महोबा. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के तमाम निर्देशों के बाबजूद बुन्देलखंण्ड में तैनात प्रशासनिक तंत्र सुधरने का नाम नही ले रहा है । सूखे और आकाल से परेशान किसानों को जहाँ सरकार फसल ऋण मोचन योजना के द्वारा मदद देकर जीवन-यापन करा रही है तो वही महोबा की कुलपहाड़ तहसील में तैनात लेखपाल ने रिश्वत के 2 सौ रुपये न मिलने से एक एकड़ के किसान की प्रति माह आय 1 लाख 62 हजार से और सालाना आय 19 लाख 68 हजार दिखाकर किसान सहित प्रशासनिक अधिकारियों को सकते में हैरत में डाल दिया है । फिलहाल डीएम ने मीडिया की पहल के बाद आरोपी लेखपाल को निलंबित करने के आदेश दिए है ।
बुन्देलखंण्ड के महोबा के हालातों से सभी राजनैतिक दल वाकिफ है मगर यहां के हालातों को बदलने में सरकार की दिलचस्पी न के बराबर रही है । प्रकृति की मार से साल दर साल बिगड़ते हालातों ने सरकारों को कटघरे में खड़ा कर दिया है । नतीजतन योगी सरकार बुन्देखण्ड से जुड़ी हर खबर पर टकटकी लगाए बैठी है । यहीं नहीं बीजेपी सरकार बुंदेलखंड में बढ़ती बदहाली के लिए चिंतित है शायद यहीं वजह है कि यहाँ के बाशिंदों को हर मदद देने की न केवल पहल कर रहे है बल्कि बढ़ती रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने के भी निर्देश दिए गए है लेकिन रिश्वतखोरी सरकारी मशीनरी में इस कदर हावी है कि ये सुधरने का नाम नहीं ले रहे है । एक बार फिर रिश्वतखोरी का शिकार हुआ है एक मजबूर और मजदूर किसान । कुदरत के कहर से परेशान किसान जहाँ एक ओर दो वक्त की रोजी रोटी के लिए हाड़तोड़ मेहनत कर अपना गुजर बसर कर रहा है और प्रशासनिक मशीनरी की ओर सरकार की सहायता राशि की हर पल मदद की आस लगाए बैठे हैं तो वही महोबा के कुलपहाड़ तहसील में तैनात लेखपाल हरीबहादुर यादव ने महज 200 रुपये की रिश्वत न मिलने पर बेदो गांव में रहने वाले मजदूर किसान धनीराम उर्फ धनिया को एक माह में 1 लाख 62 हजार 500 रुपये की आय दर्शाकर सालाना आमदनी 19 लाख 50 हजार दिखा दी है ।
दरअसल मजदूरी कर जीवन यापन कर पेट पालने वाले इस किसान ने अपने बेटे दीपू को अफसर बनाने का सपना देखा था । और दिन रात मेहनत करके अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर बड़ा किया था । आज जब रेलवे का फार्म भरने के लिए किसान को आय प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ी तो किसान ने आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया । किसान का आरोप है 200 रुपये की रिश्वत न मिलने पर लेखपाल ने किसान का आय प्रमाणपत्र 19 लाख 50 हजार रुपये का बना दिया । किसान के बेटे को मिले इस सरकारी कागज ने किसान परिवार सहित प्रशासनिक आलाधिकारियों को हिलाकर रख दिया है । फिलहाल किसान परिवार ने परेशान होकर डीएम महोबा से न्याय की गुहार लगाई है । लेखपल की इस करतूत से गरीब परिवार का एक होनहार फिर नौकरी से वंचित रह गया । यदि उसे सही आय प्रमाण पत्र मिल जाता तो शायद उसकी रेलवे में नौकरी लग जाती और परिवार का भविष्य सुधर जाता है । पीड़ित किसान धनीराम बताता है कि उसके परिवार में सिर्फ एक एकड़ भूमि है मगर वो अभी भी भूमिहीन है । इसलिए परिवार को पालने के लिए मजदूरी करता है । इसी मजदूरी से उसने अपने बड़े बेटे दीपू को पढ़ाया लिखाया ताकि उसका भविष्य अंधकारमय न हो जाये । लेकिन उसकी मेहनतों पर रिश्वतखोरी ने पानी फेर दिया है ।
बूढ़े बाप का सहारा बनने का सपना देख रहे दीपू को नहीं पता था कि लेखपाल को रिस्वत के 2 सौ रुपये न देने पर वो सरकारी नौकरी से वंचित हो जाएगा । दीपू बताता है कि उसके परिवार के हालात बेहद खराब है वो अपने पिता के साथ मिलकर गांव में मजदूरी करता है । और साथ ही पढाई भी करता था । उसके परिवार की इतनी गरीबी है कि अगर एक दिन मजदूरी न मिले तो घर में चूल्हा भी नहीं जलता । उसे उम्मीद थी कि नौकरी मिलने पर वो अपने परिवार की आर्थिक स्तिथि को सुधार लेगा । मगर लेखपाल की करतूत से वो फिर मजदूरी करने के लिए मजबूर हो गया है ।
इस पुरे मामले में मीडिया द्वारा दखल देने पर आखिर कार डीएम महोबा सहदेव ने गंभीरता दिखाई और आरोपी लेखपाल के खिलाफ जाँच बाद कड़ी कार्रवाई किये जाने के आदेश तहसीलदार कुलपहाड़ को दिए है । डीएम ने बताया कि ये मामला गंभीर है लेखपाल की इस हरकत से एक छात्र का भविष्य बर्बाद हुआ है इसे गंभीरता से लिया जाएगा और लेखपाल के खिलाफ निलंबन सहित बड़ी कार्रवाई अमल में आई जायेगी ।