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फर्जी दस्तावेज के सहारे किसानों का करोड़ो रुपए हजम कर गए दलाल

कृषि उपज मंडियों में फर्जी किसानों के नाम से सौदा पत्रक काटने का खेल चल रहा है। नोटबंदी के बाद राइस मिलर्स और ट्रेडिंग कंपनी से जुड़े व्यापारी अपने कालेधन को खपाने में जुटे हैं

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deepak dilliwar

Jan 07, 2017

elephant reach in paddy procurement centre

elephant reach in paddy procurement centre

महासमुंद. कृषि उपज मंडियों में फर्जी किसानों के नाम से सौदा पत्रक काटने का खेल चल रहा है। नोटबंदी के बाद राइस मिलर्स और ट्रेडिंग कंपनी से जुड़े व्यापारी अपने कालेधन को खपाने में जुटे हैं। कृषि उपज मंडी के अधिकारी और कर्मचारियों से मिलीभगत कर फर्जी किसानों के नाम सौदा पत्रक कटवाने में लगे हैं। जबकि समर्थन मूल्य खरीदी के समय अधिकांश किसान धान कृषि उपज मंडी नहीं लाए।
फिर भी धान खरीदी के नाम पर सौदा पत्रक काटा गया। ये हाल किसी एक मंडी का नहीं बल्कि जिलेभर की अधिकांश मंडियों का है। जहां यह गोरखधंधा खूब फल-फूल रहा है।

पिछले वर्ष झलप में फर्जी राइस मिल और किसानों के नाम सौदा पत्रक काटकर एक करोड़ 76 लाख मात्र एक माह में ही अधिकारियों और कर्मचारियों ने पार कर दिया था। लेकिन अभी तक खाद्य विभाग के अफसर जांच प्रतिवेदन तक तैयार नहीं कर सके हैं। ऐसा ही प्रकरण झलप, बागबाहरा, सरायपाली, पिथौरा सहित अन्य कृषि उपज मंडियों में फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आई है।

साढ़े तीन प्रतिशत की खा रहे दलाली
बताते हैं कि व्यापारियों ने काला धन को सफेद करने के एवज में साढ़े तीन प्रतिशत दलाली मंडी कर्मचारी को अतरिक्त भुगतान किया गया है। ज्ञात हो की कृषि उपज मंडी समिति में वर्ष 2008 से समर्थन मूल्य लागू होने के बाद से धान का एक दाना नहीं आता था। हैरतवाली बात है कि किसानों का धान सीधे राइस मिल मेंं चला जाता है। बाद में राईस मिलर्स उसी धान के चावल को निकाल कर कस्टममिलिंग में देते हैं। इसमें सिर्फ कागजी खानापूर्ति ही की जाती है। मंडी समिति या खाद्य विभाग के अधिकारी कभी भी राइस मिल में स्टॉक का मिलान नहीं करते। सूत्रों के मुताबिक इस गोरखधंधे में अधिकारियों की भी मिली भगत है।

नोडल अधिकारी प्रकाश बिबे ने बताया कि ऐसी शिकायतें मिली हैं, जल्द ही राइस मिलर्स के स्टॉकों की जांच की जाएगी। इसके लिए मंडियों के अधिकारियों की बैठक बुलाया हूं। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। झलप में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े की जांच खाद्य विभाग कर रहा है।