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ब्लड डोनेशन: 7 वर्षों में कर चुके हैं 28 बार

मरीजों की जान बचाने का जुनून सवार

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Blood donation: have done 28 years in 7 years

ब्लड डोनेशन: 7 वर्षों में कर चुके हैं 28 बार

मंडला। खून की कमी झेलते मरीजों की जान बचाने के लिए इस शख्स पर शायद जुनून ही सवार है कि वह आए दिन रक्त दान कर इस महादान के अनुष्ठान में अपनी आहुति दे रहे हैं। यदि दो रक्तदान के बीच 3 महीने के अंतराल का अंतर अनिवार्य न हो तो ये शख्स हर महीने रक्तदान करे। यह कहना है जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों और ब्लड बंैक के अधिकारी-कर्मचारियों का। जी हां, यहां बात हो रही है जिला मुख्यालय के खैरी ग्राम पंचायत निवासी दिलीप चंद्रौल की। जिन्होंने 14 फरवरी को 28वीं बार रक्तदान किया और खून की कमी के कारण जिंदगी और मौत के बीच झूलते मरीज की जान बचाई। दिलीप का कहना है कि एक वाकये ने उनके जीवन में रक्तदान का संकल्प लेने के लिए विवश कर दिया। यही कारण है कि उन्होंने प्रण कर लिया कि यदि उनकी जानकारी मे कोई ऐसा मरीज आया, जिसे रक्त की आवश्यकता है तो वे उसके लिए रक्त की व्यवस्था अवश्य करेंगे और स्वयं पहले रक्तदान करेंगे। दिलीप बताते हैं कि आदिवासी इलाके में ज्यादातर मरीज समय पर खून न मिलने के कारण ही असमय मौत के मुंह में चले जाते हैं।
दिलीप बताते हंै कि मानव जीवन बेशकीमती है और रक्तदान महादान, एक यूनिट रक्त से यदि किसी का जीवन बचाया जा सकता है तो रक्तदान करने में कोई बुराई नहीं। एक अकेले के जरिए इस संकल्प को पूरा कर पाना मुश्किल था, यही कारण है कि दिलीप ने गौसेवा और रक्तदान संगठन का गठन किया और अपनी रक्तदान की यात्रा में अन्य युवाओं को भी शामिल कर लिया।
अभिभूत हैं नरेश नंदा
14 फरवरी को जिला अस्पताल में लफरा गांव की निवासी फोलूबाई नंदा को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया। उनके शरीर में खून की बेहद कमी होने के कारण दवाइयां कारगर साबित नहीं हो रही थीं। जानकारी मिलने पर उमाशंकर सिंधिया ने रक्तदाता दिलीप चंद्रौल को खबर की। शहर से बाहर होने के बावजूद जब दिलीप वापस लौटे तो मरीज से मुलाकात की। किसी अन्य रक्तदाता की व्यवस्था न होता देख दिलीप ने रक्तदान किया। मरीज के साथ उनके परिजन नरेश नंदा ने दिलीप का जुनून देखा तो अभिभूत हो गए। दिलीप का 28वीं बार रक्तदान था। दिलीप जिलेवासियों से अपील करते हैं कि रक्तदान करके देखिए, किसी की जान बचा लेने से अच्छा लगता है।