़ का यह सुन्दर मंदिर , जानिए यह अनोखी कहानी

Chhattisgarh Tourism Information :ऐसी कई कहानियां प्रचलित जिसमें प्रेम की निशानी के रूप में स्मारक का निर्माण कराया गया है। सबसे प्रचलित कहानी मुमताज़ और शाहजहां की है।

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CG Tourism : एक रानी के मौन प्रेम का प्रतीक बना छत्तीसगढ़ का यह सुन्दर मंदिर , जानिए यह अनोखी कहानी

CG Tourism : एक रानी के मौन प्रेम का प्रतीक बना छत्तीसगढ़ का यह सुन्दर मंदिर , जानिए यह अनोखी कहानी

Chhattisgarh Tourism Information : महसुमंद.ऐसी कई कहानियां प्रचलित जिसमें प्रेम की निशानी के रूप में स्मारक का निर्माण कराया गया है। सबसे प्रचलित कहानी मुमताज़ और शाहजहां की है। अपनी सबसे प्रिय बेगम के मरने के बाद मुग़ल बादशाह ने ताजमहल बनवाया।

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Chhattisgarh Tourism Information :शाहजहां मुमताज़ को सबसे ज्यादा प्रेम करता था। जब मुमताज़ की मृत्यु हुई तो बादशाह उदास हो गया। उसने अपनी बेगम के याद में एक दुर्लभ इमारत बनवाने का फैसला लिया। जो स्मारक बनी उसका नाम 'मुमताज़' के नाम पर 'ताज' रखा गया। यह इमारत ताज महल कहलाई। इस कहानी के अलावा भी कई कहानियां हैं , जो मुख्यधारा से दूर हैं। ऐसी ही एक कहानी छत्तीसगढ़ की रानी की है।

अनोखी है दास्ताँ

Chhattisgarh Tourism Information : उस समय यहाँ पर शैव राजाओं का शासन था। उन्ही में एक राजा थे। राजा का नाम सोमवंशी हर्षगुप्त था। उनकी पत्नी थी जिनका नाम रानी वासटादेवी था। यह वैष्णव संप्रदाय को मानती थीं। इनके पिता मगध के राजा सूर्यवर्मा थे। एक दिन अचानक राजा हर्षगुप्त का निधन हो गया। रानी शोक में डूब गई। बहुत दिनों तक उदास रहने के बाद रानी ने यह निश्चय किया कि उनकी याद में एक मंदिर का निर्माण किया जाये। ।

ऐसे निर्माण हुआ सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर का। यही कारण है , इस मंदिर को नारी के मौन प्रेम का प्रतिक कहा गया है। इस मंदिर एक विशेषता यह भी है कि यह भारत पहला लाल ईंट से बना मंदिर है

विनाशकारी आपदाओं को झेलने के बाद भी नहीं पहुंचा नुक्सान

Chhattisgarh Tourism Information : इतिहासकारों के अनुसार बारहवीं शताब्दी में सिरपुर में भूकंप आया था। यह भूकंप इतना विनाशकारी था कि पूरा सिरपुर तहस नहस हो गया था। लेकिन लक्ष्मण मंदिर को कुछ नहीं हुआ। उसके बाद 14वीं-15वीं शताब्दी के दौरान महानदी की भयानक बाढ़ ने सिरपुर में तबाही मचा दी थी यहाँ के सारे धर्मस्थल तबाह हो गए थे। परन्तु लक्ष्मण मंदिर अप्रभावित रहा।