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CG State Information Commission में सचिव ने दिया झूठा बयान, जांच में खुलासे के बाद दी गई अब इतनी बड़ी सजा

सूचना आयोग (CG State Information Commission) में सचिव के द्वारा जानबूझकर झूठा बयान दिया गया है। इस कारण सचिव संकीर्तन बरिहा को तत्काल निलंबित कर दिया।  

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Chhattisgarh State Information में सचिव ने दिया झूठा बयान, जांच में खुलासे के बाद दी गई अब इतनी बड़ी सजा

File Photo

महासमुंद/ बसना. केंद्र व राज्य सरकार के प्रयास से आजकल सूचना का अधिकार शासकीय सूचनाएं लेने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। लोगों को सूचनाएं मिल भी रहीं हैं लेकिन कई बार आवेदकों को सही सूचनाएं नहीं दी जाती हैं और उन्हें गुमराह किया जाता है। ऐसा ही पंचायत सचिव ने किया और फिर उसे निलंबित कर दिया गया। छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग ((CG State Information Commission) में जुर्माना से बचने के लिए और विभागीय जांच में गुमराह करने की नीयत से झूठा बयान देना अतत: जनसूचना अधिकारी को मंहगा पड़ गया। मामले में गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुंद ने सचिव संकीर्तन बरिहा को अपने प्रभाव से तत्काल निलंबित कर दिया।

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(CG State Information Commission news : जानकारी के अनुसार पिथौरा जनपद पंचायत के अन्तर्गत ग्राम पंचायत भतकुंदा में पदस्थ सचिव संकीर्तन बरिहा के द्वारा सूचना आयोग (CG State Information Commission) में 2 दिसम्बर 2020 को लिखित में बयान दिया कि उसे आवेदक का सूचना आवेदन और प्रथम अपील पारित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। जिस पर आवेदक ने सुनवाई में आपत्ति की। इस कारण मुख्य सूचना आयुक्त ने धारा 20(2) के तहत सीईओ जिला पंचायत महासमुंद को इस प्रकरण का जांच करने का आदेश दिया था। आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने इस मामले की उच्च स्तरीय अधिकारियों से साक्ष्य सहित लिखित शिकायत की। उच्चाधिकारियों के निर्देश से जनपद पंचायत पिथौरा में जांच हुई। जांच में शिकायत पूर्णत: सही पाया गया।

Chhattisgarh State Information news : जांच के दौरान सचिव ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उसे प्रथम अपील सूचना पत्र और प्रथम अपील पारित आदेश प्राप्त हुआ है। पावती पंजी में भी उसी का हस्ताक्षर है। जांचकर्ता अधिकारी ने 10 फरवरी 2022 को अपने उच्चाधिकारियों को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया कि सूचना आयोग में झूठा बयान सचिव के द्वारा जानबूझकर दिया गया है। इस कारण सचिव के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। हैरान कर देने वाली बात यह है कि जिला पंचायत महासमुंद से त्रिसदस्यीय दल का गठन कर जब पुन: जांच की गई तो 22 सितम्बर 2022 के नोटिस के जवाब में सचिव संकीर्तन बरिहा ने पूर्व में दिए लिखित बयान से मुकर कर जपं के बाबू पर ही आरोप मड़ दिया। उसने आरोप लगाया कि बाबू ने बाद में उससे पंजी में हस्ताक्षर कराया है।

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