
लगातार हो रहे हादसों के बाद भी खटारा स्कूल वाहनों में पहुंच रहे बच्चे, आरटीओ और यातायात पुलिस ने नहीं की जांच
महासमुंद. छत्तीसगढ़ में आरटीओ और यातायात पुलिस ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया है। खटारा वाहनों में बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं। पिछले वर्ष स्कूल वाहनों की जांच हुई थी, इस बार की जांच का अता-पता नहीं है। बच्चे रोज इन वाहनों से स्कूल पहुंच रहे हैं, पर वाहनों की स्थिति क्या है, यह जांचने के लिए आरटीओ और यातायात पुलिस के पास समय नहीं है।
महासमुंद जिले में निजी स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए बस, वैन और अन्य वाहनों की व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक जिले के निजी स्कूलों में करीब 67 बसें चल रही हैं। अधिकतर गाडिय़ां सरायपाली, बसना और पिथौरा की निजी स्कूलों की हैं। महासमुंद के निजी स्कूलों में सिर्फ 10 या 12 बसों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा ऑटो, वैन और अन्य वाहन अलग हैं। बसों का फिटनेस ओके है या नहीं, गाडिय़ां सड़क पर चलने लायक हैं या नहीं, इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है। यही वजह है कि मनमर्जी चल रही है।
इस संबंध में यातायात विभाग का कहना है कि पांचों ब्लॉकों में स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच के लिए शिविर लगाएं जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार जो मापदण्ड निर्धारित किए गए हैं, उसके अनुसार वाहनों की जांच कर फिटनेस प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। वहीं यातायात विभाग के पास छोटे वाहनों के बारे में कोई रिकार्ड नहीं है। विभाग का कहना कि ऐसे वाहनों की समय-समय पर जांच की जाती और गड़बड़ी पाए जाने पर जुर्माना और जब्ती की कार्यवाही भी की जाती है।
क्या कहती है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन
बसों के पीछे स्कूल का इमरजेंसी नंबर लिखा हो
यातायात प्रभारी एसआर घृतलहरे ने बताया कि आरटीओ और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर स्कूलों में वाहनों की जांच की जाएगी। वाहनों किसी तरह की खामियां पाई जाती हैं, तो उसे दुरुस्त करने को कहा जाएगा। फिटनेस जांच शिविर जल्द लगाया जाएगा।
Published on:
12 Jul 2018 05:25 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
