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रेशम उद्योग पर हावी कोरोना संकट

मजदूर नहीं मिलने से घटा उत्पादन

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Corona crisis dominates silk industry

Corona crisis dominates silk industry

मंडला. जिले में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संकट का असर अब रेशम उद्योग पर भी पडऩे लगा है। लूम में काम करने वाले कारीगरों की कमी होने के कारण जिले में रेशम का उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। जिले में मलबरी ककून और टसर ककून का रिकार्ड उत्पादन होने के बावजूद उस मात्रा में सिल्क का उत्पादन नहीं हो पा रहा है जितनी यहां के रेशम प्लांट की क्षमता है। रेशम उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि बबैहा स्थित सिल्क प्लांट में प्रति दिन 15-17 मीटर सिल्क का उत्पादन किया जा सकता है लेकिन फिलहाल यह उत्पादन 10-12 मीटर में सिमट चुका है। हालांकि धागा उत्पादन में किसी तरह की गिरावट अभी तक दर्ज नहीं की गई है।
लाखों ककून से धागा उत्पादन
जिले के 29 रेशम केंद्रों से प्रति वर्ष लगभग 23 हजार किलोग्राम मलबरी ककून का उत्पादन किया जा रहा है और टसर ककून का उत्पादन 15 लाख नग प्रतिवर्ष किया जा रहा है। इनसे बने धागे का उपयोग सिल्क के वस्त्र बनाने में किया जाता है। जिले में प्रतिवर्ष 2 हजार किलोग्राम रेशमी धागे का निर्माण किया जा रहा है और इससे सिल्क के वस्त्रों का उत्पादन किया जाता है। धागों का बबैहा स्थित प्लांट में भेजा जाता है जहां सिल्क की साडिय़ां और रेशमी कपड़े के थान का उत्पादन किया जाता है।
5 में से एक लूम खाली
बबैहा प्लांट में 5 लूम स्थापित किए गए हैं। जहां कारीगरों के जरिए रेशमी साडिय़ां और वस्त्रों के थान का उत्पादन किया जा रहा है। लेकिन फिलहाल 5 में से 4 लूम पर ही काम हो रहा है। कारीगरों की कमी होने के कारण सभी लूम में उत्पादन नहीं किया जा रहा है। बताया गया है कि एक कारीगर एक लूम में दिन भर में 2.5-3.0 मीटर वस्त्र का उत्पादन करता है। इस तरह प्रतिदिन प्लांट में 12-15 मीटर वस्त्र उत्पादन हो जाता है। लेकिन एक लूम रिक्त होने से एक दिन में 2.5-3.0 मीटर सिल्क का उत्पादन घट गया है। यदि इसे मासिक दर पर देखा जाए तो प्लांट में एक महीने में लगभग 100 मीटर सिल्क का उत्पादन गिर चुका है। गौरतलब है कि इन प्लांट से निर्मित सिल्क की साडिय़ों को जब तैयार किया जाता है तो एक साड़ी की कीमत की शुरूआत ही 8 हजार रुपए से होती है जो 25 हजार रुपए तक पहुंचती है।
फैक्ट फाइल:
मलबरी ककून उत्पादन- 23 हजार किग्रा प्रतिवर्ष
टसर ककून उत्पादन- 15 लाख नग प्रतिवर्ष
रेशमी धागा उत्पादन - 2000 किग्रा प्रतिवर्ष
रेशमी वस्त्र उत्पादन- 3-4 हजार मीटर प्रतिवर्ष