
धान के खेत में हार्वेस्टर
महासमुंद. इस समय धान फसल की मिंजाई का काम तेजी से चल रहा है। बड़े किसान और अधिक खेत रखने वाले किसान हार्वेस्टर की मदद से मिंजाई का काम कर रहे हैं। किसानों को यह नयी पद्धति सरल और सुविधाजनक लगने लगी है। श्रमिकों की कमी के कारण भी किसान पुरानी पद्धति को छोड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, सरगुजा समेत तमाम जिलों में आज कल खेतों में हार्वेस्टर ही हार्वेस्टर नजर आ रहे हैं। अंचल में इन दिनों धान की कटाई-मिंजाई जोरों पर चल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी दर बढ़ने से क्षेत्र के किसान आधुुनिक पद्धति अपनाकर धान की कटाई-मिंजाई करवा रहे हैं। इससे किसानों का समय व पैसा बच रहा है।
महासमुंद जिले के लवन से दो किमी दूर स्थित ग्राम कोरदा में इन दिनों हार्वेस्टर से धान की कटाई-मिंजाई जोरो पर चल रही है। गांव के किसान जोगेंद्र वर्मा, नरेन्द्र वर्मा, मृत्युजंय वर्मा, रोमलाल वर्मा सहित अन्य किसान भी हार्वेस्टर के माध्यम से ही धान की कटाई करवा रहे हैं। हार्वेस्टर में प्रति एकड़ कटाई-मिंजाई 2200 से 2400 रुपए चल रहा है। जिसमें धान अलग व पैरा अलग हो जाता है। कोरदा के ही किसान मृत्युजंय वर्मा का कहना है कि इस वर्ष धान की फसल तो जल्दी तैयार हो गया था, लेकिन जमीन में नमी होने के चलते खेत तक हार्वेस्टर नहीं पहुंच पाया। हार्वेस्टर नहीं पहुंच पाने की वजह से मजदूरों के माध्यम से प्रति एकड़ 3000-3300 रुपए के हिसाब से ठेका देकर धान की कटाई करवाई है। वर्मा ने बताया कि हार्वेस्टर मालिक एक जगह ज्यादा एकड़ होने पर ही पहुंच पाता है। एक एकड़ तक के खेत में नहीं पहुंच पाता है, इसलिए अधिकतर किसान मजदूरों से धान की कटाई करा रहे हैं। सभी किसानों का खेती कार्य एक साथ चलने की वजह से मजदूर नहीं मिल पा रहा है।
हार्वेस्टर का ही सहारा ले रहे
कोरदा के किसान जोगेन्द्र वर्मा ने बताया कि पुराने तरीके से समय के साथ-साथ रुपए अधिक लग जाता है। फसल को एक साथ कटाई करने के लिए हार्वेस्टर का ही सहारा ले रहे हैं, तो वहीं जिन किसानों ने मजदूरों से फसल की कटाई करवाई है उनको थ्रेसर मशीन से कटाई-मिंजाई की जा रही है। पुरानी पद्वति में लोग सुबह 5 बजे से ही उठकर परिवार के साथ बैलों को फांदकर मिंजाई करते थे, जिससे रात हो जाती थी। किसानों का मानना है ऐसी पद्धति से समय बर्बाद होता है। वहीं 2-3 एकड़ से कम जमीन में फसल लेने वाले किसान मजदूरों के माध्यम से ही फसलों की कटाई करा रहे हैं, वही कुछ किसान फसल को खलिहान में मिंजाई करेंगे। वहीं अधिकांश किसान थ्रेसर मशीन से धान की मिंजाई करा रहे हैं।
Published on:
29 Nov 2022 01:24 pm
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