
6वीं-8वीं के 37 फीसदी बच्चोंं को अब तक नहीं अक्षरज्ञान
मंडला। वर्तमान में शिक्षा का जो रूप देखने को मिल रहा है वह बहुत ही चिंताजनक है। हाल ही में प्रथम संस्था द्वारा जारी सर्वेक्षण रिपोर्ट असर 2018 (एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट)" ने ग्रामीण भारत में स्कूली शिक्षा और बुनियादी शिक्षण पर केन्द्रित वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की है। सेन्टर ऑफ डिस्कवरी फॉर विलेज डेवलपमेंट, मंडला ने मंगलवार को एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट (असर-2018) की रिलीज के कार्यक्रम में शिक्षा विभाग से मुख्य अतिथि हिरेन्द्र वर्मा एपीसी केके उपाध्याय, असर सेंटर भोपाल से श्याम कुमार कोलारे और मंगेष नागपुरे उपस्थित थे। संस्था से फिरोज अहमद खान ने बताया कि जिले के रेंडमली 30 गाँव को सर्वेक्षण में शामिल किया गया था। जिसमे 3-16 आयुवर्ग के बच्चो का सर्वेक्षण शामिल किया गया था। 5-16 वर्ष के बच्चो से बुनियादी हिन्दी, गणित में दक्षता के बारे में जाना गया था। असर सर्वे से प्राप्त डेटा के बारे मे विस्तार से बताया कि इसे सटीक बनाने के लिए 3 दिवसीय स्वयंसेवको का प्रशिक्षण, मॉनिटरिग, फोन रिचेक, फील्ड रिचेक, रिसर्वे आदि प्रोसेस से गुजरना होता है। विशिष्ट अतिथि डॉ नसीम बानो ने शिक्षा की इस रिपोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट से शिक्षा की वास्तविक स्थिति जानने को मिला श्याम कोलारे ने रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण करते हुए बताया कि मंडला जिले के माध्यमिक शाला के 37 फीसदी बच्चे दूसरी कक्षा स्तर का पाठ नहीं पढ़ पाते है। जिला में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में पढऩे के स्तर सुधार हुआ है, कक्षा 3-5 में कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ लेने वाले बच्चों की संख्या 2016 में 43.7 प्रतिशत थी जो वर्ष 2018 में बढकर 45.8 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2018 में माध्यमिक स्कूल (कक्षा 6-8) के 63 प्रतिशत बच्चे कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ पा रहे है। अभी भी 37 प्रतिशत बच्चे अपनी कक्षा के 6 साल पहले की कक्षा का पाठ नहीं पढ़ पा रहे है और बगैर पढऩे की बुनियादी दक्षता हासिल किये अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण किये जा रहे है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ने संबोधन दिया, कहते हैं कि नींव जितनी मजबूत होगी, इमारत उतनी ही बुलंद होगी। नींव से इमारत बनने की इस प्रक्रिया में कई तत्व सहायक की भूमिका अदा करते हैं। शिक्षा किसी भी देश के लिये उसकी विरासत, उसकी राष्ट्रीय शिक्षा यानि महज पढऩा-लिखना-साक्षर होना भर नहीं हैं बल्कि यह व्यक्ति के लिये बौध्दिक विकास के सुअवसर प्रदान करने का एक माध्यम है। इसके लिए सभी जिम्मेदारों को सजकता से कार्य करने की आवश्यकता है। तभी कुछ अच्छे परिणामो की अपेक्षा की जा सकती है। कार्यक्रम में सभी 30 स्वयंसेवक को प्रमाण पत्र वितरित किया गया। डॉ गजेन्द्र गुप्ता ने मंच का संचालन किया। अंत में संस्था की अध्यक्ष मेघा कुशवाहा ने सभी का आभार प्रदर्शन किया।
Published on:
28 Feb 2019 05:08 pm
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