हालात से क्यों हारें हमारे सितारे!
आगरा। एक ऐसी खिलाड़ी जो अब कोचिंग पढ़ाकर पूरा कर रही है सपना। देश के लिए जीती उसने राष्ट्रीय चैंपियनशिप ट्रॉफी। लेकिन, सरकार की व्यवस्था से हारकर अब बैठ गई घर। वॉलीबाल कोर्ट में वो अपने हुनर से विपक्षियों को पस्त करती हैं, लेकिन अब सरकार की व्यवस्था ने उसे पस्त कर दिया है। जी हां उस खिलाड़ी का नाम है पूजा भदौरिया। मैनपुरी की रहने वाली देश की ये बेटी वॉलीबाल के क्षेत्र में राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत चुकी है। अब घर में बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर अपना समय काटने को मजबूर है।
वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुकी हैं पूजा
मूल रूप से कुर्रा और वर्तमान में मैनपुरी आश्रम रोड के रहने वाले विजय बहादुर भदौरिया की दो बेटी और एक बेटा है। उनकी एक बेटी अब इस दुनिया में नहीं है। विजय भदौरिया का एक बेटा है, जो उनके काम में हाथ बंटाता है। वहीं एक बेटी पूजा भदौरिया है, जो कि अब घर पर ही रहती है। किसी समय राष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी है। लेकिन, हालात को कुछ और ही मंजूर था, जो पूजा अब बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर अपना सपना पूरा करने का प्रयास कर रही है। पत्रिका टीम से बात करते हुए पूजा ने पहले तो अपनी काबलियत के प्रमाण पत्र दिखाए, बाद में बताया कि उसका वॉलीबाल के प्रति बचपन से ही आकर्षण था। साल 2009 से उसने इस खेल को अपना कैरियर बना लिया और फिर इस खेल में एक से बढ़कर एक सफलता हासिल की। यहां तक कि राष्ट्रीय चैंपियनशिप ट्रॉफी भी जीती। लेकिन आज पूजा को जिस बुलंदी ओर होना चाहिए था, वो हालात ने उसको वहां पहुंचने नहीं दिया।
आर्थिक तंगी से हासिल नहीं कर सकी मुकाम
पूजा ने बताया कि आर्थिक तंगी और घर के हालात के साथ मैनपुरी जनपद में खेल का कोई संसाधन न होना कोई कोच न होने के कारण उसे वो मुकाम नहीं मिल पाया, जो उसे मिलना चाहिए था। हालांकि उसके परिवार ने उसका जितना हो सका पूरा सहयोग किया। पूजा ने ये भी बताया कि आज तक वो जिस जगह पहुंची है वो उसके घर वालों की ही देन है। लेकिन, बावजूद इसके आज पूजा को जिस मुकाम पर पहुंचना चाहिए, था वो नहीं पहुंच पाई है।