
यहां घरों और शहर के कचरे से बनाया जाता है खाद, मूल्य है 5 रु प्रति किलो
जानकारी के मुताबिक घरों से निकलने वाला कचरा सफाई मित्रों के जरिए एसएलआरएम सेंटर पहुंचता है। कचरा की छंटाई होती है। फिर इससे खाद बनती है। नपा के जिम्मेदारों के मुताबिक खाद को तैयार होने में 70 से 80 दिन लगते हैं। वर्तमान में मांग नहीं होने पर खाद का संग्रहण किया जा रहा है। जरूरत पडऩे पर इसका उपयोग किया जाएगा।
गौरतलब है कि स्वच्छता रैंकिंग में कचरा उठाने के साथ ही खाद बनाने और बेचने के भी अंक मिलते हैं। जानकारी के मुताबिक 9 रिक्शा और दो छोटा हाथी वाहन में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन कर तुमाडबरी, खरोरा और भलेसर रोड के एसएलएआरएम सेंटर पहुंचाया जाता है। इन तीनों जगहों पर कंपोजिंग यूनिट बनाई गई है। सिर्फ तुमाडबरी में ही खाद बन रही है।
कचरे में प्लास्टिक, कांच के आइटम ज्यादा होते हैं। इस वजह से इसे कबाड़ में बेच दिया जाता है। 80 प्रतिशत कचरा वेस्ट होता है। खाद बनने के लिए उपयोगी कचरा कम ही मिल पाता है। इस वजह से भी परेशानी होती है। प्रतिदिन 5 टन कचरा आता है।
सेंटर प्रभारी रमा महानंद ने बताया कि खाद अभी तैयार हो रहा है। इसे बनने में समय लगता है। कुछ लोग लेने के लिए आते हैं , लेकिन इसे पर्याप्त बाजार नहीं मिल रहा है।
Published on:
27 Oct 2018 04:37 pm
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