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सपेरों के इस गांव में जिंदगी बनी जहर, आजादी के 70 साल बाद भी इनके हिस्से में है सिर्फ भीख और सांप

यहां लोग अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, अध्यापक या आईएएस, आईपीएस बनाने का सपना नहीं देखने बल्कि उसके पैदा होते ही उसे भिखारी या सपेरा बनाना तय कर देते हैं।

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सपेरों के इस गांव में जिंदगी बनी जहर, आजादी के 70 साल बाद भी इनके हिस्से में है सिर्फ भीख और सांप

मैनपुरी। 21वीं सदी में भी अगर आपको कहा जाए कि लोग बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों से भी दूर हैं तो आपको अचरज होगा लेकिन उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में एक ऐसा गांव है जहां के लोग आज भी विकास और सरकारी योजनाओं से कोसों दूर हैं। इन लोगों ने हालात और मजबूरी को ही अपना भाग्य और भविष्य मान लिया है, इसीलिए ये अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, अध्यापक या आईएएस, आईपीएस बनाने का सपना नहीं देखने बल्कि उसके पैदा होते ही उसे भिखारी या सपेरा बनाना तय कर देते हैं।

विकास से कोसों दूर

सुनकर भले ही आपको यह अजीब लग रहा हो लेकिन ये सच है। मैनपुरी जिले के बेवर थाना क्षेत्र के नगला दरबारी नाम के गांव की यह हकीकत है। इस गांव का नाम भले ही ‘दरबारी’ है लेकिन किसी राजा या राजनेता की कोई ‘नीति’ इनको मुख्यधारा में जोड़ने के लिए नहीं बनी। यही कारण है कि लगभग 30-35 परिवारों के इस गांव में किसी के पास पक्का मकान नहीं है। टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है। स्कूल नहीं है। अस्पताल नहीं है। बिजली नहीं है। सड़क भी नहीं है और तो और इनके मकानों में दरवाजे तक नहीं हैं।

पढ़ना नहीं, सांप पकड़ना सीखते हैं

इस गांव के लोगों ने इसे भाग्य मान लिया है। इसीलिए गांव के सभी लोग भीख मांग कर या सांपों का खेल दिखा कर अपना पेट भरते हैं। गांव के प्रति व्यक्ति की आय लगभग 100 रुपए ही रहती है। यहां बच्चों को पढ़ाने लिखाने की बजाय शुरू से ही भीख मांगने या सांप पकड़ने में पारंगत किया जाता है। गांव में स्कूल तो नहीं है लेकिन बच्चों को सांप पकड़ना सिखाने के लिए एक पाठशाला जरूर खोल रखी है।