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मंडला

video story:– छठ पूजा : रपटा तट में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर की सुख-समृद्धि की कामना

रपटा घाट में छठ पूजन के लिए पहुंचे श्रद्धालु।

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मंडला. उत्तर भारत में मनाया जाने वाला महापर्व छठ जिले में भी विगत कई वर्षों से लगातार मनाया जा रहा है। रपटा घाट पर यहां के निवासी सभी परिवार के लोग एकत्रित होकर पूजा-अर्चना करते हैं। छठ की शाम सूर्यास्त के समय सूर्य को अर्घ्य देने के बाद अगले दिन अलसुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर निर्जला व्रत महिलाएं तोड़ेंगी। पहले दिन नहाए खाए, दूसरे दिन खरना और फिर तीसरे दिन सूर्य की पूजा के बाद चौथे दिन सूर्य को अर्घ्य देकर इसका समापन किया जाएगा। बताया गया कि महिलाएं अपने पुत्र की मंगल कामना और घर में सुख शांति के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पहले दिन खीर खाकर उपवास शुरू करती हैं और अंतिम दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के बाद गन्ना या गुड़ खाकर पानी पीने के बाद वह अपना व्रत तोड़ती हैं। पूजा-अर्चना के बाद सूर्य देव की सभी ने महाआरती की गई।

सूर्य उपासना का पर्व सूर्य षष्ठी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर नर्मदा घाट में छठ पूजन के लिए शाम 4 बजे के बाद से भीड़ शुरू होने लगी थी। सूर्य अस्त का समय होते-होते सैकड़ों की संख्या में रपटा घाट सहित अन्य घाटों में श्रद्घालु पहुंच गए थे। यहां इन्होंने विधि-विधान के साथ भगवान सूर्य का पूजन अर्चन किया गया और सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर सुख, शांति, समृद्घि का आशीर्वाद लिया।

बैंड बाजा के साथ नाचे-झूमते हुए पहुंचे नर्मदा तट में छठ पूजन के लिए रपटाघाट में बड़ी संख्या में श्रद्घालु पहुंचे थे। जिनमें कई तो बैंड-बाजा के साथ सिर में पूजन सामग्री रखे झूमते हुए जा रहे थे। नर्मदा तट में पहुंचकर यहां गन्ने का मंडप तैयार किया गया। इसके बाद फूल, प्रसाद, फल, पान के साथ नर्मदा जी और सूर्य भगवान का पूजन किया गया। पूजन के दौरान ढलते सूरज को अर्घ्य दिया गया। पूजन में सभी प्रकार के मौसमी फलों के साथ इस समय होने वाली हरी सब्जियों को भी पूजन सामग्री में शामिल किया गया था। नर्मदा जल में खड़े होकर पुरोहितों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। जिनकी मनोकामना पूरी होती है वे बाजे गाजे के साथ गन्ने का मंडप सजाकर पहुंचते हैं।

महिलाओं के साथ पुरुष भी रखते हैं व्रत

यह व्रत महिलाओं के साथ ही पुरुष भी करते हैं। पूजन करने पहुंचे लोगों ने बताया कि छठ पूजन चार दिनों तक चलता है। दिन भर व्रत रखने के बाद शाम को पूजन कर फलाहार किया जाता है। पूजन में ठेकुआ (जो कि मैदा, आटा शक्कर से बनाया जाता है) भगवान को अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही खीर का भोग भी लगाया जाता है। आज उगते सूर्य का पूजन करने के बाद ही जल गृहण किया जाएगा।

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