
नहीं आ रहे रक्तदाता, खाली हो रहा ब्लड बैंक
मंडला। तापमान में हो रही लगातार बढ़ोतरी का असर जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक दिखाई देने लगा है। रक्तदान के लिए आयोजन न होन व सामाजसेवियों के आगे न आने से ब्लड बैंक में खून की मात्रा कम होती जा रही है। ब्लड डोनेशन कैंप न लगने से पर्याप्त मात्रा में ब्लड डोनेट नहीं हो रहा है वर्तमान में 350 यूनिट की क्षमता रखने वाले ब्लड बैंक महज 3 यूनिट ब्लड ही उपब्लध है। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों और प्रसव के लिए आई महिलाओं के परिजनों को ब्लड के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में मात्र 3 यूनिट ब्लड बचा हुआ है। ब्लड बैंक के भरोसे ही खून के लिए पहुंच रहे मरीजों के परिजनों को डोनर साथ नहीं होने से बिना ब्लड के वापस लौटना पड़ रहा है। यहां तक कि मरीज के परिजन और परिचित भी ब्लड देने से कतरा रहे है। ऐसे में सिकलसेल और थेलेसिमिया ग्रसित मरीजों सहित महिला अस्पताल में ऑपरेशन केस के मरीजों की फजीहत हो रही है।
जिले में सिकलसेल और अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है। इन बीमारियों के मरीजों को हर माह एक से दो यूनिट ब्लड चढ़ाना बहुत आवश्यक होता है। वहीं, आदिवासी बाहुल्य जिले में महिलाएं एनिमिया पीडि़त भी है। जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को भी ब्लड लगाना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार हर प्रतिदिन सिकलसेल के चार या पांच, गर्भवती महिलाओं के लिए 10 से 15 यूनिट ब्लड रोज लग रहा है। सिकलसेल, थेलेसिमिया के मरीजों को निशुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। ब्लड बैंक में ब्लड नहीं होने से इन बीमारियों के मरीजों को ब्लड नहीं मिल पा रहा है। कहने को रक्तदान महादान का नारा दिया जाता है, लेकिन मंडला जिले में रक्तदान के लिए अभी भी उतनी जागरुकता नहीं आ पाई है, जितनी होना चाहिए। मरीज के साथ आने वाले सगे रिश्तेदार और परिचित भी ब्लड देने से कतराते है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में गरीब और मजदूरी पेशा वर्ग के लोगों का मानना है कि रक्तदान करने से उन्हें कमजोरी आ जाएगी। जिसके चलते ऐसे लोग सिर्फ और सिर्फ ब्लड बैंक के भरोसे ही अस्पताल पहुंचते हैं और परेशान होते है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में औसतन 20 से 50 यूनिट ब्लड की रोज आवश्यकता होती है। ब्लड बैंक और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर ब्लड डोनेट कैंप भी लगाए जाते हैं, लेकिन आवश्यकता से कम ही ब्लड मिल पाता है।
शरीर में स्फूर्ति पैदा करता है रक्तदान
चिकित्सकों के अनुसार रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की हानि नहीं बल्कि रक्त का संचार होता है। तीन माह बाद इतनी ही मात्रा में बन जाता है। रक्तदान के तुरन्त बाद ही नई लाल कोशिकाए बनने से शरीर में स्फूर्ति पैदा होती है। रक्तदान करते रहने से हृदय रोग में 5 प्रतिशत की कमी आ जाती है। अस्थिमज्जा लगातार क्रियाशील बनी रहती है। रक्त द्वारा संक्रमित होने वाली बीमारियों की स्वत: जांच हो जाती है। 1 यूनिट ब्लड से कई प्रकार के ब्लड कम्पोनेंट बनाकर कई मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है। जरूरी है कि रक्तदान का महत्व जाने और साल में एक बार या दो बार रक्तदान जरूर करें।
जागरुकता की कमी
रक्तदान को लेकर अभी भी लोगों में जागरुकता नहीं आई है। मरीज के परिजन ही रक्तदान करने से घबराते है। ब्लड उसी को लगता है जिसे बहुत आवश्यकता होती है। जब तक रक्तदाता सामने नहीं आएंगे हम कहां से ब्लड उपलब्ध करा पाएंगे।
डॉ राकेश खरे, ब्लड बैंक प्रभारी
रक्तदान के लिए संगठन आगे रहता है। जब भी जरूरत पड़ती है सदस्य जाकर रक्तदान करते हैं। रक्तदान के लिए अन्य लोगों को भी आगे आना चाहिए ताकि पर्याप्त ब्लड उपलब्ध रहे।
दिलीप चंद्रौल, अध्यक्ष, गौ सेवा एवं रक्तदान संगठन
Published on:
05 May 2019 02:15 pm
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