
श्रीकृष्ण-रूक्मणी विवाह में जमकर झूमे श्रद्धालु
मंडला। मनेरी में सोनी परिवार द्वारा संगीतमयी श्रीमद भागवत पुराण का आयोजन कराया जा रहा है। कथा वाचक पं. उदय प्रकाश शास्त्री द्वारा संगीतमयी कथा सुनाई गई। कथा सुनने रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामवासी पहुंचकर धर्म लाभ ले रहे हैं। बताया गया कि यह आयोजन स्व. राजेंद्र सोनी के पुत्र नितिन सोनी, प्रमोद सोनी, रवि सोनी, संतोष सोनी, विमल सोनी एवं परिजनों द्वारा आयोजित किया गया है। जिसके जीवन में दया धर्म क्षमा हैं वही ईश्वर को महसूस कर सकता है। आयोजकों ने बताया कि आज पूजन, हवन के बाद विशाल भण्डारा का आयोजन किया जाएगा। आज राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई जाएगी। कन्या भोज, भण्डारा के साथ आयोजन का समापन होगा। सोनी परिवार द्वारा अधिक से अधिक लोगों से इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने की अपील की गई है।
शहर के पड़ाव स्थित श्रीराम मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कथा वाचक पं. ओम प्रकाश शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की संगीतमयी कथा सुनाई जा रही है। शनिवार को शास्त्री जी ने श्री कृष्ण-रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया। कृष्ण-रुक्मणी विवाह में श्रद्धालु झमकर झूमे। कथा वाचक शास्त्री ने कहा कि, प्रभु की कृपा के लिए भक्ति की आवश्यकता है। इस दौरान कृष्ण रुक्मणी की सजीव झांकी सजाई गई तथा संगीतमय भजनों पर महिला श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर जमकर झूमे। शास्त्री ने कहा कि श्री कृष्ण ने अपने मामा का नहीं बल्कि उसके अहंकार का वध किया। द्वापर युग में जब कंस का अत्याचार बढ़ा तब भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में श्रीकृष्ण का जन्म लेकर बड़े- बड़े राक्षसों का वध करने के बाद अंत में पापी कंस का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से छुटकारा दिलाया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा नरेश के रूप में विराजमान होने के साथ देवी रुक्मणी के साथ धूमधाम से विवाह किया। श्रीहरि के जयघोष से पूरा पांडाल गूंज उठा। कथा वाचक द्वारा उद्घोषित मंत्रोचार के बीच जैसे ही विवाह का कार्य संपन्न हुआ तो श्रद्धालुओं की भीड़ ने पुष्प वर्षा की। इस अवसर पर सुमंत्रा, बाई, गिरिजा शंकर, त्रिवेणी, केशव प्रसाद,रंजीता, लक्ष्मी, पप्पू, हरिप्रसाद, हेमवती सहित बड़ी संख्या श्रद्धालु उपस्थित रहे। पं. ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। द्वारपाल के मुख से सुदामा सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए। लोग समझ नहीं पाए कि आखिर सुदामा में क्या खासियत है कि, भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठाकर सुदामा के पांव पखारे। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
Published on:
13 Mar 2022 01:01 pm
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