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इस बाहुबली के बेटे ने दिया संकेत, पूर्वांचल में एक बार फिर गैंगवार की संभावना बढ़ी

पूर्व में ठाकुर ब्राह्मणों की जंग अब ब्राह्मण- ब्राह्मण के बीच सिमटी

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aman mani tripathi

अमनमणि त्रिपाठी

यशोदा श्रीवास्तव
महराजगंज. जिले के नौतनवां विधानसभा सीट के विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने विधानसभा में स्वयं के जान का खतरा बता कर पूर्वांचल में एक फिर गैैंगवार की संभावना के संकेत दे दिए है। सरकार ने भी उनकी जान माल की हिफाजत का भरोसा देकर संभवतः उनके अंदेशों पर यकीन कर लिया है। अमन मणि पूर्व मंत्री और सजायाफ्ता अमर मणि के पुत्र हैं। वे नौतनवां से निर्दल विधायक हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कृपापात्र हैं।


सवाल उठता है कि विधानसभा में पूर्ण बहुमत के बाद एक निर्दल विधायक को स्वयं सीएम द्वार इतना महत्व मिलने की वजह क्या हो सकती है। अमनमणि कहने के लिए एक निर्दल विधायक हैं लेकिन अपरिहार्य कारणों से वे सीएम योगी के लिए महत्वपूर्ण है। बता दें कि गोरखपुर कभी पूर्वांचल की राजनीति का मुख्य केंद्र हुआ करता था। राजनीतिक वर्चस्व को लेकर ही यहां ठाकुर और ब्राम्हणों के बीच खूनी प्रतिस्पर्धा की शुरूआत गोरखपुर यूनिवर्सिटी के तत्कालीन वीसी सूरतमणि त्रिपाठी तथा गोरखपुर मंदिर के तत्कालीन महंत दिग्विजय नाथ के काल में हुई जो हरिशंकर तिवारी तथा योगी आदित्यनाथ के काल तक जारी है।

पूर्व में स्व. वीरेंद्र शाही और हरिशंकर के बीच की प्रतिस्पर्धा में ऐसी मार काट हुई कि इस शहर को अपराध जगत का शिकागो तक कहा गया। बाद के दिनों में ठाकुर और ब्राह्मणों के बीच की प्रतिस्पर्धा को गैंगवार के रूप में देखा जाने लगा। इसमें एक पूर्व विधायक रविद्र सिंह सहित दोनों और से कई जानें जा चुकी है। दोनों के बीच गोली बारी की घटनाएं यदा कदा होती रहती है। एक दारोगा के पुत्र अमरमणि त्रिपाठी हरिशंकर खेमे के प्रमुख सदस्य रहे हैं। वे उनके साथ लंबे वक्त तक रहे तथा कई खेमबंदियों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

इधर कुछ साल पहले संभवतः नौतनवां की राजनीति को लेकर अमरमणि और हरिशंकर तिवारी में अनबन हो गई जो एक दूसरे के कट्टर दुश्मन के रूप चर्चा में है। इधर अमरमणि की सजा होने के बाद उनका राजनीतिक किला ध्वस्त होने के करीब आ गया। परिवार में उनका राजनीतिक विरासत संभालने वाले को लेकर चिंता होने लगी। भाई अजीत मणि को राजनीति में सक्रिय करने का फार्मूला विफल हो गया तो इकलौते पुत्र अमनमणि पर दांव लगाया गया। 2012 के पहले चुनाव में अमनमणि को सपा के टिकट पर हार देखना पड़ा। इधर पिता की तरह उन पर भी अपनी पत्नी सारा की हत्या के इल्जाम से दो चार होना पड़ा। हरिशंकर तिवारी से अलग होकर राजनीति में मुकाम हासिल करना संभव नही था।

विधानसभा का चुनाव संपन्न होने के बाद योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराज हुए। इसके तुरंत बाद बलिया के एक शातिर अपराधी की तलाश में गोरखपुर हरिशंकर तिवारी के आवास पर पुलिस का छापा पड़ गया। हरिशंकर तिवारी के छोटे पुत्र विनय शंकर तिवार चिल्लुपार से बसपा विधायक है। पुलिस के छापा को पूर्वांचल के ब्राम्हणों पर सरकार के इशारे पर अपमान के रूप में प्रचारित किया गया। गोरखपुर में विशाल धरना पर्दशन कर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा गया और योगी को ब्राम्हण विरोधी बताया गया।
इसके पहले अमरमणि योगी खेमे में प्रवेश कर चुके थे। हरिशंकर तिवारी खेमे की ओर से योगी पर लांछन के बाद अमनमणि खुल कर उनके साथ आ गए। इसके पहले योगी के हर कार्यक्रम में अमनमणि का शिरकत होना जारी रहा। अमन मणि के अलावा गोरखपुर विश्वविद्वालय के छा़त्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शीतल पांडेय योगी के प्रतिनिधि रहे है। शीतल पांडेय अब सहजनवा से भाजपा विधायक है। शीतल पांडेय की छवि आम तौर पर दाग दार नहीं है लेकिन अमन मणि या अमरमणि की छवि दागदार है। अब एक दागदार निर्दल विधायक को प्रश्रय देने के पीछे योगी की मंशा स्वयं को ब्राम्हण विरोधी छवि से उबरना है।

अमन मणि योगी के शरण में इस कदर है कि नौतनवां स्थित उनका कार्यालय पूरी तरह भगवा रंग में रंगा हुआ है। विधानसभा में अमनमणि के स्वयं पर खतरा बताया जाना और संसदीय कार्य मंत्री का खुलकर उनके पक्ष में खड़ा होना इस बात के साफ संकेत है कि सरकार का अमनमणि के प्रति कहीं न कहीं साफ्ट कार्नर है। अब हरिशंकर तिवारी खेमा अमनमणि द्वारा विधानसभा में उनके नाम का खुलकर उल्लेख करने को किस रूप में लेता है यह देखने की बात होगी।