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SIR नोटिस में देरी पर डिंपल यादव सख्त, मैनपुरी डीएम से कार्रवाई की मांग

मैनपुरी में SIR के दूसरे चरण की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर सांसद डिंपल यादव ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है। उन्होंने नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी करने और उनके निस्तारण में धीमी गति पर सवाल उठाते हुए कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार की मांग की है।

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द्वितीय चरण में नोटिस जारी करने और निस्तारण में तेजी लाने की मांग, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

द्वितीय चरण में नोटिस जारी करने और निस्तारण में तेजी लाने की मांग, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Dimple Yadav :  जनपद मैनपुरी में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के द्वितीय चरण में हो रही देरी को लेकर मैनपुरी की सांसद श्रीमती डिंपल यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिलाधिकारी, मैनपुरी को पत्र लिखकर नोटिस जारी करने और उनके निस्तारण की धीमी प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्तमान कार्यप्रणाली न केवल अत्यंत असंतोषजनक है, बल्कि इससे पूरे SIR अभियान का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है।

दस दिन की देरी से शुरू हुआ कार्य

अपने पत्र में सांसद डिंपल यादव ने उल्लेख किया है कि जनपद में SIR के दूसरे चरण के अंतर्गत नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी करने का कार्य लगभग दस दिन की देरी से प्रारम्भ किया गया। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि इस देरी के कारण हजारों मतदाताओं के मामलों का समय पर निस्तारण मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मतदाता सूची से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य में समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा संबंध लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिकों के मताधिकार से जुड़ा हुआ है।

बेहद धीमी गति से जारी हो रहे नोटिस

सांसद ने पत्र में वर्तमान व्यवस्था का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि प्रत्येक सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (AERO) द्वारा प्रतिदिन औसतन केवल 150 नोटिस ही जारी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही इन नोटिसों के निस्तारण के लिए एक सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है।

डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि इस सीमित गति से जनपद के सभी नो-मैपिंग मतदाताओं के मामलों का समय पर निस्तारण कैसे संभव होगा। उन्होंने कहा कि यदि यही प्रक्रिया जारी रही, तो SIR अभियान अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाएगा और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

“कार्यप्रणाली पूर्णतः असंतोषजनक”

पत्र में सांसद ने प्रशासन की कार्यशैली पर सीधी टिप्पणी करते हुए लिखा कि वर्तमान कार्यप्रणाली पूर्णतः असंतोषजनक है। उन्होंने कहा कि SIR जैसा महत्वपूर्ण अभियान केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, इसके लिए प्रशासन को गंभीरता दिखानी होगी। डिंपल यादव ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती है।

AERO की संख्या बढ़ाने की मांग

सांसद ने समस्या के समाधान के लिए ठोस सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (AERO) की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए, ताकि नोटिस जारी करने और उनके निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही उन्होंने कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए प्रतिदिन अधिक संख्या में नोटिस जारी करने और उनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने की मांग की है। सांसद ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रशासनिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है।

तत्काल कार्रवाई की अपील

डिंपल यादव ने अपने पत्र के अंत में जिलाधिकारी से इस पूरे मामले में तत्काल प्रभाव से ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि SIR अभियान निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पूरा हो सके।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा

सांसद का यह पत्र सामने आने के बाद मैनपुरी के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताते हुए जिला प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है। वहीं, कुछ स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी सांसद की चिंता को जायज बताते हुए SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।

मतदाताओं में चिंता

SIR के तहत नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस मिलने में हो रही देरी को लेकर आम मतदाताओं में भी चिंता देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि समय पर सूचना न मिलने के कारण वे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन समय रहते सक्रिय नहीं हुआ, तो बड़ी संख्या में मतदाताओं को अनावश्यक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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