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गोठान और चारागाह के लिए गांवों का चिह्नांकन शुरू, फिर भेजेंगे प्रस्ताव

जिला पंचायत ने गांवों में गोठान और चारागाह के लिए तैयारी शुरू कर दी है। गांवों का चिन्हांकन किया जा रहा है।

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गोठान और चारागाह के लिए गांवों का चिह्नांकन शुरू, फिर भेजेंगे प्रस्ताव

महासमुंद. जिला पंचायत ने गांवों में गोठान और चारागाह के लिए तैयारी शुरू कर दी है। गांवों का चिन्हांकन किया जा रहा है। अफसरों के मुताबिक पहले चरण में १५ गांवों में गोठान और चारागाह बनाए जाएंगे। इससे मवेशी पालक और किसानों को सुविधा मिलेगी।

नरवा, गरवा, घुरुवा व बारी की योजना के क्रियान्वयन के लिए यह प्रयास है। इन योजनाओं का एक फायदा यह भी होगा कि गांवों में सरकारी जमीन कब्जों से मुक्त हो जाएगी। ज्ञात हो कि गांव-गांव में सरकारी जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। अतिक्रमण को हटाने पंचायतों को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। कब्जा हटाने अफसर भी ध्यान नहीं देते। अब इस योजना के कारण अफसर खुद कब्जा हटवाएंगे। जिला पंचायत के सीईओ ऋतुराज रघुवंशी ने बताया कि प्रथम चरण में १५ गांवों में गोठान व चारागाह की योजना बनाई गई है। सबसे पहले पांच विकासखंडों में २५ गांवों का चयन किया जाएगा।

फिर १५ गांवों का नाम फाइनल कर इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्यवाही होगी। बताया जाता है कि पंचायत स्तर पर चारागाह और गोठान से पशुधन के विकास के माध्यम से किसान व पशुपालकों को तो लाभ मिलेगा। योजना के तहत गोठान में वर्मी कम्पोस्ट की सुविधा विकसित करना है। इससे गोबर से खाद बनाई जाएगी। इस खाद का उपयोग किसान अपने खेतों में करेंगे। फिलहाल, शहर व गांव में गोठान नहीं होना बड़ी समस्या बन गई है। सरकारी जमीन पर कब्जे होने के कारण चारागाह भी खत्म होते जा रहे हैं। पशुओं को चारा-पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। यही वजह है कि किसान पशुपालन में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। ज्ञात हो कि चारा की व्यवस्था नहीं होने से किसान मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं। खासकर बारिश के दिनों में मवेशियों के कारण किसानों को ज्यादा नुकसान होता है।

पशुओं के स्वास्थ्य का भी रखा जाएगा ख्याल
योजना के मुताबिक गोठान में मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए तार बाड़ और शेड का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही पानी की व्यवस्था भी की जाएगी। पशु चिकित्सा विभाग के द्वारा समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण भी किया जाएगा। वर्तमान में मवेशियों को टीका लगाने के लिए विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को गांव-गांव घूमना पड़ता है। कई बार मवेशी टीकाकरण से छूट भी जाते हैं। गोठान में गांव के सारे मवेशियों के एक साथ मिल जाने से इनका एक साथ टीकाकरण किया जा सकेगा। इससे मवेशियों को कई गंभीर बीमारी और महामारी से बचाया जा सकेगा। फिलहाल गोठान और चारागाह बनाने की तैयारी शुरू हो गई। जमीनों का चिन्हांकन जारी है।