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होलिका उत्साह को लेकर कलाकार मूर्ति को दे रहा अंतिम रूप

दो साल के बाद इस बार लोगों में दिखा काफी उत्साह

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होलिका उत्साह को लेकर कलाकार मूर्ति को दे रहा अंतिम रूप

होलिका उत्साह को लेकर कलाकार मूर्ति को दे रहा अंतिम रूप

मंडला. पांच दिवसीय रंगोत्सव पर्व को लेकर बाजार रंग-गुलाल, पिचकारी से सजने लगे हैं। वहीं सधे हाथों से होलिका प्रतिमाएं भी गढ़ी जाने लगी है। कोरोना संक्रमण के कम होने से होली त्योहार को लेकर मूर्तिकार भी खासे उत्साहित है। होलिका दहन के लिए शहर के मूर्तिकार पारंपरिक व आधुनिकता का समावेश कर होलिका प्रतिमाओं को आकार दे रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार न सिर्फ व्यापार अच्छा होगा बल्कि प्रतिमाएं बनाने की लागत भी निकल आएगी। क्योंकि कोरोना काल के चलते लगाई गई पाबंदियों के चलते दो वर्ष तक मूर्तिकारों का व्यापार प्रभावित रहा। अब जब कोरोना कम हो गया है पाबंदिया हट गई ऐसे में मूर्तिकारों में भी ये उम्मीद बंध गई है कि इस बार उन्हें उनकी मेहनत का प्रतिफल जरूर मिलेगा। होलिका दहन के लिए शहर के मूर्तिकार पारंपरिक व आधुनिकता का समावेश हर होलिका प्रतिमाओं का आकार दे रहे हैं। गौंरतलब है कि दो वर्ष तक कोरोना काल की वजह से शहर के मूर्तिकारों का व्यापार प्रभावित रहा है। अब जब कोरोना कम हो गया है, पाबंदिया हट गई ऐसे में मूर्तिकारों में उम्मीद बंध गई है कि इस बार उन्हें उनकी मेहनत का प्रतिफल जरूर मिलेगा। उन्हें उम्मीद है कि इस बार न सिर्फ व्यापार अच्छा होगा बल्कि प्रतिमाएं बनाने की लागत भी निकल आएगी। मूर्तिकारों ने बताया कि होलिका दहन के लेकर प्रतिमाओं की पूछ-परख बढ़ गई है। कुछ लोगों ने बयाना देकर बुकिंग करा लिया है। अभी तो वैसा व्यापार नहीं हो रहा है लेकिन त्यौहार के दो चार दिन पहले मूर्ति बाजार में अच्छी रौनक देखने को मिलेगी। 17 मार्च होलिका दहन को लेकर बुधवारी चौंक, सिंह वाहिनी चौंक, उदय चौंक, सराफा बाजार में होलिका प्रतिमाओं को आकार दिया जा रहा है। शीतलामाई क्षेत्र में करीब दो दर्जन दुकानें है। यहॉ प्रत्येक दुकान में तीन से पांच फीट तक की ऊंचाई की इस बार 200 से ज्यादा प्रतिमाएं बनाई गई हैं। मूर्तिकारों ने बताया कि कोरोना के चलते पिछले वर्षो में एक दुकान से 50 प्रतिमाएं ही बिकती थी।
लगातार बढ़ रही महंगाई का असर होलिका प्रतिमाओं पर भी पड़ा है। मूर्तिकारों के अनुसार इस बार बाजार में 500 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक की प्रतिमाएं तैयार की जा रही है। मूर्तिकारों का कहना है कि प्रतिमाओं से हमे लाभ नही कमाना है प्रतिमाओं की लागत निकल आए इतना ही हमारे लिए काफी है। कोरोना प्रतिबंध हटने से काफी उम्मीद जुड़ी है।