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स्वाइन फ्लू से महिला की मौत, गांव में दहशत

स्वास्थ्य विभाग और नगरपालिका की लापरवाही से संक्रमण

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Digambar Jain Muni Shantisagar

Digambar Jain Muni Shantisagar

मंडला. आखिरकार स्वाइन फ्लू का खतरा जिला मुख्यालय से इस तरह से बढ़ चुका है कि एक पीडि़ता ने इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा दी। मामला छोटी खैरी क्षेत्र का है। जहां आवारा सूकरों का आतंक पिछले तीन महीने से लगातार जारी है। इस संबंध में नगरपालिका प्रशासन को शिकायत भी की जा चुकी थी। जिला मुख्यालय में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ाने में स्थानीय नगरपालिका सीएमओ सी के मेश्राम का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग बताया जा रहा है। ५ अगस्त २०१७ को ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में स्वाइन फ्लू एलर्ट जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय के रिहायशी इलाकों में सूकरों की धमाचौकड़ी और आतंक बदस्तूर जारी है। जबकि एलर्ट जारी होते साथ नगरपालिका प्रशासन को आवारा और पालतू सूकरों को शहर और रिहायशी इलाकों से तत्काल बाहर किया जाना था। नगरपालिका सीएमओ ने इस एलर्ट को बिल्कुल गंभीरता से नहीं लिया और मानो सूकर पालकों को खुली छूट दे दी कि वे अपने अपने सूकरों को पूरे शहर में स्वतंत्र छोड़ सकते हैं। यही कारण है कि नगर के महात्मा गांधी वार्ड और नर्मदा जी वार्ड के पालकों के दर्जनों सूकर पूरे शहर में एक साथ धमाचौकड़ी मचाते हुए किसी भी वक्त देखे जा सकते हैं। एलर्ट जारी होने के ढाई महीने गुजर जाने के बाद भी सूकर पालकों को नगरपालिका प्रशासन द्वारा आवारा और पालतू सूकरों को नगर से बाहर सूने इलाकों में भेजे जाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। गौरतलब है कि स्वाईन फ्लू (एच1एन1) बीमारी का वायरस संक्रमणकारी है। सूकर इसका वाहक होता है तथा स्वाईन फ्लू का वायरस जुलाई से फरवरी माह में सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के निकटवर्ती राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, गुजरात में पिछले एक माह में स्वाईन फ्लू के प्रकरणों में वृद्वि पाई गई है। यही कारण है कि जिले में एलर्ट जारी किया गया था। छोटी खैरी निवासी पिछले तीन महीने से आवारा सूकरों की धमाचौकड़ी से परेशान हंै। ये सभी सूकरों के पालक महात्मा गांधी वार्ड में रहते हैं। सूकरों के आतंक के कारण क्षेत्र की निवासी रजनी श्रीवास स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई और अंतत: उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद २५ अक्टूबर को क्षेत्र के विवेक अग्निहोत्री, संतोष भलावी, प्रवीण श्रीवास, अनूप करोले आदि ने कलेक्टर सूफिया फारुखी से शिकायत की और अपील की कि क्षेत्र से आवारा सूकरों का आतंक खत्म करने के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए।
सूकरपालकों की सूची
नगरपालिका द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार, नगर में १२ सूकर पालक हैं-गीताबाई, रामकुमार, नरेंद्र, संतोष, भगतसिंह, राजेंद्र, राजकुमार, सुजीत, उमेश, रवि, संतू और राजेंद्र। इन सभी सूकर पालकों को नोटिस दिए जाना चाहिए लेकिन जानकारी के मुताबिक, इनमें से किसी भी सूकरपालक को नगरपालिका प्रशासन ने न ही कोई नोटिस जारी किया है और न ही उनसे सूकरों को शहरी सीमा से बाहर करने की बात कही गई है। सीएमओ सीके मेश्राम का कहना है कि बहुत से सूकर पालक सूची में शामिल नहीं हैं। कई पालक इस बात को स्वीकार भी नहीं करते कि सूकर उनके हैं। सूकरों को पकड़कर शहर से बाहर किए जाने के लिए भी नगरपालिका प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है।