
स्टूडेंट्स भी नहीं बच पाए जीएसटी के वार से, कॉपी-किताबों की कीमतें और बढ़ीं
महासमुंद. जीएसटी के असर से कॉपी और किताबों की कीमतों में उछाल आ गया है। मूल्य में करीब 10 से 15 फीसदी वृद्धि हुई है। इससे पालक चिंतित हैं। बताया जाता है कि कॉपी-पुस्तक निर्माण में 18 प्रतिशत जीएसटी लगने से प्रकाशकों ने मूल्य में इजाफा कर दिया है।
स्कूलों में नया सत्र शुरू हुए डेढ़ माह बीत चुके हैं। अधिकांश कॉलेजों में भी एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है। शहर में नए कॉलेज खुलने से विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ है। कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी आगामी दिनों में बढ़ी हुई कीमतों पर कॉपी, पुस्तक खरीदेंगे। बुक विक्रेताओं की मानें तो किताबों के दामों में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जिन कंपनियों ने कॉपी की कीमतों में कमी नहीं की है, उन्होंने कॉपियों से पेज कम कर दिए हैं। दुकानदारों से पालक व विद्यार्थी महंगे, कॉपी पुस्तक के दाम सुनकर बुक में कंसेशन देने की गुहार लगा रहे हैं। जीएसटी को भले ही सरकार कारगर मान रही हो, लेकिन स्थानीय पालक व व्यापारियों के गले नहीं उतर रहा है।
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11 वीं और 12 वीं कक्षा की हिंदी और अंग्रेजी की किताबें बाजार में नहीं मिल रही हैं। अधिकांश विद्यार्थी परेशान हैं। बुक स्टोर संचालक भी मंगाकर थक चुके हैं, पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो रही हैं। वहीं प्राइवेट प्रकाशन को लाभ दिलाने के मकसद से एनसीईआरटी की पुस्तकों को कम प्रकाशित किया जाता है, थक हार कर विद्यार्थी निजी प्रकाशन की पुस्तकें खरीदते हैं।
बुक स्टोर संचालक अखिलेश जैन ने कहा कि अब जो हम नई कॉपियां लेकर आ रहे हैं, वो 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़े हुए दर से आ रहे हैं। पुस्तक, कॉपी प्रकाशकों से जो सर्विस टेक्स लिया जा रहा है, यह उसका असर है। पूरे मार्केट में हिंदी अंग्रेजी की पुस्तक 11वीं, 12 वीं की नहीं है।
बुक स्टोर संचालक राजेश नसीने ने कहा कि कॉपी, किताबों के दाम 10 से 15 प्रतिशत बढ़ गए हैं। पिछले साल की अपेक्षा कुछ महंगे हैं। रफ कॉपी तक के रेट बढ़े हैं। 11 वीं और 12 वीं के जो पुस्तक विज्ञान के 900 रुपए में आ जाते थे, वे 1100 रुपए तक पहुंच रहे हैं।
Published on:
29 Jul 2018 04:03 pm
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