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25 पैसे में मिलता था एक समोसा 24 घंटे खुलती थी दुकान

अब यादव होटल के खोबे के पेड़े भा रहे लोगों को

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25 पैसे में मिलता था एक समोसा 24 घंटे खुलती थी दुकान

25 पैसे में मिलता था एक समोसा 24 घंटे खुलती थी दुकान

मंडला. 60 साल पहले चाय और चना के लिए पहचान रखने वाले यादव होटल में इन दिनो मावा के पेड़े की मांग बढ़ गई है। लोग नाश्ता करने पहुंचते हैं तो मीठे में समोसा के साथ पेड़े की मांग करते हैं। जबलपुर-मंडला मुख्य मार्ग में बिंझिंया ग्राम पंचायत में संचालित यादव होटल लगभग 65 साल पुरानी है। जहां आसपास के लोग पेड़े का स्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। बताया गया कि दादा दुर्गा प्रसाद यादव ने नींव रखी थी। जिसकी शुरूआत चना-चाय से एक गुमटी में हुई थी। धीरे धीरे लोगों की पंसद यहां का समोसा भी बन गया है। बताया गया कि 1960-65 के दौर में जब लोग बैलगाड़ी में शहर आना-जाना करते थे तक यह दुकान चिमनी के ऊजाला में 24 घंटे खुली रहती थी उस समय प्रति समोसा 25 पैसे में दिया जाता था।

दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण व किसान रात में रूक कर यहां चाय नाश्ता करते थे। धीरे-धीरे दुकान की पहचान बढ़ती गई। अब यादव होटल बिंझिंया की खास पहचान बन गई है। दुर्गाप्रसाद के बाद उनके बड़े बेटे स्व लक्ष्मीनारायण यादव व धनीराम यादव ने होटल के संचालन की जिम्मेदारी संभाली। कुछ समय बाद बड़े भाई अन्य कार्य में लग गए। धनीराम यादव ने होटल को व्यवस्थित करने का काम शुरू किया। गुमठी के सामने एक दुकान किराये से ली। वहां टेबिल कुर्सी भी किराये से लेकर होटल चलाई। समय बदलता गया और अब धनीराम के दो बेटे राहुल व रोहित यादव भी अपने पिता की मदद कर रहे हैं। होटल में जनलर स्टार्स के साथ अन्य आवश्यक सामग्री का विक्रय भी किया जा रहा है। यहां खोबे से बने पेड़े की मांग कुछ समय से अधिक है। पेड़े का निर्माण नैनपुर, पिंडरई, बिछिया व घंसौर से आने वाले खोबे से किया जाता है। जिसका स्वाद लोगों को खूब भा रहा है।