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धान-मक्का नहीं अब मसाले की खेती के जरिए जिंदगी संवार रहे छत्तीसगढ़ के किसान, धनिया-मेथी उगा रहे

महासमुंद के किसान अब परपंरागत खेती-किसानी करने के बजाय मसाले की खेती करने में रुचि दिखा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की मदद से किसान न केवल अच्छी पैदावार कर रहे हैं बल्कि उन्हें उपज का अच्छा दाम भी मिल रहा है।

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धान-मक्का नहीं अब मसाले की खेती के जरिए जिंदगी संवार रहे छत्तीसगढ़ के किसान, धनिया-मेथी उगा रहे

धान-मक्का नहीं अब मसाले की खेती के जरिए जिंदगी संवार रहे छत्तीसगढ़ के किसान, धनिया-मेथी उगा रहे

महासमुंद. जिले के किसानों की रुचि मसालों की खेती में बढ़ी है। कम लागत में अच्छी पैदावर के साथ ही बाजारों से इसमें अच्छी आय भी हो जाती है। वहीं उद्यानिकी विभाग किसानों को मसालों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित व प्रेरित कर रहा है। लोगों की फूड हैबिट में काफी बदलाव हुआ है। लोग आज कल स्वाद के लिए चटपटा खाना पसंद करते हैं। इसलिए लोग खाने में मसालों का ज्यादा उपयोग करते हैं। वहीं मसाला कई बीमारियों छुटकारा भी दिलाता है।

उद्यानिकी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में वर्ष 2021-22 में 3023 हेक्टेयर में मसालों की खेती की गई। इससे करीब 32838 एमटी मसालों का उत्पादन हुआ है। इसमें करीब 497 हेक्टेयर में हल्दी की खेती की गई थी। 2982 एमटी हल्दी का उत्पादन हुआ। 432 हेक्टेयर में लाल मिर्च, 33 हेक्टेयर में मेथी, 338 हेक्टेयर में धनिया, 328 हेक्टेयर में लहसून, 1395 हेक्टेयर अन्य मसालों की खेती की गई। इसमें 5441 एमटी लाल मिर्च, 160 एमटी मेथी, 2356 एमटी धनिया, 3772 एमटी लहसून, 18127 एमटी अन्य मसालों का उत्पादन हुआ है। उद्यानिकी विभाग की मोनिका ने बताया कि वर्ष 2021-22 में 3023 हेक्टेयर में मसालों की खेती की गई। इससे करीब 32838 एमटी मसालों का उत्पादन हुआ है। किसानों को मसाले की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
छत्तीसगढ़ सरकार आगे बढ़ा रही
छत्तीसगढ़ सरकार परम्परागत खेती के अलावा किसानों को कैश क्राप की ओर से आगे बढ़ा रही है। इस काम में उद्यानिकी विभाग किसानों की मदद कर रहा है। सरकार की ओर से इसे प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हंै। इनमें बीज और ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इतना ही नहीं किसानों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। यही कारण है कि महासमुंद में किसान न केवल धनिया, मेथी की खेती कर रहे हैं बल्कि धनिया और अदरख की खेती करने में भी आगे दिख रहे हैं।