
अखिल विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का फूंका पुतला
मंडला। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लावण्या को न्याय दिलाने व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों समेत सभी कार्यकर्ताओं को छोडऩे की मांग की है। साथियों को नहीं छोडऩे पर भारत के कोने-कोने में तमिलनाडु सरकार के विरोध में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। तमिलनाडु में 19 जनवरी को सेक्रट हार्ट नामक मिशनरी विद्यालय में हुई लावण्या की मृत्यु को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन तेज हो रहे हैं। सोमवार की दोपहर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने चिलमन चौक चौराहे मंडला पर नारेबाजी करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का पुतला फूंक कर प्रदर्शन किया। जिला संयोजक आनंद मरावी ने कहा जिस प्रकार तमिलनाडु की सरकार लावण्या के हत्यारों को बचाने का प्रयास कर रही है, वो ठीक नहीं है। जब तक लावण्या को न्याय नहीं मिलता, विद्यार्थी परिषद भिन्न भिन्न तरीके से सरकार का विरोध करता रहेगा। जिला संयोजक आनंद मरावी ने बताया कि भारत एक गणतांत्रिक राष्ट्र हैं। यहां प्रत्येक व्यक्ति को अपने अनुसार जीवन व्यतीत करने की आजादी है। कोई भी किसी को भी कृत्य के लिए बाध्य नहीं कर सकते। जहां लोग विद्यालय को मंदिर का नाम देते हैं, वहीं मत परिवर्तन के नाम पर मिशनरी स्कूल की छात्रा को इतनी यातनाएं दी जाती हैं कि वह अपनी जान ले लेती हैं। इसके साथ ही अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि किस प्रकार से तमिलनाडु में मिशनरियों के स्कूल में मतांतरण के लिए 17 वर्षीय लावण्या को प्रताडि़त किया गया और उस कारण से उसने आत्महत्या कर ली। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार का ऐसा दोगलापन है कि एक तरफ जिस महिला को इस केस में गिरफ्तार किया गया था, उसकी बेल पर केबिनेट मंत्री ने स्वागत किया। दूसरी तरफ लावण्या को न्याय दिलवाने के लिए लडऩे वाली विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय महामंत्री सहित अन्य कार्यकर्ताओं की असंवैधानिक गिरफ्तारी की गई। तमिलनाडु सरकार न्याय विरोधी सरकार है। जिला संयोजक ने बताया कि तमिलनाडु पुलिस द्वारा 14 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास के सामने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। उन्हें पहले एक मैरिज हाल कल्याण मंडपम ले गए। वहां लंबे समय तक रखा गया। रात 11 बजे उन्हें एसडीएम (ड्यूटी मजिस्ट्रेट) के सामने पेश किया गया। वहां मामले की बहस शुरू हुई। सुनवाई 12.30 बजे तक चली। इकसे बाद उन्हें 14 दिन के न्यायिक रिमांड पर भेजने का आदेश दिया गया। अभाविप के कार्यकर्ता रातभर दंडाधिकारी की मौजूदगी में रहे। रात 12 बजे के बाद चली बहस के बाद सौदापट मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 36 कार्यकर्ताओं में से तीन को नाबालिग होने के कारण रिहा कर दिया और बाकी 33 जिनमें राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी, राष्ट्रीय मंत्री मुथु रामलिंगम और अन्य को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत पर भेजा गया। उनके खिलाफ आइपीसी की धारा 353 लोक सेवक पर हमला जो गैर जमानती अपराध है, का झूठा लगाया गया है। विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और किसी भी छात्र द्वारा एक खरोच तक नहीं किया गया था।
Published on:
22 Feb 2022 03:22 pm
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